यमन के हूती विद्रोहियों ने बुधवार तड़के अदन की खाड़ी में डच ध्वज वाले जहाज पर हमले की जिम्मेदारी ले ली है। इस हमले में डच ध्वज वाला मालवाहक जहाज जलकर खाक हो गया था। यह हमला सोमवार को हुआ, जो अदन की खाड़ी में ईरान समर्थित हूतियों द्वारा महीनों में किया गया सबसे गंभीर हमला था। अदन की खाड़ी, लाल सागर से कुछ दूरी पर है। लाल सागर में हूती विद्रोही नवंबर 2023 से अब तक चार जहाज डुबोए हैं।
हूतियों ने क्रूज मिसाइल से किया जहाज पर हमला
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इस्राइल के गाजा शहर पर हमले जारी हैं और युद्धविराम की कोशिशें अभी भी अधर में लटकी हुई हैं। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र द्वारा ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम के लिए फिर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद मध्य पूर्व में भी तनाव है। हूतियों ने अमेरिकी तेल कंपनियों को भी निशाना बनाने की धमकी दी है। हूतियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने बताया कि एक क्रूज मिसाइल से मालवाहक जहाज को निशाना बनाया।
सारी ने जहाज के मालिक, एम्स्टर्डम स्थित स्प्लिएथॉफ पर फलस्तीन के बंदरगाहों में प्रतिबंध के बावजूद प्रवेश करने का आरोप लगाया। इस हमले में जहाज पर सवार दो नाविक घायल हो गए, जिसके 19 सदस्यीय चालक दल के सदस्य फिलीपींस, रूस, श्रीलंका और यूक्रेन से थे। हमले में भारी नुकसान होने के बाद उन्हें जहाज खाली करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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कंपनी ने बयान जारी कर हमले को नौवहन के अधिकार का उल्लंघन करार दिया
जहाज के स्वामित्व वाली डच कंपनी स्प्लिएथॉफ ने एक बयान में कहा, 'हम इस हफ्ते की घटना पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हैं, जो हमारे निर्दोष नाविकों पर सीधा हमला और स्वतंत्र नौवहन के अधिकार का उल्लंघन है।' नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को अलग से कहा कि वह इस हमले के लिए हूतियों पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध लगाने का प्रयास करेगा। बयान में कहा गया, 'हूतियों ने लंबे समय से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा पैदा किया है। यह अस्वीकार्य है।'
हूतियों ने गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से फलस्तीन के समर्थन में इस्राइल या उससे जुड़े 100 से ज्यादा जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि हूतियों ने कई ऐसे जहाजों को भी निशाना बनाया, जिनका इस्राइल से कोई संबंध नहीं था। नौवहन के खिलाफ हूतियों के अभियान में कम से कम आठ नाविक मारे गए हैं और चार जहाज डूब गए हैं। हूतियों के हमलों के चलते पिछले दो वर्षों में लाल सागर में नौवहन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। लाल सागर क्षेत्र से गाजा युद्ध शुरू होने से पहले हर साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का माल गुजरता था।