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Gopal Khemka Murder : बेटे गुंजन की दिनदहाड़े हत्या से टूटकर संभले भी नहीं थे गोपाल खेमका, भाजपा से जुड़ाव था
Sat, 05 Jul 2025 06:48 AM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Sat, 05 Jul 2025 06:48 AM IST
सार
Bihar News : दिसंबर 2018 में दिनदहाड़े जवान बेटे गुंजन खेमका की हत्या के बाद वर्षों गोपाल खेमका कटे-कटे रहे। पहले भाजपा में सक्रिय थे। बेटे की हत्या के बाद दूर हो गए थे। अब अपराधियों ने घर के सामने गोपाल खेमका की भी जान ले ली।
बेटे गुंजन खेमका की हाजीपुर में फैक्टरी गेट तो पिता गोपाल खेमका की पटना में घर के सामने हत्या।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
बिहार पुलिस अब लंबे समय तक यह दावा नहीं कर सकेगी कि राजधानी पटना भी सुरक्षित है। किसी-न-किसी नाम पर लगातार पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक बदले जा रहे हैं, लेकिन अपराधियों के मन में किसी का खौफ नहीं है। दिसंबर 2018 में हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में अपनी फैक्टरी जाते समय नामी युवा उद्यमी गुंजन खेमका की अपराधियों ने गोली मार हत्या कर दी थी। अब राजधानी पटना में उनके पिता और नामी उद्योगपति गोपाल खेमका की गांधी मैदान के पास स्थित अपार्टमेंट के गेट पर हत्या कर अपराधी निकल गए। बेटे की हत्या से पहले गोपाल खेमका भारतीय जनता पार्टी से गहरा लगाव रखते थे, सक्रिय थे। फिर सरकार पर से विश्वास हटा और अब तो अपराधियों ने उन्हें ही मार डाला।
बेटे को दूसरी बार में मार डाला था, गोपाल पहले हमले में नहीं बचे
बिहार के प्रसिद्ध उद्योगपति और एक जमाने में पटना के टॉप अस्पताल रहे मगध हॉस्पिटल के मालिक गोपाल खेमका पर ऐसा जानलेवा हमला पहली बार हुआ और उनकी जान नहीं बची। बेटे की मौत के बाद वह इस तरह टूटे थे कि अपने हॉस्पिटल को भी बेच दिया था। उद्योगपति परिवार के बड़े बेटे 38 वर्षीय गुंजन खेमका की हत्या हाजीपुर के सबसे चर्चित पासवान चौक के पास हुई थी। दिसंबर 2018 में ठंड की दोपहर करीब एक बजे हाजीपुर स्थित कार्टन फैक्टरी जाते समय अपराधियों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। इसके पहले भी 2016 में गुंजन पर जानलेवा हमला हुआ था, लेकिन तब वह बच गए थे। लेकिन, दिसंबर 2018 में उन्हें कई गोलियां लगीं और डॉक्टर बचा नहीं सके। ड्राइवर भी जख्मी हुआ था। पुलिस ने गुंजन की हत्या मामले में मस्तु सिंह नामक अपराधी को गिरफ्तार किया था। जेल से निकलने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।
भाजपा से जुड़ाव और सामाजिक सक्रियता बेटे की हत्या के बाद घटी
बिहार में कारोबारी और खासकर मारवाड़ी समाज नैसर्गिक रूप से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ाव रखता है, लेकिन गोपाल खेमका कुछ हद तक सक्रिय रूप से इस पार्टी से लगाव रखते थे। वह लघु उद्योग प्रकोष्ठ के बिहार प्रदेश संयोजक भी रह चुके थे। जवान बेटे की हत्या के बाद गोपाल खेमका लंबे समय तक बहुत चीजों से दूर हो गए थे। बेटे की इस तरह हत्या के गुस्से में वह पार्टी से भी किनारे हो गए थे और बिजनेस पर भी उस तरह ध्यान नहीं दे रहे थे। करीब साढ़े छह साल में कुछ घाव नरमाया ही होगा कि अब उनकी हत्या हो गई। वह कुछ समय बिताने के लिए पटना क्लब में अपने साथियों से मिला करते थे। शुक्रवार रात वहीं से लौटने के बाद उनकी हत्या कर दी गई।
बेटे को दूसरी बार में मार डाला था, गोपाल पहले हमले में नहीं बचे
बिहार के प्रसिद्ध उद्योगपति और एक जमाने में पटना के टॉप अस्पताल रहे मगध हॉस्पिटल के मालिक गोपाल खेमका पर ऐसा जानलेवा हमला पहली बार हुआ और उनकी जान नहीं बची। बेटे की मौत के बाद वह इस तरह टूटे थे कि अपने हॉस्पिटल को भी बेच दिया था। उद्योगपति परिवार के बड़े बेटे 38 वर्षीय गुंजन खेमका की हत्या हाजीपुर के सबसे चर्चित पासवान चौक के पास हुई थी। दिसंबर 2018 में ठंड की दोपहर करीब एक बजे हाजीपुर स्थित कार्टन फैक्टरी जाते समय अपराधियों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। इसके पहले भी 2016 में गुंजन पर जानलेवा हमला हुआ था, लेकिन तब वह बच गए थे। लेकिन, दिसंबर 2018 में उन्हें कई गोलियां लगीं और डॉक्टर बचा नहीं सके। ड्राइवर भी जख्मी हुआ था। पुलिस ने गुंजन की हत्या मामले में मस्तु सिंह नामक अपराधी को गिरफ्तार किया था। जेल से निकलने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।
भाजपा से जुड़ाव और सामाजिक सक्रियता बेटे की हत्या के बाद घटी
बिहार में कारोबारी और खासकर मारवाड़ी समाज नैसर्गिक रूप से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ाव रखता है, लेकिन गोपाल खेमका कुछ हद तक सक्रिय रूप से इस पार्टी से लगाव रखते थे। वह लघु उद्योग प्रकोष्ठ के बिहार प्रदेश संयोजक भी रह चुके थे। जवान बेटे की हत्या के बाद गोपाल खेमका लंबे समय तक बहुत चीजों से दूर हो गए थे। बेटे की इस तरह हत्या के गुस्से में वह पार्टी से भी किनारे हो गए थे और बिजनेस पर भी उस तरह ध्यान नहीं दे रहे थे। करीब साढ़े छह साल में कुछ घाव नरमाया ही होगा कि अब उनकी हत्या हो गई। वह कुछ समय बिताने के लिए पटना क्लब में अपने साथियों से मिला करते थे। शुक्रवार रात वहीं से लौटने के बाद उनकी हत्या कर दी गई।
विस्तार
बिहार पुलिस अब लंबे समय तक यह दावा नहीं कर सकेगी कि राजधानी पटना भी सुरक्षित है। किसी-न-किसी नाम पर लगातार पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक बदले जा रहे हैं, लेकिन अपराधियों के मन में किसी का खौफ नहीं है। दिसंबर 2018 में हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में अपनी फैक्टरी जाते समय नामी युवा उद्यमी गुंजन खेमका की अपराधियों ने गोली मार हत्या कर दी थी। अब राजधानी पटना में उनके पिता और नामी उद्योगपति गोपाल खेमका की गांधी मैदान के पास स्थित अपार्टमेंट के गेट पर हत्या कर अपराधी निकल गए। बेटे की हत्या से पहले गोपाल खेमका भारतीय जनता पार्टी से गहरा लगाव रखते थे, सक्रिय थे। फिर सरकार पर से विश्वास हटा और अब तो अपराधियों ने उन्हें ही मार डाला।
बेटे को दूसरी बार में मार डाला था, गोपाल पहले हमले में नहीं बचे
बिहार के प्रसिद्ध उद्योगपति और एक जमाने में पटना के टॉप अस्पताल रहे मगध हॉस्पिटल के मालिक गोपाल खेमका पर ऐसा जानलेवा हमला पहली बार हुआ और उनकी जान नहीं बची। बेटे की मौत के बाद वह इस तरह टूटे थे कि अपने हॉस्पिटल को भी बेच दिया था। उद्योगपति परिवार के बड़े बेटे 38 वर्षीय गुंजन खेमका की हत्या हाजीपुर के सबसे चर्चित पासवान चौक के पास हुई थी। दिसंबर 2018 में ठंड की दोपहर करीब एक बजे हाजीपुर स्थित कार्टन फैक्टरी जाते समय अपराधियों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। इसके पहले भी 2016 में गुंजन पर जानलेवा हमला हुआ था, लेकिन तब वह बच गए थे। लेकिन, दिसंबर 2018 में उन्हें कई गोलियां लगीं और डॉक्टर बचा नहीं सके। ड्राइवर भी जख्मी हुआ था। पुलिस ने गुंजन की हत्या मामले में मस्तु सिंह नामक अपराधी को गिरफ्तार किया था। जेल से निकलने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।
भाजपा से जुड़ाव और सामाजिक सक्रियता बेटे की हत्या के बाद घटी
बिहार में कारोबारी और खासकर मारवाड़ी समाज नैसर्गिक रूप से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ाव रखता है, लेकिन गोपाल खेमका कुछ हद तक सक्रिय रूप से इस पार्टी से लगाव रखते थे। वह लघु उद्योग प्रकोष्ठ के बिहार प्रदेश संयोजक भी रह चुके थे। जवान बेटे की हत्या के बाद गोपाल खेमका लंबे समय तक बहुत चीजों से दूर हो गए थे। बेटे की इस तरह हत्या के गुस्से में वह पार्टी से भी किनारे हो गए थे और बिजनेस पर भी उस तरह ध्यान नहीं दे रहे थे। करीब साढ़े छह साल में कुछ घाव नरमाया ही होगा कि अब उनकी हत्या हो गई। वह कुछ समय बिताने के लिए पटना क्लब में अपने साथियों से मिला करते थे। शुक्रवार रात वहीं से लौटने के बाद उनकी हत्या कर दी गई।