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बिहार: जातीय जनगणना पर एनडीए में खटपट, सीएम नीतीश कुमार पक्ष में, मांझी ने भी मिलाया सुर

अमर उजाला ब्यूरो, पटना Published by: देव कश्यप Updated Sun, 25 Jul 2021 06:42 AM IST

सार

  • केंद्र सरकार द्वारा जाति आधारित जनगणना नहीं कराये जाने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ने कहा कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए, यह सबके हित में है।
  • जीतन राम मांझी ने भी केंद्र की बातों का विरोध किया और कहा कि जातीय जनगणना होनी चाहिए।
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नीतीश कुमार-जीतन राम मांझी (फाइल फोटो)
नीतीश कुमार-जीतन राम मांझी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार

बिहार सरकार में भाजपा और जदयू भले ही साथ हों लेकिन, कई मामलों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुर में सुर नहीं मिलाते हैं। यही वजह है कि कई मुद्दों पर दोनों के सुर और ताल अलग-अलग हो जाते हैं।
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नीतीश कुमार कई मामलों में केंद्र सरकार के निर्णयों का मुखर विरोध करने लगे हैं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत के मामलों को केंद्र सरकार झुठला रही है जबकि नीतीश कुमार ने कहा है कि तीसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी ना हो इसके लिए इंतजाम किए जा रहे हैं।


जाति आधारित जनगणना का मामला हो या फोन टैपिंग या फिर एनआरसी और सीएए नीतीश ने केंद्र सरकार का समर्थन नहीं किया है। केंद्र सरकार द्वारा जाति आधारित जनगणना नहीं कराये जाने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जाति आधारित जनगणना कराने को लेकर फरवरी 2019 और 2020 में विधानसभा से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया था।

वर्ष 1990 से ही हमलोग इसको लेकर विचार व्यक्त करते रहे हैं। जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए इसको लेकर पहले भी कई बार अपनी बातों को रख चुके हैं। केंद्र सरकार से हम आग्रह करेंगे कि एक बार जाति आधारित जनगणना जरूर करनी चाहिए। नीतीश कुमार ने ये भी कहा कि 2010 में हुई जनगणना की 2013 में रिपोर्ट आई लेकिन उसे प्रकाशित नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि किस इलाके में किस जाति की कितनी संख्या है इसको लेकर एक बार जाति आधारित जनगणना जरूर होनी चाहिए। एससी-एसटी के अलावे गरीब गुरबा को भी इससे लाभ मिल सके और पता चल सके कि उनकी सही मायने में संख्या कितनी है। जब संख्या का पता चलेगा तो उनके कल्याण के लिए ठीक ढंग से काम हो सकेगा। संसद में बताया गया है कि अब जाति आधारित जनगणना नहीं होगी। हम आग्रह करेंगे कि इस पर गौर करें, पहले भी हमने इस पर न सिर्फ बात की है बल्कि इसको लेकर प्रस्ताव भी भेजा है। हमलोगों की इच्छा है कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए, यह सबके हित में है।

नई तकनीक का दुरुपयोग
फोन टैपिंग से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जो नई तकनीक आई है उसके एक तरफ लाभ हैं तो दूसरी तरफ उसका दुरुपयोग भी होता है। इस पर निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। केंद्र सरकार ने भी कहा है कि जो गलत चीज है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऑक्सीजन की कमी से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में अचानक ऑक्सीजन की काफी मात्रा में जरूरत पड़ी, उसका हर तरह से समाधान किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी तैयारी की जा रही है कि कोरोना समेत सभी बीमारियों के लिए कभी भी ऑक्सीजन की कमी न हो। सभी अस्पतालों में इसकी पूरी व्यवस्था की जा रही है।

जीतन राम मांझी भी जातीय जनगणना के समर्थन में
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को गया के एक निजी विद्यालय में अपनी पार्टी का छठा स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान पार्टी से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। वहीं, जातीय जनगणना पर नीतीश कुमार के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि वर्ष 2017 में जातीय जनगणना की मांग की गई थी। उन्होंने कहा है कि जातीय जनगणना सभी की होनी चाहिए। चाहे वह किसी वर्ग का हो। 

मांझी ने ट्वीट कर कहा कि 'जब देश में सांप, बाघ, बकरी की जनगणना हो सकती है तो फिर जातियों की क्यों नहीं? देश के विकास के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है। पता तो लगे कि किसकी कितनी आबादी है और उसे सत्ता में कितनी भागीगारी मिली।'

मांझी ने कहा कि जातीय जनगणना होनी चाहिए लेकिन सभी जातियों की न कि सिर्फ एससी व एसटी की। सवर्ण जाति के गरीबों को भी आरक्षण मिला, लेकिन भेदभाव किया गया है। पहले साढ़े 49 प्रतिशत आरक्षण था, अब संसोधन कर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। अगर जातीय जनगणना नहीं होगी तो घटक दल सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण के नाम पर एससी-एसटी को अवरुद्ध किया गया है।
 

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