फिजी में बुधवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप सुवा में आया और इसका असर काफी दूर तक रहा। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.4 मापी गई। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप के झटके सुबह छह बजकर 58 मिनट पर दर्ज किए गए। फिलहाल किसी भी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।
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क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
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जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।
कितनी तबाही लाता है भूकंप?
रिक्टर स्केल
असर
0 से 1.9
सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2 से 2.9
हल्का कंपन
3 से 3.9
कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर
4 से 4.9
खिड़कियां टूट सकती हैं और दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
5 से 5.9
फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9
इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9
इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9
इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं। सुनामी का खतरा।
9 और उससे ज्यादा
पूरी तबाही, कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी।
चीन ने मालदीव को 1500 टन पीने का पानी भेजा, तिब्बत के ग्लेशियरों से जमा हुआ जल
मालदीव सरकार ने बताया है कि पानी की भारी कमी के बीच जल संकट से निपटने के लिए चीन ने 1500 टन पानी दान किया है। मंगलवार को मालदीव ने कहा, तिब्बत के ग्लेशियरों से जमा पानी चीन ने दान किया। 1500 टन पीने का पानी मालदीव पहुंचने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा, मालदीव को पीने का पानी उपलब्ध कराने का निर्णय चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के अध्यक्ष यान जिनहाई के दौरे के दौैरान लिया गया। जिनहाई ने मालदीव की आधिकारिक यात्रा के दौरान पिछले नवंबर में राष्ट्रपति डॉ मोहम्मद मुइज्जू से मुलाकात की थी। मालदीव के समाचार पोर्टल Edition.mv ने मंत्रालय को कहा, 1500 टन पीने के पानी की खेप देश में लाई गई है।
चीनियों पर आत्मघाती हमले की गहन जांच की मांग, चीन ने पाकिस्तान से की बात
चीन ने पाकिस्तान से चीनी नागरिकों पर आत्मघाती हमला मामले में गहन जांच की मांग की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान में चीन अपनी सुरक्षा एजेंसियों को तैनात करने के लिए दबाव डाल सकता है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने इस बात के संकेत दिए हैं। बता दें कि चीनी नागरिकों पर मंगलवार को आत्मघाती हमला हुआ था। सीपीईसी परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए चीन अपनी सुरक्षा एजेंसियों को तैनात करने पर अड़ सकता है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में उन पर हमले बढ़े हैं।
बता दें कि मंगलवार को पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में विस्फोटकों से भरे एक वाहन ने उनकी बस को टक्कर मार दी। इसमें मारे गए छह लोगों में कम से कम पांच चीनी नागरिक भी शामिल थे। 2021 के बाद चीन समर्थित जलविद्युत परियोजना पर काम कर रहे कर्मियों पर यह दूसरा आत्मघाती हमला है।
चीनी नागरिकों पर आतंकी हमले की संयुक्त जांच के आदेश, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दिए निर्देश
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (फाइल)
- फोटो : ani
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुए आतंकी हमले की जांच के आदेश दिए हैं। खबरों के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी कर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने का दबाव डाला, इसके बाद बुधवार को पीएम शरीफ ने चीनी नागरिकों पर घातक आतंकवादी हमले की गहन और संयुक्त जांच का आदेश दिया।
हमले का शिकार हुए चीनी कर्मचारी, दासू जलविद्युत परियोजना पर काम कर रहे थे। यह इस्लामाबाद से लगभग 300 किमी उत्तर में है। 4,320 मेगावाट की परियोजना का निर्माण विश्व बैंक की फंडिंग से चीन गेझोउबा द्वारा किया जा रहा है।