संसदीय चुनावों के लगभग 10 सप्ताह बाद गठबंधन समझौते पर पहुंचने के साथ ही मेटे फ्रेडरिकसन ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री के रूप में अपना तीसरा कार्यकाल सुरक्षित कर लिया है। सोशल डेमोक्रेट फ्रेडरिकसन चार दलों से मिलकर बनने वाली एक नई मध्य-वामपंथी सरकार का नेतृत्व करेंगी।
सोमवार देर रात, फ्रेडरिकसन ने राजा फ्रेडरिक एक्स को अपने सोशल डेमोक्रेट्स, सोशलिस्ट पीपुल्स पार्टी, दक्षिणपंथी लिबरल वेंत्रे पार्टी और मध्यमार्गी मॉडरेट्स को मिलाकर एक गठबंधन बनाने के अपने इरादे के बारे में सूचित किया। डेनिश रॉयल हाउस के एक बयान में कहा गया, "महामहिम राजा ने तत्पश्चात कार्यवाहक प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन को ऐसी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है।" फ्रेडरिकसन मंगलवार को नई सरकार की प्राथमिकताओं को प्रस्तुत करने की योजना बना रही हैं। नए मंत्रियों को बुधवार को राजा के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है।
ब्रिटिस संसद में उठा कृपाण का मुद्दा, सिख सांसदों ने किया बचाव
ब्रिटेन की संसद में मंगलवार को सिखों के धार्मिक प्रतीक कृपाण को लेकर चर्चा हुई। यह बहस एक ब्रिटिश सिख युवक को हत्या का दोषी ठहराए जाने के बाद हुई, जिसने अदालत में हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार को धार्मिक प्रतीक बताया था।
18 वर्षीय हेनरी नोवाक की हत्या का दोषी पाए जाने के बाद विक्रम डिगवा (23 वर्षीय) को सोमवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। पिछले साल दिसंबर में इंग्लैंड के साउथेम्पटन में हुई इस घटना ने बहस खड़ी कर दी थी।
ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने संसद में कहा कि एक व्यक्ति के जघन्य अपराध के लिए पूरे सिख समुदाय को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने सिखों के कृपाण रखने के अधिकार पर रोक लगाने की मांग की है।
महमूद ने कहा कि कृपाण सिख धर्म के पांच पवित्र प्रतीकों में से एक है और ब्रिटेन का कानून धार्मिक कारणों से इसे रखने की अनुमति देता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था के तहत कृपाण रखना एक बात है, लेकिन उसका इस्तेमाल हिंसा या अपराध के लिए करना पूरी तरह अलग और गंभीर अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस हत्या की घटना को समुदायों के बीच नफरत फैलाने का कारण नहीं बनने दिया जाना चाहिए। ब्रिटेन सामूहिक दंड में विश्वास नहीं करता और किसी अपराध के लिए पूरे धर्म या समुदाय को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। बहस के दौरान ब्रिटिश सिख सांसदों ने भी कृपाण और सिख समुदाय का बचाव किया। लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह ने कुछ राजनीतिक दलों और दक्षिणपंथी समूहों पर आरोप लगाया कि वे एक हत्यारे की हरकत के आधार पर पूरे सिख समुदाय को निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस हमले में कृपाण का इस्तेमाल नहीं हुआ था। फिर भी सिख समुदाय के खिलाफ माहौल बनाने और कृपाण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। उन्होंने सरकार से सिखों को अपने धर्म का स्वतंत्र और शांतिपूर्ण तरीके से पालन करने के अधिकार का भरोसा दिलाने की मांग की। एक अन्य सिख सांसद गुरिंदर सिंह जोसन ने हत्या की घटना पर दुख जताते हुए कहा कि इस तरह की हरकतों का कोई धार्मिक औचित्य नहीं है और पूरा सिख समुदाय इसकी निंदा करता है।
हंतावायरस के संपर्क में आए पांच अमेरिकी यात्री पहुंचे घर
अमेरिका के राष्ट्रीय क्वारंटाइन सुविधा में हंतावायरस के संपर्क में आने के बाद से रह रहे 18 अमेरिकी क्रूज जहाज यात्रियों में से पांच अपने घर लौट गए हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि ये पांचों व्यक्ति अब घर पर ही अपनी निगरानी पूरी करेंगे। वे अब तक हंतावायरस के लक्षणों से मुक्त रहे हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर की क्वारंटाइन इकाई के बाहर निगरानी के मानदंडों को पूरा करते हैं।
यह सभी यात्री लगभग तीन सप्ताह पहले नेब्रास्का पहुंचे थे। यह घटना दक्षिण अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे एक क्रूज जहाज पर हंतावायरस के घातक प्रकोप के बाद हुई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जहाज से जुड़े कुल 13 पुष्ट या संभावित हंतावायरस मामले सामने आए हैं, जिनमें तीन मौतें भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका में एंडीज वायरस का कोई मामला अभी तक पुष्ट नहीं हुआ है, और आम जनता के लिए जोखिम कम बना हुआ है। नेब्रास्का मेडिसिन के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि अमेरिका से यात्रा करने वाले किसी भी यात्री में हंतावायरस के लक्षण नहीं दिखे हैं। पिछली महामारियों में हंतावायरस के लक्षण दिखने में 42 दिनों तक का समय लगा है, लेकिन कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश लोग 21 दिनों के भीतर लक्षण विकसित कर लेते हैं।
यूक्रेन पर रूस का भीषण हमला, तीन लोगों की मौत
रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को एक बार फिर से निशाना बनाया है। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि कीव पर हुए सामूहिक हमले में कम से कम 3 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन के बीच छिड़े हालिया संघर्ष को चार साल हो चुके हैं। इन चार वर्षों में भीषण तबाही और जान-माल के नुकसान के बावजूद दोनों देशों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।
भारत ने अफ्रीका को भेजी मदद की दूसरी खेप
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को एक्स पर पोस्ट में बताया कि भारत ने अफ्रीकी देशों को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेज दी है। इसमें सुरक्षात्मक उपकरण, निदान एवं निगरानी उपकरण, दवाएं और पूरक आहार शामिल हैं। हमें विश्वास है कि 43 टन की यह खेप जन स्वास्थ्य तैयारियों को और मजबूत करेगी तथा इबोला से निपटने की क्षमताओं को बढ़ावा देगी।