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वास्तुटिप्स: मृत्युभोज खाने से नष्ट होती है हमारी ऊर्जा, महाभारत के अनुशासन पर्व में उल्लेख

अजीत श्रीवास्तव, वास्तु एक्सपर्ट Updated Wed, 01 Aug 2018 01:45 PM IST
vastu tips destroyed our energy to eat death feast
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वास्तुशास्त्र एक विज्ञान है जो दिशा एवं आपके आस-पास मौजूद चीजों से उत्पन्न ऊर्जा के प्रभाव को बताता है। वास्तु विज्ञान के अनुसार उर्जा अगर अनुकूल है तो आपकी प्रगति होगी और प्रतिकूल ऊर्जा होने पर परेशानी आती है और यह जीवन के हर क्षेत्र पर लागू होता है । 
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महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है। सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनैः अर्थात् जब खिलाने वाले का मन प्रसन्न हो, खाने वाले का मन प्रसन्न हो, तभी भोजन करना चाहिए। लेकिन जब खिलाने वाले एवं खाने वालों के दिल में दर्द हो, वेदना हो, तो ऐसी स्थिति में कदापि भोजन नहीं करना चाहिए।

हिन्दू धर्म में मुख्य 16 संस्कार बनाए गए है, जिसमें अन्तिम यानि 16वाँ संस्कार अन्त्येष्टि का होता है। इस प्रकार सत्रहवाँ संस्कार ' मृत्युभोज ' कहाँ से । इसीलिए महर्षि दयानन्द सरस्वती, पं0 श्रीराम शर्मा, स्वामी विवेकानन्द जैसे महान मनीषियों ने मृत्युभोज का जोरदार ढंग से विरोध किया है। जानवरों से भी सीखें, जिसका साथी बिछुड़ जाने पर वह उस दिन चारा नहीं खाता है। जबकि आदमी की मृत्यु पर मृत्युभोज खाकर शोक मनाने का ढोंग रचता है। मृत्युभोज समाज में फैली कुरीति है और समाज के लिये अभिशाप है

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