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सबसे बड़े संकट में ऑटो सेक्टर, अगले तीन महीने में बेरोजगार हो सकते हैं पांच लाख लोग

ऑटो डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 17 Aug 2019 04:24 PM IST
Maruti Car Plant
Maruti Car Plant - फोटो : Team-BHP
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देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कलपुर्जे बनाने वाली 57 अरब डॉलर की ऑटो कंपोनेंट सेक्टर पर संकट के बादल छाए हुए हैं। इस सेक्टर का देश की जीडीपी में 2.3 फीसदी का योगदान है। माना जा रहा है कि अगली तिमाही में इस सेक्टर में लाखों लोगों के रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। इसकी वजह है कि पूरे ऑटो सेक्टर में छाई मंदी। बिक्री न होने से इस सेक्टर में सेल्स जॉब्स के अलावा टेक्निकल, पेंटिंग, वेल्डिंग, कास्टिंग, प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी और दूसरे कामों पर खतरा पैदा हो गया है।

एमएसएमई सेक्टर को नहीं मिल रहे ऑर्डर

सूक्ष्म, लघु और मध्यम कंपनियों पर इसकी आंच आनी शुरू हो गई है। ऑटो कंपनियों से उन्हें पार्ट्स के लिए समुचित ऑर्डर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उनकी वित्तीय हालत पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। यहां तक कि कुछ कंपनियों ने भी ऑटो कंपनियों की तरह अपने काम के घंटों में कमी कर दी है। साथ ही नई भर्तियों पर रोक लगा दी है और वहीं अब वे छंटनी की तैयारी कर रहे हैं।

यह भी पढ़ेंः ऑटो सेक्टर में अभी और जाएंगी नौकरियां! पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को नहीं मिल रहे ऑर्डर

एक साल में एक लाख नौकरियां गईं

ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एक्मा) के मुताबिक वाहन उद्योग में गिरावट आई है और कंपोनेंट सेक्टर में पिछले कुछ महीनों में एक लाख से ज्यादा लोगों की नौकरियां गई हैं और यह सिलसिला अगले 3-4 महीने तक बना रह सकता है। अंदेशा जताया जा रहा है कि इस सेक्टर में 10 लाख लोगों की नौकरियां पर खतरा पैदा हो गया है। गौरतलब है कि इस सेक्टर में 50 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिनमें से ज्यादातर ठेके पर काम करते हैं।

अगले छह से नौ महीने तक गिरावट का अंदेशा

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक रिक्रूटमेंट फर्म पीनो और टीमलीज ने अंदेशा जताया है कि अगली तिमाही में पांच लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। टीमलीज सर्विसेज की को-फाउंडर रितुपर्णा चक्रवर्ती का कहना है कि हर कंपनी में से तकरीबन 10 फीसदी लोग नौकरी से हाथ धो बैंठेंगे। वहीं ऑटो सेक्टर में गिरावट का सिलसिला अगले छह से नौ महीने तक जारी रह सकता है।

7.50 लाख लोगों के रोजगार पर संकट

एक्मा के मुताबिक जिन कंपनियों का टर्नओवर 400 करोड़ से कम है, उन पर इसका सबसे ज्याद असर होगा। यह सेक्टर हर साल 15 अरब डालर का निर्यात करता है। इस सेक्टर में अकुशल और अर्ध-कुशल कर्मचारियों के अलावा ज्यादातर लोग कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। एक्मा के मुताबिक इस सेक्टर में मंदी का दौर पिछले साल सितंबर में त्यौहारी सीजन से शुरू हुआ था, जिसके बाद से अभी तक काम के घंटों में 15 फीसदी की कटौती की गई है। अमलागैमेशंस ग्रुप के एमडी वैंकेटारमानी के मुताबिक अगली तिमाही में तकरीबन 15 फीसदी यानी कि लगभग 7.50 लाख लोगों के रोजगार पर संकट पैदा हो सकता है।

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मिंडा में अस्थाई कर्मियों पर गिर सकती है गाज

वहीं ऑटो कपोनेंट्स बनाने वाली प्रमुख कंपनी मिंडा ने नई भर्तियों पर रोक लगा दी है, इसके अलावा वह इंवेंट्री और ऑपरेशन खर्च को कम करने की कोशिश कर रही है। हालांकि मिंडा के चेयरमैन निर्मल मिंडा का कहना है कि अभी तक उन्होंने कंपनी में काम कर रहे लोगों को नहीं हटाया है, लेकिन अगर हालात और खराब हुए, तो कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे लोगों पर गाज गिर सकती है। कंपनी में वर्तमान में 20 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं, जिनमें पांच हजार कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं।

मैनपावर में कमी करने की योजना

फरीदाबाद स्थित मेटल रॉड्स, इंडस्ट्रीयल शॉफ्ट, वाल्व गाइड्स और मेटल बुश बनाने वाली न्यूटेक इंटरप्राइजेज के सीईओ आदर्श कपूर का कहना है कि छोटे निर्माता अब नौकरियों में कटौती करने की बात कर रहे हैं। वह बताते हैं कि उनकी कंपनी भी मैनपावर में कमी करने की योजना बना रही है, जिससे तकरीबन 20 से 25 फीसदी लोगों की नौकरी जा सकती है। वह कहते हैं कि जब मांग ही नहीं है, इसलिए काम भी नहीं है।

टायर सेक्टर भी बेहाल

वहीं टायर सेक्टर भी मंदी की मार से जूझ रहा है। कॉन्टिनेंटल इंडिया के एचआर हेड अजय कुमार के मुताबिक वे उत्पादन और प्रक्रिया की लागत पर नजदीकी से निगाह रख रहे हैं। वहीं कंपनी ने नई भर्तियों पर रोक तो नहीं लगाई है, लेकिन सावधानी बरती जा रही है। अपोलो टायर्स के एशिया पैसिफिक, मिडिल ईस्ट और अफ्रिका अध्यक्ष सतीश शर्मा का कहना है कि ऑटो सेक्टर की सहायक कंपनियों पर इसका असर पड़ना निश्चित है।

यह भी पढ़ेंः Maruti Suzuki पर पड़ा मंदी का असर, मंदी से निपटने के लिए उठाया बड़ा कदम

मारुति ने निकाले 3,000 कर्मचारी

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki ने बिक्री घटने के चलते अपने 3,000 अस्थायी कर्मचारियों की छंटनी कर दी है इतना ही नहीं नई भर्तियों को रोकने की योजना बनाई है। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव के मुताबिक मंदी के चलते अस्थार् कर्मियों के कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू नहीं किया जा रहा है, लेकिन स्थाई कर्मचारियों को हटाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
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