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भोपाल

सोमवार, 21 अक्टूबर 2019

तीन राज्य... जहां छह महीने पहले बनाई सरकार वहां कांग्रेस को मिलीं 65 में से कुल 3 सीटें

छह महीने पहले सरकार बनाने वाली कांग्रेस को जन भावना के सैलाब ने ऐसा डुबोया कि सीटों की संख्या जीरों पर पहुंच गई। वहीं भाजपा पर भरपूर प्यार लुटाते हुए 24 सीटों से नवाजा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लक्ष्य बनाकर प्रचार, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट जैसे दिग्गज भी कांग्रेस को एक सीट तक नहीं दिला पाए। सत्तारूढ़ पार्टी के हाथ खाली रहने से, प्रदेश में सरकार तो सर्वाधिक सीटें का डेढ़ दशक से चला आ रहा ये ट्रेंड भी टूट गया। वर्ष 2014 की तरह फिर नरेंद्र मोदी का एक तरफा जादू चला और वे सभी पर भारी पड़ गए।  

 2014 के चुनाव में भाजपा ने सभी 25 सीटें जीतकर इतिहास रचा था, इस नतीजे से पहले फिर से यही इतिहास दौहराएगा, इस पर शक हो रहा था। लेकिन जनता ने भाजपा की झोली में सभी 24 सीटें डाल दी। एनडीए गठबंधन की एक सीट नागौर से रालोपा ने जीत का झंडा लहराया। भाजपा की गठबंधन की चाल कांग्रेस के खिलाफ तुरुप का पत्ता साबित हुई। भाजपा ने राजस्थान में गठबंधन कर नागौर सीट जाट समाज के बड़े नेता रालोपा के प्रमुख हनुमान बेनीवाल के लिए खाली की। भाजपा ने बेनीवाल के जरिए प्रदेश के सबसे बड़े जाट वोट बैंक को साधने का सफल प्रयास किया। 

पायलट नहीं बचा पाए गढ़ 
विधानसभा चुनाव में टोंक सीट से विधायक बनकर उप मुख्यमंत्री बने सचिन पायलट टोंक-सवाईमाधोपुर सीट भी कांग्रेस को नहीं जिता पाए। यहां से भाजपा के प्रत्याशी सांसद सुखबीर सिंह जोनपुरिया ने दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने यूपीए में मंत्री रहे नमोनारायण मीणा को हरा दिया।

राजस्थान
कुल सीटें: 25
                 भाजपा+    कांग्रेस    अन्य    
2019           25              00    00    
2014           25              00    00    
2009           04              20    01    
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बड़ा सेक्स स्कैंडल साबित हो सकता है मध्यप्रदेश हनीट्रैप मामला, लैपटॉप से चार हजार फाइलें बरामद

मध्यप्रदेश का हनीट्रैप मामला सुर्खियों में छाया है। कहा जा रहा है कि यह देश का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल हो सकता है। एसएसपी इंदौर रूचि वर्धन मिश्रा ने गुरुवार की शाम बताया कि, हनीट्रैप मामले में मोनिका (मामले के सिलसिले में गिरफ्तार आरोपियों में से एक) को अदालत में गवाह के रूप में पेश किया जाएगा। वह कॉलेज की प्रथम वर्ष की छात्रा है और खुद पीड़ित है। उसके पिता ने भी मानव तस्करी का मामला दर्ज कराया है।
 


जांच कर रहे अधिकारियों को महिलाओं से जब्त किए गए लैपटॉप और मोबाइल फोन में करीब चार हजार फाइलें मिली हैं। इनमें कई अश्लील चैट के स्क्रीनशॉट, अधिकारियों के अश्लील वीडियो, समझौता करने वाले अधिकारियों के वीडियो और ऑडियो क्लिप मिले हैं। इन ऑडियो और वीडियो क्लिप में बड़ी संख्या में कथित तौर पर नौकरशाह, मंत्री और पूर्व सांसद शामिल हैं।

दूसरी ओर बुधवार से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच शुरू कर दी है। टीम के अध्यक्ष संजीव शमी बनाए गए हैं। माना जा रहा है कि जांच के आगे बढ़ने के साथ ही यह देश का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल साबित हो सकता है। फोरेंसिक विशेषज्ञ की टीम महिलाओं से जब्त किए गए लैपटॉप और मोबाइल फोन की लगातार जांच कर रहे हैं। अब तक इनमें से चार हजार वीडियो और ऑडियो क्लिप्स निकाले जा चुके हैं। 
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भोपाल में कौव्वों ने एक मजदूर का जीना किया मुहाल, घर से निकलते ही करते हैं हमला

भोपाल के शिवपुरी जिले के सुमेला गांव में रहने वाले एक दिहाड़ी मजदूर का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। वह घर से बाहर निकलता है और उन पर कौव्वों का एक झुंड हमला शुरू कर देता है। यह सिलसिला पिछले तीन सालों से चल रहा है।

कौव्वों के हमले से बचने के लिये शिव केवट हमेशा एक छड़ी लेकर चलता है, लेकिन आसमान में उड़ते कौव्वे हमेशा मौके की तलाश में रहते हैं कि कब उसके सिर पर चोंच से वार कर दें ।

केवट ने बताया कि यह सब तीन साल पहले शुरु हुआ था। उसने लोहे की तार में फंसे कौवे के एक बच्चे को बचाने के लिये उठाया था लेकिन उसने उसके हाथ में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद कौव्वों को लगा कि केवट ने ही उसे मारा है। केवट बेहद अफसोस जताते हुए कहता है कि काश मैं उन्हें समझा पाता कि मैं केवल उसकी मदद करने की कोशिश कर रहा था।

केवट ने कहा कि उस दिन के बाद से जब भी मैं घर से बाहर निकलता हूं तो अपने बचाव के लिये एक छड़ी रखता हूं। इसके बावजूद कई बार उनके हमले से बच नहीं पाता। 35 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर केवट के ठेकेदार काले खटीक ने बताया कि कौव्वों का दोष दूर करने और इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिये केवट ने एक साल पहले पूजा-पाठ भी करवाया था , लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हुआ।

 केवट के इस दावे के संबंध में पक्षी विशेषज्ञ अजय गड़ीकर ने बताया कि यह बिल्कुल संभव है क्योंकि पक्षियों की याददाश्त अच्छी होती है । उनकी कई इंद्रियां मनुष्य से अधिक तेज होती हैं , इसलिये पक्षियों की कई प्रजातियां हजारों मील तक एक जगह से दूसरी जगह विस्थापित होने के बाद फिर से अपने मूल स्थान पर लौट आती हैं।

उन्होंने बताया कि कौव्वे एक आदमी को चेहरे से पहचान सकते हैं और पक्षियों में कौव्वे आक्रामक भी होते हैं। उनकी देखने, सुनने की शक्ति मानव से अधिक होती है। 
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लंबे समय से बीमार मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम बाबूलाल गौर का निधन, अस्पताल में ली आखिरी सांस

प्रतीकात्मक तस्वीर

कटनी जिले के एक स्कूल का वीडियो वायरल, टीचर के तबादले की बात सुन लिपटकर रोने लगे छात्र

मध्यप्रदेश: 22 शहरों में झमाझम बारिश से बढ़ी परेशानी, भोपाल-सागर मार्ग 7 घंटे बंद

मध्यप्रदेश में मॉनसून फिर से सक्रिय हो गया है। इस वजह से मंगलवार को प्रदेश के 22 शहरों में झमाझम बारिश हुई। सागर व दमोह में ढाई इंच से ज्यादा और गुना-जबलपुर में दो इंच तक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा मालवा- निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल, ग्वालियर-चंबल इलाकों के कई शहर भी बारिश से तर हो गए। लगातार हो रही बारिश की वजह से जबलपुर के बरगी, गुना के गोपीकृष्ण और राजगढ़ के कुंडलिया डैम के गेटों को भी खोलना पड़ा। भारी बारिश के कारण मंगलवार को भोपाल-सागर मार्ग 7 घंटे बंद रहा। राहतगढ़ टोल के आगे बाढ़ का पानी होरा परासरी पुलिया के ऊपर तक आ गया। जिससे सुबह 11 से शाम 6 बजे तक इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद रही। इस दौरान बसों को विदिशा मार्ग से निकलना पड़ा। बीना नदी में उफान की बजह से खुरई से पठारी व राहतगढ़ के रास्ते भी बंद रहे।

आगे पढ़ें- इन इलाकों में बाढ़ ने मचाई तबाही-
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मध्यप्रदेश: राजधानी भोपाल से सटे गांव में खुले में शौच को मजबूर लोग

भोपाल के पास बसे सरोतीपुरा गांव में बुनियादी सुविधाओं का आभाव है। बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए गांव तरस रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि गांववासियों के पास पीने का पानी तक नहीं है। 2017 में भोपाल को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया था। जबकि सरोतीपुरा में लोग आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं।

गांव में करीब 500 लोग रहते हैं। जो बुनियादी सुविधाओं के आभाव में अपने जीवन से लड़ रहे हैं। आलम यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गांववासियों को दो किलोमीटर पैदल चल कर जाना पड़ता है, और अगर मरीज चलने की हालत में ना हो तो उसे चारपाई पर अस्पताल ले जाने के आलावा कोई चारा नहीं बचता। क्योंकि गांव में सड़क भी नहीं है।  
 
राज्य में चल रहे "आपका प्रशासन, आपके द्वार" प्रोग्राम के तहत जिला अधिकारियों की टीम ने गुरुवार को गांव पहुंच कर लोगों की सुध ली। जिला पंचायत निरीक्षक दिलीप शिंदे का कहना है कि गांव में प्रमुख समस्या यह है कि यहां पर सड़कें नहीं है। कुछ लोग ऐसे भी है जिन्हें पेंशन मिलनी चाहिए पर नहीं मिल रही है। मैंने अपने सचिव को इस मामले में जल्द कारवाई के निर्देश दिए हैं।
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