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विदेश के समाचार: ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव, पेजेश्कियान को अभी भी अमेरिका से उम्मीद

Sat, 26 Sep 2026 03:16 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
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दुनिया की बड़ी खबरें - फोटो : amar ujala graphics
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत के साथ 2025 के संघर्ष में "समय पर हस्तक्षेप" का श्रेय दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। पिछले साल 22 अप्रैल के पहलगाम हमले (26 नागरिक मारे गए) के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। ट्रंप ने युद्ध रोकने का दावा किया, पर भारत ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इन्कार किया है। शरीफ ने ट्रंप के "दृढ़ और दूरदर्शी नेतृत्व" की सराहना की, कहा कि उनके हस्तक्षेप से लाखों जानें बचीं। उन्होंने कश्मीर मुद्दे के "उचित और निष्पक्ष समाधान" की मांग की। भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को खारिज किया है, यह कहते हुए कि जम्मू और कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। शरीफ ने सिंधु जल संधि (IWT) पर भी बात की, जिसे भारत ने आतंकवाद का समर्थन बंद होने तक निलंबित रखा है। उन्होंने पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने के पाकिस्तान के प्रयासों का भी उल्लेख किया। शरीफ ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को उनके "अथक प्रयासों" के लिए धन्यवाद दिया।

ट्रंप के संघर्ष विराम प्रस्ताव ठुकराने पर क्या बोले ईरानी राष्ट्रपति?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने और संबोधित करने के बाद न्यूयॉर्क से तेहरान रवाना हो गए। अपनी यात्रा के दौरान पेजेश्कियान ने स्विट्जरलैंड, इराक, बांग्लादेश, नॉर्वे, आर्मेनिया, नीदरलैंड, लेबनान और पाकिस्तान के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। उन्होंने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र महासचिव से भी मुलाकात की।

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इससे पहले सीबीएस न्यूज से बातचीत में पेजेश्कियान ने कहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच अविश्वास का माहौल है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दोनों पक्ष किस मुद्दे पर समझौता करना चाहते हैं। पेजेश्कियान ने कहा, "अगर यह संदेश अमेरिका के राष्ट्रपति या बातचीत में शामिल लोगों तक पहुंचता है, तो स्वाभाविक रूप से जिस दिन वे इसे स्वीकार करेंगे, उसी दिन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।"

पेजेश्कियान ने जून में अमेरिका के साथ हुए उस समझौते के टूटने के लिए भी अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया, जिसे संघर्ष विराम से जुड़ा समझौता ज्ञापन कहा गया था। यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से प्रस्तावित सात दिन के संघर्ष विराम को ठुकरा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर फिर से बमबारी शुरू करने की उम्मीद करते हैं।

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मोरक्को चुनाव: ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्निटी पार्टी ने जीतीं सबसे अधिक 97 सीटें

मोरक्को के संसदीय चुनाव में ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्निटी पार्टी ने सबसे अधिक सीटें हासिल की हैं। आंतरिक मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को घोषित अंतिम परिणामों के अनुसार, पार्टी ने प्रतिनिधि सभा की 395 में से 97 सीटें जीतीं। यह पार्टी किंग मोहम्मद VI के करीबी एक शाही सलाहकार ने स्थापित की थी। पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। सरकार बनाने के लिए उसे अन्य दलों के साथ बातचीत करनी होगी। यह चुनाव युवाओं में बढ़ती निराशा से प्रभावित था। समृद्ध अर्थव्यवस्था के बावजूद देश में बेरोजगारी अधिक है। लोगों ने बेहतर स्कूलों, अस्पतालों और आवास की मांग की थी।

जयशंकर ने यूएनजीए से इतर ईरान और रूस के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र से इतर रूस और ईरान के साथ बातचीत की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले मॉस्को और तेहरान से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी नया कानून मंजूर किया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान और रूस के अपने समकक्षों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष समेत कई विषयों पर चर्चा हुई।

जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स में सहयोग पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा, "आज रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ अच्छी बैठक हुई। कई मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। साथ ही द्विपक्षीय और ब्रिक्स सहयोग की भी समीक्षा की।" ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत ने इसी महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हिस्सा लिया था।

मोरक्को के संसदीय चुनाव में ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्निटी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी, 97 सीटें जीतीं
मोरक्को के संसदीय चुनाव में ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्निटी पार्टी ने सबसे अधिक सीटें जीती हैं। शुक्रवार को गृह मंत्रालय की ओर से घोषित अंतिम नतीजों के मुताबिक, पार्टी ने 395 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 97 सीटों पर जीत दर्ज की है। राजा मोहम्मद छठे के करीबी सलाहकार द्वारा स्थापित इस पार्टी को फ्रेंच संक्षिप्त नाम पीएएम के नाम से जाना जाता है। हालांकि पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और सरकार बनाने के लिए उसे अन्य दलों के साथ बातचीत कर गठबंधन करना होगा।

चुनाव के दौरान युवाओं में बढ़ती नाराजगी प्रमुख मुद्दा रही। देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के बावजूद बेरोजगारी की ऊंची दर, बेहतर स्कूलों और अस्पतालों की मांग तथा आवास की समस्या को लेकर लोगों में असंतोष है। जुलाई में सेउटा पहुंचने के लिए हुए बड़े पैमाने पर प्रवासन के प्रयासों और पिछले साल जेनरेशन जेड के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद यह पहला चुनाव था।

नई सरकार के सामने अरबों डॉलर के निवेश से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं की जिम्मेदारी होगी। मोरक्को 2030 के फुटबॉल विश्व कप की सह-मेजबानी की तैयारी कर रहा है। इसी वजह से कुछ लोग नई सरकार को विश्व कप सरकार भी कह रहे हैं। नई राजनीतिक नेतृत्व पर नौकरियों, वेतन और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती लागत जैसी आम लोगों से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देने का दबाव भी रहेगा।

पीएएम के कुछ वरिष्ठ सदस्यों से जुड़े कथित ड्रग और सोने की तस्करी के बड़े मामले और उनमें से कई को मिली जेल की सजा के बावजूद पार्टी राजनीतिक नुकसान से उबरने में सफल रही। उसने पिछले चुनाव की तुलना में इस बार अधिक सीटें जीतीं। सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा रही नेशनल रैली ऑफ इंडिपेंडेंट्स यानी आरएनआई को इस चुनाव में बड़ा नुकसान हुआ और वह 66 सीटों पर सिमट गई। वहीं, उदारवादी इस्लामवादी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी यानी पीजेडी ने बड़ी वापसी की। 2021 के चुनाव में सिर्फ 13 सीटें जीतने वाली पीजेडी इस बार 54 सीटों पर पहुंच गई।

पीएएम पहले ही कह चुकी है कि वह आरएनआई के साथ गठबंधन नहीं करेगी। बहुमत हासिल करने के लिए उसके तीसरे स्थान पर रही इस्तिकलाल पार्टी और कम सीटें जीतने वाले अन्य दलों के साथ गठबंधन करने की संभावना है। पीजेडी के साथ गठबंधन की संभावना भी कम मानी जा रही है, क्योंकि दोनों दलों के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है।

बैंकॉक में भारी बारिश और बाढ़ से यातायात प्रभावित, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में गुरुवार दोपहर से शनिवार सुबह तक लगातार हुई बारिश के कारण कई इलाके जलमग्न हो गए। बाढ़ के चलते यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई और कुछ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।  अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि बैंकॉक की प्रमुख नहरों में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश का पानी जमा हो गया। इसके बाद शहर के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी फैल गया। खासतौर पर मध्य और पूर्वी इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

थाईलैंड के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि रविवार तक देश के ज्यादातर हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है। विभाग के मुताबिक, मध्य क्षेत्र के ऊपर बने मजबूत निम्न दबाव वाले सिस्टम और दक्षिण-पश्चिमी मानसून के मजबूत होने के कारण बारिश की स्थिति बनी हुई है। सरकार के अनुसार, शनिवार तक देश के 21 प्रांतों में 84 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें मध्य क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को सेल-ब्रॉडकास्ट सिस्टम के जरिए आपात चेतावनी संदेश भेजे।

कांगो में सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त, तीन अधिकारियों समेत 13 की मौत

लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में शुक्रवार को एक सैन्य विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से तीन सेना अधिकारियों सहित 13 लोगों की मौत हो गई। क्वांगो प्रांत के उप गवर्नर रेमी साकी बोकिंडा ने बताया कि यह विमान दक्षिण-पश्चिमी शहर किकविट से राजधानी किंशासा की ओर जा रहा था। रास्ते में विमान में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद पायलट ने क्वांगो प्रांत के केंगे में इसे उतारने का प्रयास किया। उप गवर्नर ने बताया कि केंगे में कोई उचित हवाई पट्टी न होने के कारण विमान सीधे एक आवासीय भूखंड (रिहायशी इलाके) में जा गिरा। हादसे के शिकार हुए लोगों में सेना के ऑडिटर जनरल मेजर जनरल लिकुलिया बाकुमी के अलावा एक मेजर, एक कप्तान, अन्य सैन्यकर्मी और कुछ नागरिक शामिल थे।

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बांग्लादेश और अमेरिका के बीच परमाणु सहयोग समझौता
बांग्लादेश और अमेरिका ने शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक असैन्य परमाणु सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। न्यूयॉर्क में हुए समझौते पर बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार रेहान असद और अमेरिकी अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य बांग्लादेश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा सहयोग बढ़ाना है। बांग्लादेश रूस की मदद से रूपपुर में अपना पहला परमाणु बिजली संयंत्र विकसित कर रहा है। दोनों देशों ने परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा उपायों, निगरानी और परमाणु अप्रसार के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने पर सहमति जताई है।
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