संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सभी विवादों का समाधान बातचीत के जरिये होना चाहिए। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उससे जुड़े प्रस्तावों को आधार बनाया जाना चाहिए। इसमें कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है। एर्दोगन ने कहा कि दक्षिण एशिया में कश्मीर समेत सभी विवादों को बातचीत के जरिये सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों का पालन किया जाना चाहिए। एर्दोगन का यह बयान ऐसे समय आया है जब कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। यह पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का जिक्र किया है। पिछले साल सितंबर में भी उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दे के समाधान की बात कही थी। तब उन्होंने कहा था कि कश्मीर के लोगों के हित में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और बातचीत के आधार पर इस मुद्दे का समाधान होना चाहिए।
क्रैश फॉर कैश घोटाले में भारतीय मूल के पूर्व ब्रिटिश पुलिस अधिकारी को जेल
ब्रिटेन में भारतीय मूल के एक पूर्व पुलिस अधिकारी को क्रैश फॉर कैश घोटाले में भूमिका के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद चार साल और पांच महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। इस घोटाले में चोट लगने के झूठे दावे करके पैसे ऐंठे जाते थे। 42 साल का कुलदीप सिंह मेट्रोपॉलिटन पुलिस में अधिकारी था। तब वह एक ऐसे गिरोह में शामिल हुआ जो गाड़ियों की पूर्वनिर्धारित टक्कर करवाता था और बीमा कंपनियों से मुआवजे के लिए झूठे दावे करता था। कुलदीप ने इस साल की शुरुआत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। उसे पांच साल के लिए कंपनी डायरेक्टर बनने से भी रोक दिया गया।
शरीर में चलेगी खाने योग्य बैटरी, काम के बाद खुद घुल जाएगी
वैज्ञानिकों ने ऐसी बैटरी विकसित की है, जो शरीर के अंदर कुछ समय तक छोटे मेडिकल उपकरणों को बिजली देने के बाद धीरे-धीरे खुद ही खत्म हो जाएगी। इससे बैटरी निकालने के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसका शुरुआती परीक्षण सूअरों पर सफल रहा है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़े जियोवानी ट्रैवर्सो और उनकी टीम ने इसे विकसित किया है। शोध नेचर केमिकल इंजीनियरिंग में प्रकाशित हुआ है। बैटरी में मैग्नीशियम और मोलिब्डेनम ट्राइऑक्साइड का इस्तेमाल किया गया है।
73% अमेरिकियों को एआई से बड़े नुकसान का डर
अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर लोगों की चिंता बढ़ रही है। 73% अमेरिकियों का मानना है कि एआई बनाने वाली कंपनियां इससे होने वाले गंभीर नुकसान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही हैं। रॉयटर्स-इप्सोस के सर्वेक्षण में 39% लोगों ने एआई को समाज के लिए नकारात्मक बताया, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। सर्वेक्षण में 55% लोगों ने एआई के विकास की रफ्तार धीमी करने को सही बताया, जबकि 13% ने इसे गलत कहा। वहीं 73% लोगों ने कहा कि दुनिया में एआई की दौड़ में आगे रहने से ज्यादा जरूरी इसका सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।