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राजगढ़ में शहीद की अंतिम विदाई के दौरान हादसा, छत गिरने से मची अफरातफरी

दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने के बाद महिला लापता, आरोपी छोड़ पीड़िता को ढूंढ रही पुलिस

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक महिला दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने के बाद लापता हो गई। भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां पुलिस दुष्कर्म के आरोपी को ना ढूंढकर पीड़िता की तलाश कर रही है। रिपोर्ट लिखाने के बाद महिला ने बताया कि उसे टायफाइड हो गया था, जिसके बाद वो अस्पताल में भर्ती हो गई थी।


पुलिस ने जब महिला से अस्पताल की जानकारी ली तो उसने फोन काट दिया और उसके बाद से महिला का फोन बंद आ रहा है। अब पुलिस महिला की तलाश कर रही है। यह मामला निशातपुर थाने का है, विवेचना अधिकारी उर्मिला यादव ने बताया कि एक 37 वर्षीय महिला निजी कंपनी में काम करती थी।

महिला ने 21 अगस्त को दुष्कर्म का मामला पुलिस थाने में दर्ज कराया था। शिकायत के दौरान महिला ने बताया कि दफ्तर जाने के लिए उसने दो साल पहले ऑटो लगवाया था, उसके ऑटो चालक का नाम रमेश कुशवाहा था और वो रोज रोजाना दफ्तर ले जाया करता था।

महिला ने बताया कि छह अगस्त को रमेश उसे बातों में उलझाकर बैरसिया रोड पर स्थित आशियाना कॉलोनी ले गया। महिला ने बताया कि यहां रमेश ने उसकी साथ बदतमीजी की। रमेश ने उस महिला को जान से मारने की धमकी दी, इसलिए वो चुप रही लेकिन बाद में महिला ने शिकायत करने का फैसला किया।

पुलिस के मुताबिक एफआईआर दर्ज कराने के बाद महिला घर चली गई, ज्यादा जानकारी के लिए महिला से फोन पर संपर्क किया गया। पुलिस ने उससे घटनास्थल के बारे में पूछताछ की लेकिन वो ज्यादा कुछ नहीं बता पाई। पुलिस ने बताया कि उसे ज्यादा याद नहीं था, वो मकान किसका था वो भी नहीं बता पाई।

पुलिस ने जब अस्पताल को लेकर जानकारी लेनी चाही तो महिला ने फोन ही बंद कर दिया। इसके बाद से पुलिस महिला की तलाश कर रही है।
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रात भर 105 किलोमीटर साइकिल चलाकर पिता ने बेटे को दिलाई 10वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा

सिंधिया ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कहा- मुझे बनाओ सीएम, जानें हकीकत!

राज्यसभा सांसद और भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फर्जी पत्र लिखने का मामला सामने आया है। इस पत्र में बिहार चुनाव के चलते पीएम मोदी व्यस्तता और अन्य राजनीतिक मसलों का जिक्र किया गया है। साथ ही, ज्योतिरादित्य सिंधिया के फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। इस मसले पर सिंधिया से बातचीत की गई तो उन्होंने पत्र को फर्जी करार दिया, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। 

यह है मामला
बता दें कि सोशल मीडिया पर भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा लिखे एक पत्र की तस्वीर काफी वायरल हो रही है। कहा जा रहा है कि सिंधिया ने यह पत्र पीएम मोदी को लिखा, जिसमें बीजेपी नेताओं द्वारा अपमानित करने का जिक्र है। साथ ही, प्रधानमंत्री से मुलाकात न होने की बात भी कही गई। 

पत्र में लिखी थीं ये बातें
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पत्र में लिखा है। ‘आदरणीय नरेंद्र मोदी जी, मैंने दिल्ली आकर आपसे बात करने की कोशिश की परन्तु आपके स्वास्थ्य एवं बिहार चुनाव की व्यस्तता के चलते आप समय नहीं दे सके। दूरभाष पर चर्चा करने का संदेश मिला था परन्तु मैंने दूरभाष पर चर्चा करने की बजाय आपको यह गोपनीय पत्र लिखना उचित समझा।’

‘पिछले महीने मैंने मोहन भागवत जी को संघ एवं स्थानीय बीजेपी नेताओं द्वारा किए जा रहे असहयोग एवं मेरे समर्थक प्रत्याशियों के विरोध की विस्तृत जानकारी दी थी, अफसोस के साथ लिखना पड़ रहा है समस्या समाप्त होने की बजाय और अधिक बढ़ गयी है। बीजेपी के चुनाव रथ और प्रचार सामग्री से मेरी तस्वीर हटाकर एवं स्टार प्रचारकों की सूची में मुझे दसवें स्थान पर रखकर बीजेपी नेताओं ने न केवल मुझे अपमानित किया है बल्कि सिंधिया घराने के मान-सम्मान को चोट पहुंचाई है।’

‘नरेंद्र तोमर जी, बीडी शर्मा जी एवं नरोत्तम मिश्रा जी द्वारा उपचुनाव में कांग्रेस के पक्ष में कार्य किया जा रहा है वहीं बीजेपी के अन्य नेता इस उपचुनाव से दूरी बना चुके हैं। नरोत्तम मिश्रा जी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर सन्देश दे रहे हैं कि उन्हें केवल एक सीट इसलिए 27 सीटों पर बीजेपी कार्यकर्ता कार्य नहीं करें। इन हालातों ने अब इस चुनाव को सीधे तौर पर सिंधिया परिवार की लड़ाई बनाकर रख दिया है। मुझे खुद अब कहना पड़ रहा है कि यह मेरी लड़ाई है और जनता मुझे देखकर वोट दे।’ 

‘मुझे केंद्र में मंत्री बनाने का आपका वादा अब तक लंबित है। मैं अनुग्रहीत होऊंगा यदि आप मेरी जगह पर शिवराज सिंह चौहान जी को केंद्र में मंत्री बना दें और मुझे मध्यप्रदेश की कमान सौंप दें ताकि मैं सभी विरोधियों की जवाब दे सकूं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं मध्यप्रदेश की कमान संभालते ही बीजेपी के सभी बिगड़ैल नेताओं को ठीक कर दूंगा। शुभकामनाओं सहित।’

ऐसे हुआ मामले का खुलासा
सोशल मीडिया पर पत्र वायरल हुआ तो सिंधिया के निजी सचिव तक पहुंच गया। उन्होंने इस मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया से चर्चा की। जब उन्होंने इस तरह का कोई भी पत्र नहीं लिखने की बात कही तो पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल ने मामले की जानकारी ग्वालियर एसपी को दी। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत केस दर्ज कर लिया। गौरतलब है कि इन दिनों मध्य प्रदेश में उपचुनाव का माहौल है। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कमल नाथ के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है।
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ज्योतिरादित्य सिंधिया ज्योतिरादित्य सिंधिया

मध्यप्रदेश सरकार को झटका, चुनाव आयोग ने 12 डिप्टी कलेक्टरों के तबादलों को रद्द करने का दिया निर्देश

दिग्विजय सिंह

भोपाल: डीजी पुरुषोत्तम शर्मा का वीडियो वायरल, पुलिस अफसर ने पत्नी को बेरहमी से पीटा

मध्यप्रदेश: निजी अस्पताल में कोरोना का इलाज करवा सकते हैं सरकारी कर्मचारी, सरकार करेगी भुगतान

मध्यप्रदेश की सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी योजना की घोषणा की है। सरकार ने एलान किया है कि अगर प्रदेश का कोई सरकारी कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो वो अपना इलाज किसी भी निजी अस्पताल में करा सकता है, इसका भुगतान सरकार करेगी।


सरकार की घोषणा के मुताबिक सरकारी कर्मचारी और उनके परिजन कोरोना का इलाज निजी अस्पतालों में करवा सकेंगे। उनके इलाज में लगने वाली दवा फेविपिरावियर और इंजेक्शन रेमडेसिविर जैसी महंगी दवाइयों समेत पूरे इलाज का खर्चा सरकार वहन करेगी।

इसके लिए कर्मचारी अपना सारा हिसाब-किताब अपने विभाग के माध्यम से जिले के सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षक को भेजेगा और यहीं से मेडिकल बिलों का भुगतान किया जाएगा। हालांकि यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए ही है। 

प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश में कहा गया है कि अगर सरकारी कर्मचारी सामान्य परिस्थितियों में बीमार होते हैं, तो उन्हें सरकार से अनुबंधित 101 निजी अस्पतालों में इलाज की सुुविधा मिलेगी। वहीं अगर कोरोना मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज कराएगी तो इसका भुगतान सरकार नहीं करेगी।

इसके अलावा कांग्रेस सरकार में 12 लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और अध्यापकों के लिए बनी स्वास्थ्य बीमा योजना को अब संशोधित रूप में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत अफसरों से एक हजार रुपये, कर्मचारियों से 500 रुपये, चौथी श्रेणी के कर्मचारियों से 400 रुपये हर महीने बीमा के प्रीमियम के तौर पर लिए जाते, जिससे सरकार को हर साल 400 करोड़ रुपये मिलते लेकिन कर्मचारी प्रीमियम की राशि देने का तैयार नहीं हुए।

अब मध्यप्रदेश सरकार इस योजना को संशोधित कर प्रीमियम की राशि कम करके नए रूप में योजना को लाने की तैयारी कर रही है।
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जामताड़ा जैसे मॉडल पर मध्य प्रदेश के जिलों में ऑनलाइन ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार

झारखंड के जामताड़ा की तर्ज पर मध्य प्रदेश की साइबर सेल ने एक बड़े अंतरराज्यीय ठग के भांडाफोड़ का दावा किया है। इस ऑनलाइन धोखेधड़ी करने वाले लोगों को लॉजिस्टिक सहयोग दिया जाता था, उन्हें झूठी और गलत आईडी पर जारी किए गए सिम कार्ड दिए जाते थे।


मध्य प्रदेश के शिवपुरी में पुलिस ने ऐसे चार लोगों को गिरफ्तार किया है, इसमें टेलीकॉम सर्विस कंपनी के तीन रिटेलर और एक डिस्ट्रीब्यूटर शामिल है। ये लोग दिल्ली और दूसरे राज्यों के ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के लिए लॉजिस्टिक आपूर्तिकर्ता का काम करते थे।

पुलिस ने बताया कि अभी इस गिरोह के कुछ लोग फरार हैं। दरअसर भोपाल के एक व्यापारी ने जनवरी में एक क्रेडिट कार्ड फ्रॉड की शिकायत की थी, जिसकी पुलिस जांच कर रही थी। जांच में जिस आरोपी को पकड़ा उसके पास से दो हजार से ज्यादा सिम कार्ड बरामद किए गए जो अलग-अलग आईडी पर जारी किए गए थे।

पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में झारखंड के जामताड़ा जैसा मॉडल देखा जा रहा है, इसमें शिवपुरी, शियोपुर, गुना और भिंड शामिल हैं। भोपाल के साइबर सेल के एसपी गुरकरण सिंह का कहना है कि 15 जनवरी को भोपाल के निवासी योगेश सूद ने एक शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में कहा गया कि योगेश को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था, कॉल पर महिला बात कर रही थी और खुद को क्रेडिट कार्ड कंपनी का बता रही थी। महिला ने योगेश ने क्रे़डिट कार्ड की सीमा बढ़ाने को कहा और एक लिंक दिया। महिला ने कहा कि इस लिंक पर जाकर सभी प्रक्रिया पूरी करनी है।

योगेश सूद की शिकायत में आगे कहा गया कि जैसे ही उन्होने लिंक पर क्लिक किया, उनके खाते से 1.22 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए। योगेश सूद की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि योगेश के खाते से पैसा 12 ऑनलाइन वॉलेट में ट्रांसफर किया गया था।

जांच में पुलिस को पता चला कि जिस नंबर से योगेश पर कॉल आती हैं और जिन ऑनलाइन वॉलेट में पैसा ट्रांसफर हुआ है वो मध्य प्रदेश के अलग-अलग पतों पर रजिस्टर हैं। पुलिस ने एक टीम को शिवपुरी भेजा, जहां से टेलीकॉम कंपनी के रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर को हिरासत में लिया गया।

जांच अधिकारी अभिषेक सोनेकर ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी आईडी और आधार कार्ड बनाने की बात कबूली है। आरोपियों ने गांव वालों की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रमाण पत्रों के आधार पर ये फर्जी आईडी बनाई और जामताड़ा के मॉडल पर फिशिंग का कारोबार किया।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में सतीश दुबे नाम का एक बिचौलिया भी था, जो फर्जी सिम कार्ड बेचने और बनाने में आरोपियों की मदद करता था। फिलहाल सतीश जेल में है।
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