जिंबाब्वे के राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे
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अपने छल-कपट और क्रूरता के दम पर लगभग चार दशक से जिंबाब्वे की सत्ता पर काबिज 93 वर्षीय राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे के पतन की कहानी तीन साल पहले शुरू हुई थी, जब उनकी पत्नी ग्रेस ने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया था। इसकी वजह से यहां के संभ्रांत वर्ग में कलह के बीज पड़े, जिसकी परिणति हमारे सामने है।
मुगाबे की उलटी गिनती 6 नवंबर को शुरू हुई जब उन्होंने उपराष्ट्रपति और जिंबाब्वे की आजादी के आंदोलन के योद्धा एमरसन मनांगाग्वा को उनके पद से हटा दिया। इसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने सेना प्रमुख जनरल कांस्टेंटीनो चिवेंगा को गिरफ्तार करने की कोशिश की, जो उस समय चीन की यात्रा पर थे।
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पद से हटाए जाने के बाद मनांगाग्वा अपने बेटे के साथ मोजाम्बिक चले गए और वहां से दक्षिण अफ्रीका पहुंच गए। उनके करीबी नेता जुलाई मोयो के अनुसार उपराष्ट्रपति को पहले से ही इसकी आशंका थी और वह इसके लिए तैयार थे।
उधर, चीन में जब सेना प्रमुख चिवेंगा को अपनी गिरफ्तारी की तैयारी की खबर मिली तो वे सतर्क हो गए। वे 12 नवंबर को स्वेदेश लौटे तो पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए तैयार थी, लेकिन जनरल ने इसकी काट पहले ही ढूंढ ली थी।
बैगेज हैंडलरों की ड्रेस में तैनात उनके सैनिकों ने पुलिसकर्मियों को काबू कर लिया। इसके कुछ दिन बाद ही राजधानी हरारे में तोपों की गड़गड़ाहट सुनी गई और फिर खबर आई कि मुगाबे नजरबंद कर लिए गए हैं।