अफगानिस्तान के पश्चिमी शहर हेरात में महिलाओं की कथित गिरफ्तारी के विरोध में हुए प्रदर्शन पर की गई हिंसक कार्रवाई में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। हेरात इलाके में ड्रेस कोड नियमों के उल्लंघन के आरोप में 30 महिलाओं की गिरफ्तारी की गई थी। इन गिरफ्तारियों के खिलाफ मंगलवार को 100-150 लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप है कि इस दौरान तालिबान पुलिस ने भीड़ पर गोलीबारी की।
गोली लगने से कम से कम एक किशोर की मौत हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों को लाठियों से पीटे जाने की भी रिपोर्ट है। साल 2021 में अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं की वापसी के बाद अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन है। इसके बाद सरकार ने इस्लामी कानून (शरीयत) की सख्त व्याख्या पर आधारित कई नियम लागू किए हैं। देश में विरोध-प्रदर्शन दुर्लभ हैं और सरकार के खिलाफ असहमति को लगभग बर्दाश्त नहीं किया जाता।
महिलाओं और लड़कियों पर कई सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनमें प्राथमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई पर रोक और सार्वजनिक स्थानों पर ड्रेस कोड शामिल है। नियमों के अनुसार महिलाओं को पूर्ण हिजाब-सिर से पैर तक ढका हुआ वस्त्र और चेहरा ढकने वाला नकाब-पहनकर ही बाहर निकलने की अनुमति है।
बर्बरता के बाद अब प्रदर्शनकारियों के शव भी नहीं लौटा रही पाकिस्तानी सेना
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में प्रदर्शनकारियों से बर्बरता के बाद अब सुरक्षाकर्मी मारे गए लोगों के शव भी नहीं लौटा रहे। पीओजेके में लगातार तीसरे दिन भी शटडाउन जारी रहा। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों व सुरक्षाकर्मियों में झड़प में एक कार्यकर्ता की मौत हो गई।
पाकिस्तानी अंग्रेजी दैनिक डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (जेएएसी) ने आरोप लगाया है कि पीओजेके में सुरक्षा एजेंसियों के साथ हालिया झड़पों में मारे गए कई कार्यकर्ताओं के शव उनके परिवारों को नहीं सौंपे गए हैं। अशांति के बीच यह मुद्दा समूह की मुख्य मांगों में से एक बन गया है।
डॉन के अनुसार, पूरे इलाके में विरोध-प्रदर्शन जारी रहने के कारण पीओजेके में लगातार तीसरे दिन भी पूरी तरह से शटडाउन रहा। रावलकोट के पास प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई झड़प में एक कार्यकर्ता की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। साथी प्रदर्शनकारियों ने मृतक की पहचान सुधनोती जिले के 32 वर्षीय सोहबान आरिफ के तौर पर की। जेएएसी नेताओं ने दोहराया कि मारे गए कार्यकर्ताओं के शव लौटाना, हिरासत में लिए गए सदस्यों को रिहा करना और संगठन पर लगी पाबंदी हटाना, धरना-प्रदर्शन खत्म करने की शर्तों में शामिल हैं। जेएएसी के प्रतिनिधि इम्तियाज असलम ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि जब तक अधिकारी कार्यकर्ताओं के शव उनके परिवारों को नहीं सौंप देते और समिति पर प्रतिबंध लगाने वाली अधिसूचना रद्द नहीं कर देते तब तक प्रदर्शन जारी रहेंगे। समूह ने नागरिकों की मौत की जांच और शहरी इलाकों से सुरक्षा बलों की तैनाती हटाने की भी मांग की है।
निहत्थों पर गोली चला रही पुलिस, 200 लोग मारे गएः मिर्जा
राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने पीओजेके में चल रही अशांति से निपटने के पाकिस्तान के तरीके की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस इलाके में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन, राजनीतिक हेरफेर और विरोध प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने का आरोप लगाया है। खबरों के मुताबिक, 9 जून को बुलाई गई इलाके-व्यापी हड़ताल में भारी भीड़ जुटी, जिसके बाद पूरे पीओजेके में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए। मिर्जा ने इस तैनाती को हमला बताया और आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। उन्होंने दावा किया कि बच्चों समेत 200 से अधिक लोग मारे गए हैं। मिर्जा ने अधिकारियों पर कई कस्बों में कार्रवाई के दौरान छापेमारी, मनमानी गिरफ्तारियां और घरों में लूटपाट करने का आरोप लगाया।
बफोर्ड में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन
ब्रिटेन के बफोर्ड में रहने वाले पीओजेके के लोगों ने बृहस्पतिवार को पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान-विरोधी नारे लगाए और रावलकोट व कोटली में विरोध-प्रदर्शन में शामिल आम नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग को लेकर पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की कड़ी आलोचना की।