इस्तांबुल के फातिह इलाके में रविवार दोपहर गैस विस्फोट के बाद दो इमारतें ढह गईं। हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव टीमों को मौके पर भेजा गया। अधिकारियों के मुताबिक मलबे में नौ लोग फंस गए थे, जिनमें से सात को निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक और व्यक्ति को भी बाहर निकाल लिया गया है और उसका इलाज चल रहा है। अभी एक व्यक्ति की तलाश जारी है। राहत की बात यह है कि किसी की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है। ढही इमारतों में एक दो मंजिला और दूसरी एक मंजिला थी।
विज्ञापन
श्रीलंका में 25 प्रतिशत महंगा हुआ ईंधन
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब श्रीलंका में साफ दिखने लगा है। सरकार ने रविवार को ईंधन की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी। यह एक हफ्ते में दूसरी और मार्च के बाद तीसरी बढ़ोतरी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर के कारण वैश्विक तेल सप्लाई बाधित हुई है, जिससे कीमतें बढ़ी हैं। डीजल, पेट्रोल और केरोसीन सभी महंगे हो गए हैं। हालात 2022 के आर्थिक संकट जैसे बनने लगे हैं। निजी बस ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि किराया नहीं बढ़ा तो 90 प्रतिशत बसें सड़कों से हट सकती हैं।
इस्राइल ने हमास के वित्तीय अधिकारी को मार गिराने का किया दावा
इस्राइल रक्षा बल ने रविवार को दावा किया कि उसने लेबनान में हमास के वरिष्ठ वित्तीय ऑपरेटिव वालिद मोहम्मद दिब को मार गिराया है। सेना के अनुसार दिब संगठन के वित्तीय नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता था और कई देशों में फंडिंग व भर्ती से जुड़ा था। इस बीच लेबनान में इस्राइली हमलों में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबर है। वहीं हिजबुल्लाह ने भी जवाबी हमले करते हुए ड्रोन और मिसाइल से इस्राइली ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
विज्ञापन
ईरान पर क्या बोले जापान के विदेश मंत्री
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने रविवार को कहा कि ईरान में हिरासत में लिए गए दो जापानी नागरिकों में से एक को रिहा कर दिया गया है और वह जापान लौट रहा है। मोतेगी ने कहा कि उस व्यक्ति को पिछले साल से हिरासत में रखा गया था और बुधवार को उसे रिहा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक अन्य जापानी नागरिक, जिसे इस साल की शुरुआत में गिरफ़्तार किया गया था, अभी भी हिरासत में है। ईरान में अभी भी हिरासत में मौजूद व्यक्ति की पहचान जापान के सरकारी प्रसारक NHK के एक पत्रकार के रूप में की गई है।
सूडान के अस्पताल पर हमले में मृतकों का आंकड़ा 64 हुआ
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शनिवार को बताया कि पिछले हफ्ते सूडान के पश्चिमी दारफुर इलाके में एक अस्पताल पर हुए हमले में कम से कम 64 लोग मारे गए, जिनमें कम से कम 13 बच्चे भी शामिल थे। डब्लूएचओ के प्रमुख टेड्रोस गैब्रेसियस ने एक्स पर बताया कि शुक्रवार को पूर्वी दारफुर के अल दाईन टीचिंग अस्पताल पर हुए हमले में कम से कम 89 लोग घायल भी हुए। अप्रैल 2023 में सूडान में तब अफरा-तफरी मच गई, जब सेना और उसकी विरोधी पैरामिलिट्री फोर्स, रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच सत्ता की लड़ाई पूरे देश में युद्ध में बदल गई। आरएसएफ ने अस्पताल पर हमले के लिए सेना को जिम्मेदार ठहराया है।
सेना ने इस हमले से इनकार किया है, लेकिन दो सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यह हमला पास के एक पुलिस स्टेशन को निशाना बनाकर किया गया था। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर यह बात कही, क्योंकि उन्हें इस मामले पर खुलकर बात करने की इजाजत नहीं थी। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, इस भयानक युद्ध में 40,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन राहत समूहों का कहना है कि यह आंकड़ा असल संख्या से काफी कम है और असली संख्या इससे कई गुना ज़्यादा हो सकती है। WHO ने बताया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक मेडिकल सुविधाओं पर हुए हमलों में 2,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
हमलों से नाराज सऊदी अरब ने ईरानी सैन्य अताशे को निकाला
सऊदी अरब ने अपने क्षेत्र और सहयोगियों पर ईरान के लगातार हवाई हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कड़ा राजनयिक कदम उठाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने ईरानी दूतावास के सैन्य अताशे, सहायक सैन्य अताशे और तीन अन्य मिशन कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। सऊदी सरकार ने इन्हें पर्सोना नॉन ग्राटा (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर 24 घंटे के भीतर प्रस्थान करने का निर्देश दिया है। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, इन हमलों को बीजिंग समझौते और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का उल्लंघन बताया गया है। मंत्रालय ने कहा कि ईरान की सैन्य गतिविधियां संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के विरुद्ध हैं। सऊदी ने स्पष्ट किया कि वह अपनी सुरक्षा, नागरिकों और संसाधनों की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत सभी आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
दुनिया के आधे से अधिक देशों के स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध
दुनियाभर में स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी (जेम) टीम की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 58 प्रतिशत देशों ने स्कूलों में मोबाइल पर प्रतिबंध लगा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि क्लास में ध्यान कम होना, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल माध्यमों का बच्चों पर बढ़ता असर इसके मुख्य कारण हैं। जून 2023 में केवल 24 % देशों में ही यह प्रतिबंध था, जो 2025 की शुरुआत में बढ़कर 40 प्रतिशत और मार्च 2026 तक 58 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सामाजिक माध्यमों का बच्चों, खासकर लड़कियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। लड़कियां लड़कों की तुलना में दोगुना ज्यादा खानपान से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रही हैं। 32 प्रतिशत किशोरियों को तस्वीरें देखने के बाद अपने शरीर को लेकर असहज महसूस होता है। कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों को बार-बार शरीर से जुड़ी सामग्री दिखाते हैं, जिससे मानसिक असर बढ़ता है। हाल ही में कई देशों ने भी स्कूलों में मोबाइल पर पाबंदी लगाई है।
अमेरिका: वर्क फ्रॉम होम की नहीं दी अनुमति, नवजात की मौत; कंपनी को अब देना होगा 200 करोड़ रुपये का हर्जाना
अमेरिका की एक कंपनी को गर्भवती कर्मचारी को घर से काम करने की अनुमति नहीं देना महंगा पड़ा है। ओहियो की फ्रेट-ब्रोकरेज फर्म को उस महिला को 200 करोड़ रुपये का हर्जाना देना होगा जिसकी बच्ची की समय से पहले जन्म के बाद मौत हो गई थी। जूरी ने कंपनी को हर्जाना अदा करने का फैसला सुनाया है। चेल्सी वॉल्श, उनकी दिवंगत नवजात बेटी मैग्नोलिया और टोटल क्वालिटी लॉजिस्टिक्स (टीक्यूएल) से जुड़ा यह मामला ऐसे समय सामने आया जब कोविड-19 महामारी के दौरान कई नियोक्ताओं ने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी थी। कोविड महामारी खत्म होने के बाद कर्मचारियों पर दफ्तर लौटने के लिए दबाव दिया गया। वॉल्श के परिवार के वकील मैथ्यू सी मेट्जगर ने एक बयान में कहा कि बुधवार को उनके मुवक्किल के पक्ष में सुनाया गया।