फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

World: सलमान रुश्दी पर चाकू से हमला करने वाले को 25 साल की जेल; USAID के फंड में कटौती से जा रही बच्चों की जान

Fri, 16 May 2025 11:08 AM IST
नितिन गौतम वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
दुनिया की बड़ी खबरें - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

मशहूर लेखक सलमान रुश्दी पर 2022 में न्यूयॉर्क व्याख्यान के मंच पर चाकू से हमला करने के दोषी व्यक्ति को शुक्रवार को 25 साल जेल की सजा सुनाई गई। इस हमले से रुश्दी एक आंख से अंधे हो गए थे। जूरी ने 27 वर्षीय हादी मतार को फरवरी में हत्या के प्रयास और हमले का दोषी करार दिया था। रुश्दी अपने हमलावर को सजा सुनाए जाते वक्त अदालत में मौजूद नहीं थे लेकिन उन्होंने बयान जारी किया। 

विज्ञापन


शेख हसीना के बेटे ने ली अमेरिकी नागरिकता: बांग्लादेशी मीडिया
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने कथित तौर पर अमेरिकी पासपोर्ट हासिल कर लिया है। 'बांग्लादेश प्रतिदिन' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी नागरिकता की शपथ ली और नागरिकता प्रमाण पत्र प्राप्त किया। शपथ ग्रहण समारोह में विभिन्न देशों के कुल 22 लोगों ने भाग लिया। उनमें से जॉय सहित तीन बांग्लादेशी मूल के थे। वे अपने साथ एक वकील भी लेकर आए थे। तीन बांग्लादेशियों में से जॉय दूसरे ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने शपथ ली है। अवामी लीग के नेता और पूर्व सूचना राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात ने कहा, जॉय का बांग्लादेशी पासपोर्ट, यूनुस की मौजूदा अवैध सरकार ने रद्द कर दिया था। इस परिस्थिति में, उन्हें अमेरिकी पासपोर्ट प्राप्त करना पड़ा। अराफात ने कहा, ग्रीन कार्ड किसी व्यक्ति को अमेरिका से बाहर यात्रा करने की अनुमति नहीं देता है, और सजीब वाजेद जॉय को अमेरिका से बाहर यात्रा करने के लिए पासपोर्ट की आवश्यकता थी। उन्हें अमेरिका से बाहर यात्रा करने या अपनी मां से मिलने के लिए पासपोर्ट की आवश्यकता थी। बांग्लादेश की पूर्व पीएम और जॉय की मां शेख हसीना गत वर्ष अगस्त में छात्र विद्रोह के बाद सत्ता से बेदखल होकर भारत में रह रही हैं। 

परिजनों पर कार्रवाई
बांग्लादेश में पिछले साल छात्र विद्रोह के बाद शेख हसीना के भारत आने के बाद से ही उनके समर्थकों और परिजनों पर कार्रवाई होने लगी। सजीब वाजेद जॉय पर भी कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। उनके देश के बाहर होने के बावजूद कोर्ट से उन्हें कई नोटिस जारी हुए।
विज्ञापन


आईसीसी के मुख्य अभियोजक पर ट्रंप की पाबंदी, कामकाज में रुकावट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फरवरी में लगाए गए प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) के मुख्य अभियोजक अपने ईमेल नहीं देख पा रहे हैं और उनके बैंक खातों से लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। ट्रंप द्वारा आईसीसी के मुख्य अभियोजक करीम खान पर फरवरी में लगाए गए प्रतिबंधों के बाद आईसीसी कर्मियों के सामने इस तरह की अड़चनें आ रही हैं। आईसीसी के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय वकीलों और मानवाधिकार अधिवक्ताओं के साथ साक्षात्कारों में ये बातें सामने आईं। हेग स्थित न्यायालय के अमेरिकी कर्मचारियों को कहा गया है कि अगर वे अमेरिका की यात्रा करते हैं तो उनकी गिरफ्तारी का खतरा है। कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने आईसीसी के साथ काम करना बंद कर दिया है। 'ह्यूमन राइट्स वॉच' की अंतरराष्ट्रीय न्याय निदेशक लिज ईवनसन ने कहा, ये प्रतिबंध पीड़ितों को न्याय पाने से रोकेंगे।

शहबाज शरीफ शांति के लिए भारत से बातचीत को तैयार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि वह शांति के लिए भारत के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कामरा एयर बेस के दौरे के दौरान यह टिप्पणी की। शहबाज ने हालांकि कहा कि शांति के लिए शर्तों में कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि भारत ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख हमेशा इसके अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और रहेंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक भीषण ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद संघर्ष को समाप्त करने के लिए बनी सहमति के बाद शहबाज शरीफ का किसी सैन्य ठिकाने पर वह दूसरी बार पहुंचे थे। शहबाज के साथ उप प्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू भी मौजूद थे। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की हत्या का बदला लेने के लिए 6 और 7 मई की मध्यरात्रि को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी स्थलों को निशाना बनाया, जिसमें 100 से अधिक आतंकी मारे गए। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारत के कई सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया, जिन्हें सैन्य बलों ने नाकाम कर दिया। इससे पहले शहबाज शरीफ बुधवार को सियालकोर्ट सैनिक अड्डे पर पाकिस्तान के जवानों से बात की थी।

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा- राष्ट्रपति ट्रंप शांतिदूत
भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने की इच्छा जताने को लेकर सुर्खियों में रहे राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छा पर अमेरिकी विदेश विभाग के उप-प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, अमेरिका युद्ध विराम देखकर खुश है। हम एक कदम पीछे हटकर दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत देखना और प्रोत्साहित करना चाहते हैं। राष्ट्रपति एक शांतिदूत हैं और हम शांति की प्रगति का जश्न मनाते हैं। हमें उम्मीद है कि युद्ध विराम बरकरार रहेगा।

फुटबॉल स्टेडियम के बाहर अनियंत्रित कार ने भीड़ को रौंदा

स्पेन में एक अनियंत्रित कार ने फुटबॉल स्टेडियम के बाहर मौजूद भीड़ को रौंद दिया। इस हादसे में 13 लोग घायल हुए हैं। यह हादसा बार्सिलोना में उस वक्त हुआ, जब स्पेनिश लीग टूर्नामेंट में बार्सिलोना का मुकाबला एस्पेनोल से हो रहा था। मैच शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही स्टेडियम के बाहर एक अनियंत्रित कार ने भीड़ को रौंद दिया। हादसे में घायल सात लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहीं बाकी लोगों का घटनास्थल पर ही इलाज किया गया। पुलिस ने कहा है कि यह जानबूझकर किया गया हमला नहीं था और कार चालक गाड़ी से नियंत्रण खो बैठा, जिससे यह हादसा हुआ।

ट्रंप के USAID के फंड में कटौती से जा रही बच्चों की जान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिनों USAID के फंड में कटौती करने का फैसला किया था। ट्रंप का यह फैसला दुनिया के कई बेहद गरीब इलाकों के बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। गरीब देशों के कई कुपोषित बच्चों को यूएसएड के फंड में कटौती से खाना नहीं मिल पा रहा है, जिससे कई बच्चों की मौत हो चुकी है। खासकर बेहद गरीब अफ्रीकी देशों में इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। ये देश जनकल्याणकारी कामों के लिए अमेरिकी मदद पर काफी निर्भर हैं। हालांकि इस साल ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी मदद में 90 प्रतिशत की कटौती कर दी है, जिससे अफ्रीकी देशों में हालात बिगड़ गए हैं। बच्चों के पोषण के लिए चल रहीं योजनाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। 

ब्रिटेन: पुराने सैन्य ठिकाने पर लगी आग में दो दमकलकर्मियों और एक नागरिक की मौत
ब्रिटेन के एक पुराने सैन्य ठिकाने पर लगी आग में दो दमकल कर्मियों और एक आम नागरिक की मौत हो गई। अब यह जगह हवाई जहाज और मोटर रेसिंग के इतिहास को दिखाने के लिए इस्तेमाल होती है। यह आग गुरुवार को ऑक्सफोर्ड के पास स्थित बाइस्टर में एक बड़े गोदाम में लगी, जो पहले रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) का ठिकाना हुआ करता था। आग से निकला धुआं कई किलोमीटर दूर से दिख रहा था और चश्मदीदों ने धमाकों की आवाजें भी सुनीं। ऑक्सफोर्डशायर काउंटी काउंसिल के मुताबिक, दो और दमकलकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। शुक्रवार सुबह तक आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन दमकलकर्मी अभी भी मौके पर मौजूद हैं।

लेबनान: संयुक्त राष्ट्र शांति बल को भीड़ ने घेरा, वाहनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
संयुक्त राष्ट्र शांति बल ने शुक्रवार को कहा कि लेबनान के मायजमेह और खिरबेत सेल्म गांवों के बीच उनकी एक गश्ती टीम को लोगों के एक समूह ने घेर लिया। ये लोग आम कपड़ों में थे और उन्होंने लोहे की छड़ों और कुल्हाड़ी जैसी चीजों से वाहनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। बल ने बताया कि शांति सैनिकों ने जवाब में हल्का बल प्रयोग किया और इसमें कोई घायल नहीं हुआ। 
 
लेबनान में हिजबुल्लाह समर्थक अकसर संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर इस्राइल से मिलीभगत का आरोप लगाते हैं। वहीं, इस्राइल आरोप लगाता है कि  शांति बल दक्षिण लेबनान में हिजबुल्ला की सैन्य गतिविधियों को नजरअंदाज करता है। इससे पहले इसी हफ्ते संयुक्त राष्ट्र शांति बल ने इस्राइली सेना के आक्रामक रवैये की शिकायत की थी।

आईसीसी के मुख्य अभियोजक करीम खान ने अस्थायी रूप से पद छोड़ने का लिया फैसला
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आसीसी) ने शुक्रवार को कहा कि मुख्य अभियोजक करीम खान ने यौन दुराचार के आरोपों की जांच पूरी होने तक अस्थायी रूप से पद छोड़ने का फैसला किया है। करीम खान ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला सहायक को एक साल से अधिक समय तक जबरदस्ती यौन संबंध के लिए मनाने की कोशिश की और उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ छेड़खानी की। महिला अधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
 
विज्ञापन

ट्रंप की विदेश नीति से असहमत होकर अमेरिकी राजदूत ने दिया था इस्तीफा
अमेरिका की पूर्व यूक्रेन राजदूत ब्रिजेट ब्रिंक ने खुलासा किया है कि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति से असहमति के चलते अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा दिया था। डेट्रॉइट फ्री प्रेस में प्रकाशित एक लेख में ब्रिंक ने पहली बार अपने इस्तीफे के कारणों को साझा किया। ब्रिंक ने मई 2022 से पिछले महीने तक यूक्रेन में राजदूत के रूप में कार्य किया। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर यूक्रेन के साथ दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, दुर्भाग्य से ट्रंप प्रशासन की नीति आक्रामक रूस के बजाय पीड़ित यूक्रेन पर दबाव बनाने की रही है।

ब्रिंक ने कहा कि उन्होंने अपना कर्तव्य समझते हुए इस्तीफा दिया। किसी भी कीमत पर शांति वास्तव में शांति नहीं है, यह तो आत्मसमर्पण है। ब्रिंक ने ट्रंप के पूर्ववर्ती जो बाइडन के प्रो-कीव प्रशासन के दौरान यूक्रेन के समर्थन में सार्वजनिक रुख अपनाया था। हालांकि, जनवरी 2025 में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके बयान अधिक तटस्थ हो गए थे। अप्रैल में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ब्रिंक की क्रिवी रिह शहर पर रूसी मिसाइल हमले पर कमजोर प्रतिक्रिया के लिए सार्वजनिक आलोचना की थी। हमले में 11 वयस्क और 9 बच्चे मारे गए थे। कुछ दिनों बाद विदेश विभाग ने ब्रिंक के इस्तीफे की घोषणा की। ब्रिंक ने अपने लेख में जोर देकर कहा कि वह कांग्रेस की ओर से निर्धारित जांच और संतुलन का सम्मान करती हैं, लेकिन ट्रंप की नीतियों के साथ सहमत नहीं हो सकीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें