दक्षिण अफ्रीका ने 1977 में पुलिस हिरासत में मारे गए प्रतिष्ठित रंगभेद विरोधी नेता स्टीव बीको की मौत की नई जांच शुरू करने का फैसला किया है। अभियोजन अधिकारियों ने बताया कि यह जांच शुक्रवार को अदालत में दर्ज की जाएगी, ठीक उनकी मौत की बरसी के दिन।
बीको ब्लैक कॉन्शसनेस मूवमेंट के संस्थापकों में से थे और रंगभेद व्यवस्था के खिलाफ सबसे मुखर चेहरा बन गए थे। अगस्त 1977 में उन्हें सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया और हिरासत में कथित रूप से बुरी तरह पीटा और यातनाएं दी गईं। 11 सितम्बर को बेहोशी की हालत में उन्हें एक पुलिस वाहन में डालकर प्रिटोरिया जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां अगले दिन उनकी मौत हो गई। उस समय वे सिर्फ 30 साल के थे।
मौत का कारण सिर और गुर्दे की चोटें दर्ज किया गया, लेकिन उसी साल हुई पहली जांच को अब व्यापक तौर पर ढकने का प्रयास माना जाता है। कहा गया था कि बीको ने पुलिस से झगड़े के दौरान दीवार पर सिर मार लिया था। अभियोजन प्राधिकरण का कहना है कि यह नई जांच अतीत के अत्याचारों को सामने लाने और बीको परिवार व समाज को न्याय दिलाने का प्रयास है। बीको की विरासत आज भी संगीत, साहित्य और सिनेमा के जरिए जीवित है।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बाढ़ से मौतों की संख्या बढ़कर 78 हुई
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बाढ़ से संबंधित घटनाओं में मरने वालों का आंकड़ा 7 8 हो गया है। प्रांत के एक मंत्री ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
सरकार ने बताया कि पिछले तीन दिनों में उसने दक्षिण पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे 16,000 से अधिक लोगों को बचाया है। पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 23 अगस्त से पंजाब में बाढ़ के शुरू होने के बाद से 78 लोग मारे गए हैं और 42 लाख लोग प्रभावित या विस्थापित हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि 22 लाख लोग और 17 लाख पशु सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किए गए हैं और प्रांत के 4,500 गांव पानी में डूबे हुए हैं। पिछले तीन दिनों में दक्षिण पंजाब से 16,000 से अधिक लोगों को बचाया गया है, जबकि 490 चिकित्सा शिविर और 1,412 पशु चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं। दवाइयां, साफ पानी और भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बेलारूस ने लिथुआनिया के 52 कैदियों को रिहा किया
बेलारूस ने 52 कैदियों को रिहा कर दिया है और वे लिथुआनिया में प्रवेश कर चुके हैं। लिथुआनिया के राष्ट्रपति ने यह जानकारी गुरुवार को दी।
इससे पहले जून में बेलारूस ने एक प्रमुख विपक्षी नेता सियारहेई तिखानोव्स्की और 13 अन्य कैदियों को रिहा किया था। सियारहेई, निर्वासित विपक्षी नेता स्वेतलाना तिखानोव्स्काया के पति हैं। यह रिहाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक वरिष्ठ दूत की यात्रा के बाद हुई थी। पिछले महीने ट्रंप ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से और कैदियों की रिहाई को लेकर बातचीत की थी।
लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानास नौसेदा ने एक्स पर लिखा, मैं अमेरिका और विशेष रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का राजनीतिक कैदियों की रिहाई के लिए लगातार प्रयासों के लिए आभारी हूं। 52 बहुत बड़ी संख्या है, लेकिन बेलारूस की जेलों में अभी भी 1,000 से ज्यादा राजनीतिक कैदी बंद हैं। हम तब तक नहीं रुक सकते, जब तक वे सब आजाद न हो जाएं।
ट्रंप के आपातकालीन आदेश पर आया नया अपडेट
ट्रंप प्रशासन के अनुरोध पर ओहायो के गवर्नर माइक डिवाइन ने 150 मिलिट्री पुलिस को वॉशिंगटन डीसी में तैनात रखने की मंजूरी दी है। ये नेशनल गार्ड जवान 30 नवम्बर तक राजधानी में गश्त करेंगे। यह कदम उस वक्त आया है जब ट्रंप का आपातकाल आदेश बुधवार रात खत्म हो रहा है। इस आदेश के तहत डीसी की पुलिस व्यवस्था संघीय नियंत्रण में थी और राजधानी में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। कांग्रेस इस आदेश को आगे नहीं बढ़ा सकी, इसलिए अब सीमित रूप से गार्ड की मौजूदगी जारी रहेगी।
कनाडा में डे-केयर सेंटर में कार घुसने से बच्चे की मौत
टोरंटो के उत्तर में स्थित एक डे-केयर सेंटर में बुधवार दोपहर (स्थानीय समयानुसार) पिकअप टाइम से ठीक पहले एक एसयूवी कार खिड़की तोड़कर अंदर घुस गई। हादसे में डेढ़ साल के एक बच्चे की मौत हो गई। यॉर्क क्षेत्रीय पुलिस के अनुसार, हादसे में 18 महीने से तीन साल की उम्र के छह अन्य बच्चे घायल हो गए। इनमें से एक की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने बताया कि डे-केयर के तीन स्टाफ सदस्य भी घायल हुए हैं। घटना ओंटारियो के रिचमंड हिल में यॉन्ग स्ट्रीट और नॉटिंघम ड्राइव के पास हुई। कॉन्स्टेबल केविन नेब्रीजा ने कहा कि कार चलाने वाले 70 वर्षीय व्यक्ति को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है। प्राथमिक जांच में यह हादसा जानबूझकर किया गया मामला नहीं लगता।
बांग्लादेश में भीड़ ने दो युवकों को पीट-पीटकर मार डाला
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बुधवार को तीन घंटे के अंतराल में ही भीड़ ने लूटपाट के शक में पीट-पीटकर दो युवकों की हत्या कर दी। मानवाधिकार समूहों और मीडिया ने भी इस पर चिंता जताई है। प्रोथोम अलो अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका के मोहम्मदपुर में अलग-अलग घटनाओं में 20-25 साल के दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उन पर लूटपाट का शक था। दो दिन पहले इसी इलाके में इसी तरह के आरोप में एक और युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। अग्रणी बांग्लादेशी अधिकार समूह ऐन ओ सलीश केंद्र (एएसके) ने हाल में बताया था कि पिछले आठ महीनों में 124 लोगों की हत्या कर दी गई। प्रोथोम अलो ने कहा कि अगस्त के पहले 10 दिनों में छिटपुट भीड़ हिंसा में नौ लोगों की हत्या कर दी गई। अधिकार समूहों ने कहा कि अधिकतर मामलों में पीड़ितों को झूठी अफवाहों के कारण भीड़ ने मार डाला। प्रो. मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के गृह मामलों के सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि कानून और व्यवस्था की स्थिति थोड़ी बिगड़ गई है, लेकिन सरकार आवश्यक कदम उठा रही है।