बांग्लादेश की एक अदालत ने आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में एक दंपती को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने सिर्फ पांच दिन की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया। अभियोजकों ने इसे देश में हत्या के किसी मुकदमे का सबसे तेजी से निपटारा बताया है।
ढाका मेट्रोपॉलिटन बाल उत्पीड़न रोकथाम न्यायाधिकरण ने घटना के 19 दिन बाद दोषियों की सजा का एलान किया। जस्टिस मसरूर सालेकिन ने रविवार को सोहेल राणा और उसकी पत्नी स्वप्ना खातून को मौत की सजा सुनाई और क्रमशः पांच लाख टका और दो लाख टका का जुर्माना भी लगाया। उन्होंने जुर्माने की राशि पीड़ित परिवार को देने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी निजी वकील दंपती की पैरवी करने को तैयार नहीं हुआ, जिसके कारण अदालत ने उनके प्रतिनिधित्व के लिए एक सरकारी वकील नियुक्त किया। बांग्लादेशी कानून के तहत, निचली अदालतों की ओर से दी गई मौत की सजा को अमल में लाने से पहले उच्च न्यायालय की ओर से फैसले की समीक्षा और पुष्टि किया जाना जरूरी है।
ब्रिटेन में यूरोपीय नेताओं के साथ जेलेंस्की
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज लंदन में अपनी बैठक के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट के दरवाजे पर खड़े होकर तस्वीर खिंचवाई।
पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी ने सोमवार को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे "नरसंहार" करार दिया।यूकेपीएनपी के अनुसार, रविवार रात हुई इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
पार्टी ने बयान में कहा, "शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है। पाकिस्तान को निहत्थे कश्मीरियों के खिलाफ अत्याचार और दमन का यह सिलसिला तुरंत बंद करना चाहिए।संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप कर कश्मीरी लोगों के जीवन और उनके मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से पीओके की जमीनी स्थिति को दुनिया के सामने लाने की अपील की है। रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट इस समय पीओके में फैल रहे विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। यह विरोध तब तेज हुआ जब प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।