Year Ender 2024: साल 2024 अपने अंतिम पड़ाव पर है। चंद दिनों के बाद साल 2025 की आमद हो जाएगी। वर्ष के अंतिम हफ्ते में यह मौका है बीते 12 महीने में हुई घटनाओं के पुनरावलोकन का। इस रिपोर्ट में हम बात करेंगे ऐसी हस्तियों की जो दुनिया को अलविदा कह गए।
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साल 2024 अपने अंतिम पड़ाव पर है। चंद दिनों बाद नया साल 2025 शुरू हो जाएगा। लेकिन बीते एक साल में कई दिग्गजों ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। अब इतिहास बन चुके राजनेता, अभिनेता और कारोबार जगत की हस्तियों के जाने से उनके प्रशंसकों की दुनिया सूनी हो गई। इस साल जहां मशहूर अरबपति कारोबारी रतन टाटा का निधन हुआ, तो दुनिया के सबसे बुजर्ग व्यक्ति जॉन टिनिसवुड ने भी अंतिम सांस ली। वहीं, यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी युद्धों से पूरी दुनिया पर असर देखने को मिला। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी एलेक्सी नवलनी की मौत हुई, तो इस्राइल के साथ युद्ध में चरमपंथी समूहों हमास और हिजबुल्ला के कई शीर्ष कमांडरों को मौत के घाट उतारा गया। सालभर ये मशहूर चेहरे चर्चा का केंद्र बने रहे, आइए विस्तार से जानते हैं-
क्रिश्चियन ओलिवर
क्रिश्चियन ओलिवर का जन्म 3 मार्च 1972 को जर्मनी के सेल में हुआ था और वह फ्रैंकफर्ट में पले-बढ़े थे। बाद में वह अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने मॉडलिंग की और फिर न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स में अभिनय की शिक्षा ली। 2022 से 2004 तक ओलिवर ने जर्मन एक्शन टीवी सीरीज 'अलार्म फ्यूर कोबरा 11' के 28 एपिसोड में सह-अभिनय किया। उन्हें खासतौर पर टीवी सीरीज कोबरा 11 में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता था। 4 जनवरी 2024 को ओलिवर अपनी दो बेटियों मैडिता और अन्निक और अमेरिकी पायलट रॉबर्ट सैक्स के साथ एक चार सीटों वाले बेलांका विकिंग विमान से सफर कर रहे थे, लेकिन यह विमान कैरेबियाई द्वीप बेक्विया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में सभी लोगों की मौत हुई। इस दुर्घटना की जांच रॉयल सेंट विसेंट और ग्रेनेडाइंस पुलिस कर रही है।
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सरताज अजीज
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
सरताज अजीज
सरताज अजीज का जन्म पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के मरदान में 7 फरवरी 2019 को हुआ था। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की थी। जिसके बाद उन्होंने हार्वर्ड केनेडी स्कूल में लोक प्रशासन की पढ़ाई की। अजीज ने 1951 से 1971 तक पाकिस्तान सरकार में एक लोक सेवक के रूप में का किया था। वह 1967 से 1971 के बीच पाकिस्तान के योजना आयोग में संयुक्त सचिव रहे। उनके सियासी सफर की शुरुआत साल 1988 में हुई थी, जब वह सीनेट के लिए चुने गए। 1993 में वह नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन से दोबारा चुने गए। सरताज अजीज 1990 से जून 1993 तक पाकिस्तान के वित्ती मंत्री रहे। उन्होंने आर्थिक कारणों का हवाला देते हुए भारत के जवाब में परमाणु परीक्षण करने के फैसले का विरोध किया था। वह 1998 से 1999 तक पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी रहे। इसके बाद 2004 में वह बीकनहाउस राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति बने। 2 जनवरी 2024 को राजधानी इस्लामाबाद में उनका निधन हुआ।
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सेबेस्टियन पिनेरा
- फोटो : एक्स/सेबेस्टियन पिनेरा
सेबेस्टियन पिनेरा
सेबेस्टियन पिनेरा का जन्म 1 दिसंबर 1949 को चिली के सबसे बड़े शहर सेनटियागो में हुआ था। वह चिली के एक बड़े कारोबारी और राजनेता थे। पिनेरा 2010 से 2014 और फिर 2018 से 2022 तक चिली के राष्ट्रपति रहे। उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि थी और उनके पिता भी एक जाने-माने नेता थे। पिनेरा ने चिली के पोंटिफिकल कैथोलिक यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी। बाद में उन्होंने अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। उनके पास करीब 2.7 अरब डॉलर की संपत्ति थी, जिससे वह चिली के तीसरे सबसे अमीर आदमी थे। पिनेरा ने 1990 से 1998 तक चिली की संसद में काम किया। उन्होंने 2005 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा,लेकिन हार गए। फिर 2010 में वह राष्ट्रपति चुने गए। वह चिली के पहले कंजर्वेटिव राष्ट्रपति बने। उनकी सरकार ने 2010 में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण, 33 खनन कर्मियों को बचाने और 2021 में समलैंगिक विवाह को कानूनी बनाने जैसे बडे काम किए। उनकी सरकार के दौरान बड़े विरोध प्रदर्शन (साल 2011 और 2019-2020) हुए थे। 2022 में उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया। 6 फरवरी 2024 को एक हेलीकॉप्टर हादसे में 74 की उम्र में उनका निधन हुआ।
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एलेक्सी नवेलनी
- फोटो : एएनआई/रॉयटर्स
एलेक्सी नवलनी
एलेक्सी नवलनी का जन्म 4 जून 1976 को मॉस्को के पश्चिम में बसे गांव बुटिन में हुआ। वह ऑब्निन्सिक शहर में पले-बढ़े। उन्होंने 1998 में फ्रेंडशिप ऑफ द पीपल्स यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। 2010 में येल वर्ल्ड फेलो के तौर पर अमेरिका में एक साल बिताया। नवलनी रूस के प्रमुख विपक्षी नेता और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता थे। वह रूस सरकार और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए मशहूर थे। नवेलन ने 2000 के दशक के अंत में अपना सियासी करियर शुरू किया। तब उन्होंने रूस सरकार की नीतियों और अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पड़ताल की। उन्होंने एक वेबसाइट बनाई थी, जो सरकार के विभिन्न भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करती थी।
नवलनी का मकसद रूस में एक लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित करना था, जहां चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों। उनकी गतिविधियों ने बार-बार निशाने पर लिया। उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। वेबसाइट को बंद कर दिया गया और लंबे समय तक जेल में रखा गया। 2020 में नवलनी को जहर देकर मारने का प्रयास किया गया। जिसे पश्चिम देशों ने रूस सरकार की नवेलनी के खिलाफ साजिश माना। 16 फरवरी 2024 को यमालो-नेनेत्स जिल की पीनल कॉलोनी में उनका निधन हुआ। उनकी मौत की खबर दुनियाभर में चर्चा का विषय रही।
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इब्राहिम रईसी
- फोटो : एएनआई
इब्राहिम रईसी
इब्राहिम रईसी का जन्म 14 दिसंबर 1960 को उत्तरी पूर्वी ईरान के मशहद शहर में हुआ था। रईसी के पिता एक मौलवी थे। जब वह सिर्फ पांच साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। रईसी का शुरुआत से ही धर्म और राजनीति की ओर झुकाव रहा और वो छात्र जीवन में ही मोहम्मद रेजा शाह के खिलाफ सड़कों पर उतर गए। रेजा शाह को पश्चिमी देशों को समर्थक माना जाता था। पूर्वी ईरान के मशहद शहर में शिया मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र मानी जाने वाली मस्जिद भी है। वे कम उम्र में ही ऊंचे ओहदे पर पहुंच गए थे। अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए उन्होंने 15 साल की उम्र से ही कोम शहर में स्थित एक शिया संस्थान में पढ़ाई शुरू कर दी थी। अपने छात्र जीवन में उन्होंने पश्चिमी देशों से समर्थित मोहम्मद रेजा शाह के खिलाफ प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। बाद में अयातोल्ला रुहोल्ला खुमैनी ने इस्लामिक क्रांति के जारिए साल 1979 में शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया था।
रईसी को सिर्फ 20 साल की उम्र में ही उन्हें तेहरान के करीब स्थित कराज का महाअभियोजक नियुक्त कर दिया गया था। साल 1989 से 1994 के बीच रईसी, तेहरान के महाअभियोजक रहे और इसके बाद 2004 से अगले एक दशक तक न्यायिक प्राधिकरण के डिप्टी चीफ रहे। साल 2014 में वो ईरान के महाभियोजक बन गए थे। ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख रहे रईसी के राजनीतिक विचार 'अति कट्टरपंथी' माने जाते हैं। उन्हें ईरान के कट्टरपंथी नेता और देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्ला अली खुमैनी का करीबी माना जाता है। वे जून 2021 में उदारवादी हसन रूहानी की जगह इस्लामिक रिपब्लिक ईरान के राष्ट्रपति चुने गए थे। रईसी की 19 मई 2024 को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हुई। इस हादसे में उनके साथ ईरान के विदेश मंत्री और अन्य लोगों की भी मौत हुई थी।
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साउलोस चिलिमा
- फोटो : एक्स/साउलोस चिलिमा
साउलोस चिलिमा
साउलोस क्लॉस चिलिमा का जन्म 12 फरवरी 1973 को मलावी के मध्य क्षेत्र के शहर नत्चेउ में हुआ था। वह एक अर्थशास्त्री और राजनेता थे। वह 2014 से 2019 और फिर 2020 से 2024 तक मलावी के उप राष्ट्रपति रहे। उन्होंने आर्थिक योजना और विकास मंत्री के रूप में भी काम किया था और वह सार्वजनिक क्षेत्र में सुधार करने वाले एक प्रमुख चेहरा थे। राजनीति में आने से पहले चिलिमा ने यूनिलीवर, कोका-कोला और एयरटेल मलावी जैसी कई बड़ीं कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह एयरटेल मलावी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भी बने। 10 जून 2024 को एक विमान हादसा हुआ। विमान मिजिंबा जिले के चिकांगावा वन्यजीव अभयारण्य में गिरा। इस हादसे में चिलिमा और आठ अन्य यात्रियों की मौत हो गई।
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अल्बर्टो फुजिमोरी
- फोटो : एक्स/अल्बर्टो फुजिमोरी
अल्बर्टो फुजिमोरी
अल्बर्टो फुजिमोरी का जन्म 26 जुलाई 1938 को पेरू के लिमा शहर में हुआ था। वह जापानी मूल के थे और पेरू के पहले कृषि वैज्ञानिक रहे। उन्होंने पेरू की खराब अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कई आर्थिक सुधार गए। वह 1990 से 2000 तक पेरू के राष्ट्रपति रहे। लेकिन उनकी सरकार में तनाशाही देखी गई। 1992 में उन्होंने सेना की मदद से संसद को भंग किया और खुद को विशेष अधिकार दिए। उनकी सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन और विरोधियों का हिंसक दमन करने के आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद 2000 में फुजिमोरी जापान भाग गए। 2005 में उन्हें चिली में गिरफ्तार किया गया और पेरू लाया गया, जहां उन्हें आरोपों में सजा हुई। 2023 में उन्हें रिहा किया गया। लेकिन 11 सितंबर को लिमा में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया।
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रतन टाटा
- फोटो : इंस्टाग्राम/रतन टाटा
रतन टाटा
रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को बॉम्बे शहर (अब मुंबई) में हुआ था। उनका संबंध सूरत से भी था, जहां उनके पिता नवल टाटा का वर्ष 1904 में जन्म हुआ था। जमशेदजी टाटा के बेटे सर रतनजी टाटा की पत्नी नवजबाई टाटा ने अपने पति की मृत्यु के बाद नवल टाटा के बेटे नवल टाटा को गोद लिया था। रतन टाटा की शुरुआती शिक्षा मुंबई के कैंपियन स्कूल से हुई और कैथेड्रल में ही अपनी माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जॉन केनौन कॉलेज से वास्तुकला में अपनी बीएससी की। फिर कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से 1962 में संचारात्मक इंजीनियरिंग और 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम किया। टाटा समूह का चेयरमैन रहते हुए उन्होंने पूरी दुनिया में कई कंपनियों का अधिग्रहण करते हुए भारत का डंका बजाया।
रतन टाटा साल 1991 से लेकर 2012 तक टाटा ग्रुप के अध्यक्ष रहे। 28 दिसंबर 2012 को उन्होंने टाटा ग्रुप के अध्यक्ष पद को छोड़ दिया मगर वे टाटा समूह के चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बने रहे। अपने कार्यकाल में वे टाटा ग्रुप के सभी प्रमुख कम्पनियों जैसे टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा टी, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज के भी अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने नई ऊंचाइयों का हासिल किया। टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा को साल 2008 में पद्म विभूषण और साल 2000 में पद्म भूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। रतन टाटा को उनकी अध्यक्षता में टाटा समूह को आसमान की बुलंदियों तक पहुंचाने में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, उनके नेतृत्व में टाटा समूह के राजस्व में 40 गुना से अधिक और लाभ में 50 गुना से अधिक की वृद्धि हुई।
दरियादिली के मामले में भी पूरी उम्र रतन टाटा का कोई सानी नहीं रहा। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने पीएम केयर्स फंड में 500 करोड़ की बड़ी राशि दान की थी। इसके अलावा भी वे कई तरह के सामजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी करते रहे। रतन टाटा और उनका कारोबारी समूह हमेशा से ही सामाजिक और धार्मिक कार्यों में आगे रहा। रतन टाटा को हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हुए देखा जाता रहा। नौ अक्तूबर 2024 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में रतन टाटा का निधन हुआ।
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जॉन प्रेसकॉट
- फोटो : एक्स/जॉन प्रेसकॉट
जॉन प्रेसकॉट
जॉन प्रेसकॉट का जन्म 31 मई 1938 को वेल्स के प्रेस्टेटिन शहर में हुआ था। उनकी पढ़ाई रस्किन कॉलेज और हल विश्वविद्यालय से हुई थी। वह लेबर पार्टी के सदस्य थे और 1970 से 2010 तक किंग्सटन अपॉन हल ईस्ट से चालीस वर्षों तक संसद के सदस्य रहे। 1994 में उन्होंने लेबर पार्टी के नेतृत्व में उप-नेता का चुनाव लड़ा और जीत गए। वह 1997 से 2007 तक ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री रहे और 2001 से 2007 तक पहले राज्य सचिव भी रहे। उन्हें आमतौर पर श्रमिक वर्ग का प्रतिनिधि माना जाता था, जबकि उनकी पार्टी के अन्य नेता जैसे टोनी ब्लेयर और पीटर मंडेलसन मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से थे। प्रेसकॉट को ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन के बीच संबंधों को सुधाने वाला नेता माना जाता था। 2010 में संसद से सेवानिवृत्त होने के बाद प्रेसनॉट को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सदस्य बनाया गया। जून 2019 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, तब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 20 नवंबर 2024 को 86 की उम्र में उनका निधन हुआ।
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जॉन टिनिसवुड
- फोटो : एक्स/गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स
जॉन टिनिसवुड
जॉन टिनिसवुड का जन्म 26 अगस्त 1912 को ब्रिटेन के लिवरपूल में हुआ था। वह दुनिया के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति थे। इस साल जब वेनेजुएला के 114 वर्षीय जुआन विसेंट पेरेज का निधन हुआ, तब टिनिसवुड को दुनिया का सबसे बुजुर्ग व्यक्ति घोषित किया गया था। जॉन जीवनभर लिवरपूल फुटबॉल क्लब (एफसी) के समर्थक रहे। अपने लंबे जीवन को लेकर जॉन का कहना था कि लंबा जीवन केवल उनकी किस्मत है। उन्होंने कभी किसी विशेष आहार का पालन नहीं किया और हफ्ते में एक बार मछली और चिप्स खाना पसंद करते थे। जॉन ने दोनों विश्व युद्धों का अनुभव किया था। द्वितीय विश्व युद्ध में उन्होंने एक प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका निभाई थी। उन्होंने शेल और बीपी जैसी कंपनियों के अकाउंटेंट के रूप में काम किया था और 1972 सेवानिवृत्त हो गए थे। 25 नवंबर को साउथ पोर्ट स्थित एक देखभाल केंद्र में जॉन ने 112 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। जॉन के निधन पर उनके परिवार ने एक बयान में बताया था कि टिनिसवुड आखिरी दिन संगीत में डूबे हुए थे। अब उनके परिवार में एक बेटी, चार पोते और तीन परपोते हैं। जॉन ने अपनी जीवनशैली में संयम को बनाए रखा और इसे लंबे जीवन का राज बताया। दुनिया के सबसे उम्रदराज व्यक्ति जापान के जीरोमोन किमुरा रहे, जिनका 116 वर्ष 54 दिन की आयु में 2013 में निधन हुआ था।
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जाकिर हुसैन
- फोटो : एएनआई
उस्ताद जाकिर हुसैन
उस्ताद जाकिर हुसैन एक भारतीय तबला वादक, संगीतकार और अभिनेता थे। उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक स्तर पर पेश करने के लिए जाना जाता है। हुसैन का जन्म 9 मार्च 1951 को मुंबई में हुआ था। वह मशहूर तबला वादक अल्लाह रक्खा के बड़े बेटे थे। उनकी पढ़ाई मुंबई के सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई थी और सेंट जेवियर कॉलेज से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई की थी। हुसैन को अमेरिका के नेशनल एंडोमेंट फॉर द आर्ट्स की ओर से नेशनल हेरिटेज फेलोशिप से सम्मानित किया गया था, जो पारंपरिक कलाकारों और संगीतकारों को दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। उन्हें 1990 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2018 में संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप जैसे कई पुरस्कारों से नवाजा गया था। जाकिर हुसैन को सात बार ग्रैमी पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया, जिनमें से उन्हें चार ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 15 दिसंबर 2024 को कैलिफोर्निया के सेन फ्रांसिस्को में इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (फेफड़ों की एक बीमारी) के कारण 73 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ।
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इस्माइल हानिया
- फोटो : एएनआई (फाइल)
इस्माइल हानिया
इस्माइल हानिया का जन्म 29 जनवरी 1962 को गाजा पट्टी के अल-शाती शरणार्थी शिविर में हुआ था। हानिया के माता-पिता 1948 में फलस्तीनी युद्ध के दौरा अल-जूरा से विस्थापित हुए थे। उसने गाजा के इस्लामी विश्वविद्यालय से अरबी साहित्य की पढ़ाई की थी। यहीं से वह हमास से जुड़ा। अपनी राजनीतिक गतिविधियों के उसे कई बार जेल भी जाना पड़ा। 1992 में उसे लेबनान से निर्वासित किया गया। लेकिन एक साल बाद वह वापस लौट आया और गाजा में इस्लामी विश्वविद्यालय का डीन बना। हानिया ने 2006 के फलस्तीनी चुनाव में हमास की अगुवाई की, जिसके बाद वह जून 2014 तक फलस्तीनी प्राधिकरण का प्रधानमंत्री रहा। हालंकि, फतह और हमास के बीच संघर्ष के कारण राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने 2007 में उसे प्रधानमंत्री के पद से हटाया। लेकिन हानिया ने इसे मानने से इनकार किया और गाजा में प्रधानमंत्री के तौर पर काम करता रहा। 2017 में उसे हमास की राजनीतिक शाखा का प्रमुख बनाया गया। उसके नेतृत्व में अक्तूबर 2023 में हमास ने इस्राइल पर हमला किया। इसके इस्राइल युद्ध का एलान किया, जो अभी तक जारी है। युद्ध के बीच हानिया ईरान के नव निर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियां के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने तेहरान पहुंचा। तेहरान में ही हानिया की 31 जुलाई 2024 को हत्या कर दी गई। ईरान ने हानिया की हत्या का आरोप इस्राइल पर लगाया। लेकिन इस्राइल ने सार्वजनिक तौर पर कभी भी इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली।
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हसन नसरल्ला
- फोटो : अमर उजाला
हसन नसरल्लाह
हसन नसरल्लाह का जन्म 31 अगस्त 1960 को बेरूत के पास एक शिया परिवार में हुआ था। नसरल्लाह ने अपनी पढ़ाई बेलबेक से की औऱ बाद में शिया मदरसे से जुड़ा। वह एक लेबनानी नेता और शिया धर्मगुरु था। वह 1992 से 2024 तक हिजबुल्ला का महासचिव रहा। हिजबुल्ला एक शिया इस्लाी राजनीतिक और सशस्त्र समूह है।1982 में इस्राइल के लेबनान पर हमले के बाद बने हिजबुल्ला में नसरल्लाह शामिल हुआ और 1992 में इसका प्रमुख बना। नसरल्लाह के नेतृत्व में हिजबुल्ला ने लंबी दूरी के रॉके हासिल किए, जिससे वह उत्तरी इस्राइल को निशाना बना सके। 200 में इस्राइल की सेनाओं को हिजबुल्ला ने दक्षिण लेबनान से पीछे हटने को मजबूर किया, जिससे नसरल्लाह की लोकप्रियता बढ़ी। नसरल्लाह ने 2006 में लेबनान युद्ध और सीरिया के गृहयुद्ध में सक्रिया भूमिका निभाई। 2023 में हमास के इस्राइ पर हमले के बाद हिजबुल्ला ने भी संघर्ष में हिस्सा लिया। 27 सितंबर 2024 इस्राइली बलों ने हवाई हमले में नसरल्लाह को हिजबुल्ला के मुख्यालय पर मार गिराया।
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याह्या सिनवार
- फोटो : AMAR UJALA
याह्या सिनवार
याह्या सिनवार का जन्म 29 अक्तूबर 1962 को गाजा पट्टी के खान यूनिस में हुआ था। वह गाजा पट्टी में हमास का शीर्ष नेता था। याह्या सिनवार को गाजा का सबसे ताकतवर नेता माना जाता था। वह इस्राइल की कैद में भी रहा था और करीब 24 साल जेल में बिता चुका था। इस्राइली सैनिक गिलाद शालित के बदले में इस्राइल की जेल से 1027 फलस्तीनी कैदी रिहा किए गए थे, उन्हीं कैदियों में याह्या सिनवार भी शामिल था। सिनवार ईरान का करीबी था और हमास के कट्टरपंथी समूह का नेतृत्व करता था। याह्या सिनवार इस्राइल की उस सूची में शीर्ष पर था, जिनका इस्राइल खात्मा करना चाहता था। इस्राइल में 7 अक्तूबर को हुए हमास के हमले का मास्टरमाइंड भी याह्या सिनवार को माना जाता था। इस हमले में इस्राइल के 12 सौ लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोगों को बंधक बनाया गया था। हमास के जिस समूह ने इस्राइल पर हमला किया था, उसका नेतृत्व याह्या सिनवार ने ही किया था। जुलाई के आखिर में हमास की राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हानिया की ईरान की राजधानी तेहरान में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद हमास ने याह्या सिनवार को अपना प्रमुख नेता चुना था। 16 अक्तूबर 2024 को इस्राइली सेना ने गाजा पट्टी के दक्षिण शहर रफा में सिनवार को मुठभेड़ में मार गिराया।
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पंकज उधास
- फोटो : एएनआई/एक्स
पंकज उधास
पंकज उधास एक मशहूर भारतीय गजल और प्लेबैक गायक थे। उनका जन्म सौराष्ट्र के जेतपुर गांव (वर्तमान गुजरात) में 17 मई 1951 को हुआ था। उन्होंने 1980 में अपनी पहली गजल 'आहट' से करियर की शुरुआत की और मुखरार (1981), तरन्नुम (1982), महफिल (1983), रॉयल अल्बर्ट हॉल लाइव (1984), नायाब (1985) और आफरीं (1986) जैसे हिट अल्बम दिए। उनकी गजल गायिकी की सफलता के बाद महेश भट्ट की फिल्म 'नाम' उनका गाना 'चिट्ठी आई' बेहद लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में प्लेबैक गायिकी की। उधास को दुनिया भर में लाइव कॉन्सर्ट और गजल अल्बमों के लिए ख्याति मिली। 2006 में उन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री सम्मान से नवाजा। 26 फरवरी 2024 को मुंबई के कैंडी ब्रीच अस्पताल में 72 की उम्र में उनका निधन हुआ।
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मनमोहन सिंह
- फोटो : Amar Ujala
डॉ. मनमोहन सिंह
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गाह गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाह से पूरी की और बाद में पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। वह 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। मनमोहन सिंह को भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधारक के रूप में जाना जाता था, खासतौर से 1991 में उनके वित्त मंत्री रहते हुए किए गए आर्थिक सुधारों के लिए।
मनमोहन सिंह का राजनीतिक करियर कई महत्वपूर्ण ऊंचाइयों तक पहुंचा। उन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी सादगी, ईमानदारी और कूटनीतिक कौशल से एक विशेष पहचान बनाई। वे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के प्रमुख सदस्य रहे और उनके नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण आंतरिक और वैश्विक चुनौतियों का सामना किया। 26 दिसंबर 2024 को उनका निधन हुआ।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर का निधन।
- फोटो : x/@CarterCenter
जिमी कार्टर
जिमी कार्टर अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति थे। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1924 को जॉर्जिया राज्य के प्लेन्स शहर में हुआ था। उनका पूरा नाम जेम्स एंथनी कार्टर जूनियर था। वे एक किसान परिवार से थे और शुरू से ही समाज सेवा में रुचि रखते थे। कार्टर ने अमेरिकी नौसेना में सेवा दी और बाद में राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 1971 से 1975 तक जॉर्जिया के गवर्नर के रूप में काम किया और 1977 से 1981 तक राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने मानवाधिकारों, शांति और लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए।
राष्ट्रपति के रूप में जिमी कार्टर का कार्यकाल मिश्रित रहा, जिसमें उन्होंने 1978 में इस्राइल और मिस्र के बीच शांति समझौते (कैम्प डेविड समझौता) को मध्यस्थता प्रदान की, जो आज भी एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है। हालांकि, उनके कार्यकाल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी और ईरान में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों की जबरन हिरासत ने उनकी लोकप्रियता को प्रभावित किया। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद जिमी कार्टर ने समाज सेवा में अपनी पूरी ऊर्जा लगाई। वे कार्टर सेंटर के माध्यम से मानवाधिकारों, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए काम करते रहे। 2022 में वह दुनिया के सबसे उम्रदराज जीवित राष्ट्रपति बने थे। 29 दिसंबर 2024 को 100 साल की उम्र में उनका निधन हुआ।