अगर आप बाइक या स्कूटर पर बैठे-बैठे भरवाते हैं पेट्रोल, तो फेफड़े हो सकते हैं खराब, ये है वजह

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 29 Oct 2020 12:25 PM IST
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पेट्रोल पंप
पेट्रोल पंप - फोटो : PTI (File)

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सार

बेंजीन भी एक ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल में इसके एक पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) की मात्रा स्वीकृत है, लेकिन कई बार यह देखा गया है कि कंपनियां मानक से दस गुना तक ज्यादा बेंजीन पेट्रोल में मिला देती हैं, जो लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है...

विस्तार

गाड़ी में पेट्रोल भरवाने के चक्कर में हमें कई बार पेट्रोल पंपों पर काफी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ईंधन भरवाने के दौरान अनजाने में ही हम पेट्रोल में मिले रहने वाले बेंजीन नामक गैस को सांसों के जरिए अपने फेफड़ों तक पहुंचा रहे होते हैं। गाड़ी में पेट्रोल डालते समय इसके आसपास खड़े रहने से भी इसके हमारे शरीर में इसके जाने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एक सीमा से ज्यादा बेंजीन मानव शरीर में जाती है तो यह कैंसर का कारण भी बन सकती है। कम मात्रा भी यह लोगों में दिल की धड़कन बढ़ने, बेहोशी, सिरदर्द या भ्रम जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
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