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यमन में हूती विद्रोहियों पर 753 हमले: सेना का दावा- 218 लड़ाके और कमांडर मारे गए, अब तक 78 सैन्य वाहन भी तबाह

Mon, 26 Oct 2026 06:29 AM IST
शिवम गर्ग एएनआई, अदन

सार

यमन की सेना ने 'डॉन ऑफ यमन' अभियान के तहत 24 घंटे में 753 हमले करने और 218 हूती लड़ाकों को निष्क्रिय करने का दावा किया है। सैन्य प्रवक्ता ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभियान की जानकारी दी।
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यमन में फिर बढ़ा तनाव (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सेना ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने का दावा किया है। यमन के सशस्त्र बलों के सैन्य प्रवक्ता माजिद अब्दुल्ला अल-नुजैली के मुताबिक, 'डॉन ऑफ यमन' अभियान के तहत पिछले 24 घंटे में 753 सटीक हमले किए गए। इन हमलों में करीब 218 हूती लड़ाकों और मैदानी कमांडरों को मार गिराने का दावा किया गया है।

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सैन्य प्रवक्ता ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सेना ने हूती विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों, आपूर्ति मार्गों और उनके कमांड नेटवर्क को निशाना बनाया। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों और दोबारा संगठित होने की क्षमता को कमजोर करना था।

कमांड सेंटर और हथियारों को बनाया निशाना
अल-नुजैली ने बताया कि हमलों में मैदानी कमांड और नियंत्रण केंद्रों, सैन्य ठिकानों, किलेबंदी, हथियारबंद समूहों और विद्रोहियों की मदद के लिए भेजे जा रहे अतिरिक्त बलों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा, उनके परिवहन और आपूर्ति के साधनों पर भी कार्रवाई की गई।
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सेना के प्रवक्ता के अनुसार, इन हमलों से हूती विद्रोहियों की आवाजाही और युद्ध के मोर्चों तक सैन्य संसाधन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हुई। इससे सरकारी बलों को अलग-अलग मोर्चों पर आगे बढ़ने और अभियान चलाने में मदद मिली।
 

78 सैन्य वाहन और हथियार नष्ट करने का दावा
यमन की सेना ने अभियान में हूती विद्रोहियों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान करीब 218 लड़ाकों और मैदानी कमांडरों को निष्क्रिय किया गया। इसके साथ ही 78 वाहनों, सैन्य मशीनों और भारी व मध्यम हथियारों को नष्ट या इस्तेमाल के लायक नहीं रहने दिया गया।

नागरिकों की सुरक्षा पर भी दिया जोर
सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि अभियान के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, सेना केवल वैध सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने और नागरिकों व उनकी संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए सावधानी बरत रही है।

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