भारत ने जम्मू-कश्मीर पर पक्ष बताने के लिए पाकिस्तान में पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया के नेतृत्व में राजनयिकों का दल यूएनएचआरसी भेजा था। दल ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से मिलकर भारत की स्थिति के बारे में बताया। यूएनएचआरसी में चर्चा के दौरान भारत की प्रथम सचिव कुमम मिनी देवी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हमारा फैसला भारत का संप्रभु और आंतरिक मामला है। इसकी गलत व्याख्या कर पाक सच नहीं छिपा सकता।
क्या कहता है नियम
यूएनएचआरसी के नियम के अनुसार, किसी भी देश के प्रस्ताव पर कार्रवाई से पहले न्यूनतम समर्थन जरूरी है। पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जेनेवा रवाना होने से पहले कश्मीर पर प्रस्ताव का वादा किया था। यूएनएचआरसी में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के 15 देश हैं और उसे उम्मीद थी कि वह इनका समर्थन जुटा लेगा।
यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के पास तीन विकल्प थे, प्रस्ताव, बहस या विशेष सत्र। प्रस्ताव इस विकल्प से बाहर हो गया। विशेष सत्र सबसे मजबूत विकल्प हो सकता है, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, सामान्य सत्र 27 सितंबर तक चलेगा। इसके बीच विशेष सत्र नहीं हो सकता। बहस के लिए कम से कम 24 देशों के समर्थन की जरूरत होती है जो असंभव है। सूत्रों ने कहा कि कश्मीर मामला आठ सप्ताह बीतने के बाद न तो तत्काल जरूरी है और न गंभीर है। भारत ने परिषद और सदस्य देशों को सूचित किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी।