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हूती विद्रोही: ईरान समर्थित हूतियों ने यमन के दो अहम द्वीपों पर किया कब्जा, लाल सागर की शिपिंग पर कितना खतरा?

Mon, 14 Sep 2026 02:04 PM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अदन

सार

यमनी सरकार और हूती अधिकारियों के मुताबिक विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर के ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इससे महत्वपूर्ण समुद्री शिपिंग रूट पर हूतियों की पकड़ मजबूत हुई है।
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लाल सागर के अहम बंदरगाह पर हूतियों का कब्जा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यमन के हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। यमनी सरकार और हूती अधिकारियों के मुताबिक, विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से अहम ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इन द्वीपों पर नियंत्रण मिलने से महत्वपूर्ण समुद्री शिपिंग रूट पर हूतियों का प्रभाव बढ़ गया है।

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सैकड़ों सरकारी समर्थक बलों के पीछे हटने के बाद कब्जा
दो यमनी सरकारी अधिकारियों और एक हूती अधिकारी के मुताबिक, विद्रोहियों ने दोनों द्वीपों पर अपने लड़ाकों को तैनात कर दिया है। ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं। अधिकारियों के अनुसार, द्वीपों पर कब्जा उस समय हुआ जब यमनी सरकार के समर्थन वाले सैकड़ों सुरक्षा बल इस द्वीप समूह से पीछे हट गए। अधिकारियों ने पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं थी।

पिछले हफ्ते मोखा और मयून पर भी कब्जा
हूतियों की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उन्होंने पिछले सप्ताह भी रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण हासिल किया था। विद्रोहियों ने सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों से मोखा बंदरगाह शहर और मयून द्वीप अपने कब्जे में ले लिया था। मयून द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के भीतर स्थित है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
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समुद्री शिपिंग रूट पर बढ़ी हूतियों की पकड़
ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश पर कब्जे के बाद दक्षिणी लाल सागर में हूतियों का रणनीतिक नियंत्रण और मजबूत हुआ है। इन इलाकों पर उनकी बढ़ती मौजूदगी से समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। मोखा, मयून और अब हनीश द्वीपों पर नियंत्रण के चलते लाल सागर के इस हिस्से में हूतियों की स्थिति पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है। क्षेत्र में आगे होने वाली गतिविधियों का असर समुद्री यातायात और सुरक्षा पर पड़ सकता है।

होर्मुज में व्यवधान के बाद मोखा क्यों और अहम हो गया है?
फरवरी में अमेरिका और इस्राइल के हमले के बाद ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान पैदा हुआ था। इसके बाद लाल सागर और बाब अल-मंदेब का महत्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए और बढ़ गया। ऐसे माहौल में मोखा पर हूतियों का कब्जा केवल यमन की जमीन पर नियंत्रण का मामला नहीं रह जाता, बल्कि इसका असर उस समुद्री क्षेत्र पर भी पड़ सकता है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। अगर यमन में फिर से बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध शुरू होता है, तो इसका असर आम यमनी लोगों के साथ-साथ दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

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