पांच साल बाद दुनिया के सामने आई आंग सान सू ची
म्यांमार की अपदस्थ नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) के प्रतिनिधि अर्नो डी बैक से मुलाकात की। 2021 में सेना द्वारा सत्ता पर कब्जा किए जाने के बाद से सू ची पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के प्रतिनिधि से मिली हैं। सैन्य समर्थित सरकार ने इस मुलाकात की दो तस्वीरें जारी कीं, जिनमें सू ची प्रतिनिधि से हाथ मिलाती और बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। हालांकि बैठक कहां हुई और किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी जानकारी नहीं दी गई। आईसीआरसी ने भी पुष्टि की कि उसके प्रतिनिधि ने निर्धारित मानकों के तहत हिरासत में बंद सू ची से निजी तौर पर मुलाकात की। संगठन ने कहा कि वह म्यांमार की जेलों तक अपनी पहुंच बनाए रखने और बढ़ाने के लिए संबंधित पक्षों के साथ संवाद जारी रखे हुए है। सरकार द्वारा जारी अन्य तस्वीरों में सू ची गुलाबी रंग का जन्मदिन का केक काटती नजर आ रही हैं, जिससे माना जा रहा है कि ये तस्वीरें जून में उनके 81वें जन्मदिन के अवसर की हैं। तस्वीरों में वह मुस्कुराती और स्वस्थ दिख रही हैं, हालांकि उनकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सू ची के बेटे किम एरिस ने इस मुलाकात का स्वागत करते हुए इसे पांच वर्षों में पहला सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यह शुरुआत है, लेकिन उनकी मां की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि और नियमित पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सत्यांजल पांडे बने पाकिस्तान में भारत के चार्ज डी अफेयर्स का कार्यभार
भारत के वरिष्ठ राजनयिक और 2008 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी डॉ. सत्यांजल पांडे ने 1 अगस्त 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में भारत के प्रभारी (चार्ज डी'अफेयर्स) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने अगस्त 2023 से इस पद पर कार्यरत गीतिका श्रीवास्तव का स्थान लिया है। इससे पहले डॉ. पांडे श्रीलंका में भारत के उप उच्चायुक्त के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। कार्यभार संभालने की जानकारी भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की, जबकि डॉ. पांडे ने भी भारतीय उच्चायोग की टीम का हिस्सा बनने पर खुशी और सम्मान व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2019 में भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सीमित कर दिया था, जिसके बाद से नई दिल्ली और इस्लामाबाद में दोनों देशों के उच्चायोगों का नेतृत्व पूर्णकालिक उच्चायुक्तों के बजाय चार्ज डी'अफेयर्स के स्तर पर किया जा रहा है।