तिब्बत में बुधवार को भूकंप के दो झटके दर्ज किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, देर रात 9:34 बजे 3.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र 90 किलोमीटर की गहराई पर था। इससे पहले सुबह 10:19 बजे 4.2 तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे क्षेत्र में आफ्टरशॉक की आशंका बनी रही। विशेषज्ञों के अनुसार, तिब्बती पठार भूकंपीय रूप से बेहद सक्रिय है क्योंकि यहां भारतीय और यूरेशियन प्लेटों का टकराव होता है। इसी टकराव से हिमालय का निर्माण हुआ है और समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि इनके झटके सतह पर ज्यादा तीव्रता से महसूस होते हैं। हालांकि, इन भूकंपों से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं है।
म्यांमार में 4.4 तीव्रता का भूकंप
म्यांमार में गुरुवार को 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप 100 किलोमीटर की गहराई में महसूस किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के बयान के अनुसार, भूकंप तीव्रता की तीव्रता 4.4 थी। यह सुबह छह बजकर चार मिनट पर आया। इसके पहले 13 दिसंबर को इस क्षेत्र में 3.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई 115 किलोमीटर थी।
पुलित्जर पुरस्कार विजेता संवाददाता पीटर अर्नेट का निधन
वियतनाम के धान के खेतों से लेकर इराक के रेगिस्तानों तक युद्धों की प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग दुनिया तक पहुंचाने वाले, गोलियों और बमों से बचते हुए दशकों तक काम करने वाले पुलित्जर पुरस्कार विजेता पत्रकार पीटर अर्नेट का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
एसोसिएटेड प्रेस के लिए वियतनाम युद्ध की रिपोर्टिंग पर 1966 में अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग का पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले अर्नेट का बुधवार को न्यूपोर्ट बीच में निधन हुआ। उनके बेटे एंड्रयू अर्नेट ने बताया कि उस समय वे दोस्तों और परिवार से घिरे हुए थे। प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित अर्नेट शनिवार को अस्पताल में भर्ती हुए थे।
वायर सेवा संवाददाता के रूप में अर्नेट 1962 से 1975 में युद्ध समाप्त होने तक वियतनाम में रिपोर्टिंग करते रहे और उस दौरान वे मुख्य रूप से अन्य पत्रकारों के बीच ही जाने जाते थे। हालांकि 1991 में सीएनएन के लिए पहले खाड़ी युद्ध की लाइव रिपोर्टिंग करने के बाद वे आम लोगों के बीच भी एक जाना-पहचाना नाम बन गए।
अमेरिका: रिहायशी इलाके में विमान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट घायल, जांच कर रहा एफएए
अमेरिका के न्यू हैम्पशायर राज्य के दक्षिणी हिस्से में एक रिहायशी इलाके में एक छोटा विमान बुधवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट घायल हुआ और उसे अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
बुधवार दोपहर आपातकालीन टीमों ने नाशुआ शहर में एक रिहायशी परिसर के पार्किंग क्षेत्र में विमान को बर्फ में उल्टा पड़ा हुआ पाया। यह इलाका जंगल से घिरा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, विमान में केवल पायलट ही मौजूद था और वही अकेला व्यक्ति घायल हुआ है। इस मामले की जांच संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) कर रहा है।
एफएए ने बताया कि वेलोसिटी वी-ट्विन विमान पास के नाशुआ हवाई अड्डे से स्थानीय समय के अनुसार करीब 2:10 बजे उड़ान भरने के थोड़ी देर बाद ही कैननगेट कॉन्डोमिनियम इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इस्राइल ने गाजा के रिहायशी इलाके में दागे मोर्टार, 10 लोग घायल
इस्राइल की सेना ने बुधवार को गाजा पट्टी के एक फलस्तीनी रिहायशी इलाके में मोर्टार गोला दागा। इस घटना में कम से कम 10 लोगों के घायल होने की पुष्टि स्वास्थ्य अधिकारियों ने की है। इस्राइली सेना ने कहा कि यह फायरिंग संघर्षविराम समझौते में तय की गई तथाकथित ‘येलो लाइन’ के पास एक सैन्य अभियान के दौरान हुई। सेना के मुताबिक मोर्टार अपने तय लक्ष्य से भटक गया, हालांकि यह नहीं बताया गया कि लक्ष्य क्या था। सेना ने घटना की जांच शुरू कर दी है। गाजा सिटी के अल-अहली अस्पताल के निदेशक फादेल नईम ने बताया कि घायल सभी लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गौरतलब है कि 10 अक्टूबर से लागू संघर्षविराम के बाद यह पहली घटना नहीं है, जब येलो लाइन के बाहर इस्राइली फायरिंग से नागरिक हताहत हुए हों। फलस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार संघर्षविराम के बाद अब तक इस्राइली कार्रवाई में 370 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस्राइल का कहना है कि उसने हमास की उल्लंघनों के जवाब में कार्रवाई की है, जबकि फलस्तीनी पक्ष का आरोप है कि लाइन के स्पष्ट रूप से चिन्हित न होने के कारण आम नागरिक निशाना बन रहे हैं।
श्रीलंका को भारत ने भेजी और राहत सामग्री
भारत ने बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित श्रीलंका को राहत पहुंचाने के प्रयास तेज करते हुए 50 टन से अधिक अतिरिक्त सूखा राशन भेजा है। भारतीय उच्चायोग के मुताबिक 'ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत अब तक श्रीलंका को कुल 1,134 टन से ज्यादा मानवीय सहायता दी जा चुकी है। इसमें सूखा राशन, टेंट, तिरपाल, स्वच्छता किट, कपड़े, जल शुद्धिकरण प्रणाली और 14.5 टन दवाइयां व सर्जिकल उपकरण शामिल हैं। भारत की ओर से एनडीआरएफ की दो टीमें, सेना का फील्ड अस्पताल और बीएचआईएसएचएम आरोग्य मैत्री क्यूब्स के जरिए प्रभावित इलाकों में इलाज और राहत कार्य किया गया। अब तक 7,000 से अधिक मरीजों को चिकित्सा सहायता दी गई है। इसके अलावा, कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए बेली ब्रिज के उपकरण और इंजीनियर भेजे गए। चक्रवाती तूफान डिटवाह के कारण श्रीलंका में आई भीषण आपदा के बीच भारत की यह मदद दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दर्शाती है।