अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच जल्द ही बातचीत हो सकती है। व्हाइट हाउस ने इसकी जानकारी दी है। व्हाइट हाउस ने बताया कि दोनों देशों के राष्ट्रपति आने वाले हफ्तों में ही फोन पर बातचीत कर सकते हैं। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत नवंबर में होने जा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बीच हो रही है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलीवन ने 27-28 अगस्त को चीन का दौरा किया है। जैक सुलीवन की चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान ही बाइडन और जिनपिंग की बीच बातचीत को लेकर चर्चा हुई। व्हाइट हाउस ने ये भी कहा कि भविष्य में दोनों देशों के सैन्य कमांडर्स के बीच भी बातचीत आयोजित की जाएगी। बीते साल नवंबर में जिनपिंग ने अमेरिका का दौरा किया था। उस दौरान भी बाइडन और जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी।
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने एलान किया है कि वह अफगान शरणार्थियों को वापस भेजने की दूसरे चरण की प्रक्रिया जल्द शुरू कर देंगे। पाकिस्तान के गृह मंत्री ने अफगान शरणार्थियों के पुनर्वास में संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका की आवश्यकता पर बल दिया। अफगानिस्तान के लिए विशेष प्रतिनिधि इंद्रिका रत्वाटे के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधिमंडल के साथ बुधवार को एक बैठक के दौरान नकवी ने कहा कि पाकिस्तान में दशकों से अफगान शरणार्थी रह रहे हैं और अब अवैध विदेशियों को चरणबद्ध तरीके से वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पाकिस्तान ने आत्मघाती हमलों में वृद्धि के बाद पिछले साल नवंबर में 'अवैध विदेशी' कहे जाने वाले लोगों की वापसी का पहला दौर शुरू किया था। पाकिस्तान की सरकार मानती है कि ये लोग तस्करी, आतंकवादी हिंसा और अन्य अपराधों में शामिल थे। माना जाता है कि इस चरण के तहत करीब पांच लाख अफगानों को निष्कासित किया गया था। अब दूसरे चरण में अफगान नागरिक कार्ड (एसीसी) रखने वाले अफगानों को निष्कासित किया जाएगा, जबकि तीसरे चरण में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाण (पीओआर) कार्ड रखने वालों को वापस भेजा जाएगा।
नकवी ने अफगान शरणार्थियों के पुनर्वास में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी दस्तावेज रखने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, लेकिन उन्होंने कहा कि किसी को भी वीजा या अन्य कानूनी दस्तावेजों के बिना पाकिस्तान में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। आतंकवाद को एक वैश्विक मुद्दा बताते हुए मंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान सबसे ज्यादा प्रभावित देश है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने जारी किया चुनावी घोषणापत्र
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को अपने चुनाव घोषणापत्र जारी किया। इसमें उन्होंने नकदी संकट से जूझ रहे देश के अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ अपने आर्थिक सुधार को जारी रखने का एलान किया। विक्रमसिंघे ने कहा कि अब चर्चा का नहीं, बल्कि कार्रवाई का समय है। हमें नई नीतियों पर बहस करने या नई नीतियों पर आईएमएफ के साथ बातचीत में शामिल होने से बचना चाहिए। राष्ट्रपति विक्रमसिंघे देश में आवश्यक वस्तुओं के लिए लग रही लंबी कतारों को समाप्त करने और आजीविका की गारंटी देने की अपनी विरासत के साथ फिर से चुनाव मैदान में हैं। श्रीलंका ने आर्थिक संकट के बीच विक्रमसिंघे के नेतृत्व में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है। देश में आवश्यक वस्तुओं, बिजली और रसोई गैस की कमी के चलते जनता के बड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को 2022 में पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
नेपाल के राष्ट्रपति ने ट्रांजिशनल जस्टिस (टीजे) विधेयक पर लगाई मुहर
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 1996-2006 के गृहयुद्ध के दौरान जबरन गायब व्यक्तियों की जांच के लिए बने आयोग, सत्य और सुलह आयोग अधिनियम (टीआरसी बिल) में संशोधन करने के लिए ट्रांजिशनल जस्टिस विधेयक पर मुहर लगाई। संसद के दोनों सदनों द्वारा समर्थन के बाद विधेयक को प्रमाणीकरण के लिए राष्ट्रपति के पास प्रस्तुत किया गया था। नौ देशों और यूरोपीय संघ (ईयू) ने विधेयक का स्वागत किया। अमेरिका, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, यूके, नॉर्वे, जापान, फिनलैंड, यूरोपीय संघ, जर्मनी और फ्रांस के एक संयुक्त बयान में नेपाल के प्रयासों का स्वागत किया। नेपाल ने 1996 से 2006 तक गृह युद्ध हुआ। इस दौरान सभी पक्षों ने व्यापक और व्यवस्थित पैमाने पर मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन किया। वहीं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय के अनुसार राज्य बलों ने नियंत्रण में लिए गए या गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को जबरन गायब किया था। 2006 में व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुए एक दशक लंबे विद्रोह के दौरान सुरक्षा कर्मियों सहित लगभग 17,000 लोग मारे गए थे।