संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन और बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) ने बुधवार को संस्था के प्रमुख स्वामी जी महाराज की जन्म शती मनाई गई। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और राजनयिकों ने स्वामी जी महाराज के संदेश 'दुनिया एक परिवार' के महत्व पर प्रकाश डाला।
संयुक्त राष्ट्र में अक्षर पुरुषोत्म संस्था के प्रमुख स्वामी महाराज के जीवन और संदेश विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यूएन के अधिकारियों और राजनयिकों ने कहा कि प्रमुख स्वामी जी महाराज दुनिया के सबसे महान आध्यात्मिक गुरुओं में से एक हैं। उनका जीवन, सेवा और करुणा के मूल्यों पर आधारित है। वक्ताओं ने समावेशी समाजों को विकसित करने के उद्देश्य से वैश्विक परियोजनाओं और सामाजिक-आर्थिक पहलों को प्रेरित किया।
यूएन में भारतीय राजदूत रुचिरा कंबोज ने कहा कि स्वामी जी का जीवन सच्चे अर्थों में मानवता को एक संदेश है। यह एकता का संदेश है, अच्छाई का जश्न मनाने का संदेश है, शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश है। वे भारत के सबसे महान आध्यात्मिक गुरुओं के रूप में सम्मानित हैं। कंबोज ने कहा कि स्वामी जी ने 'विश्व एक परिवार है' के सिद्धांत को जिया और दुनिया को सिखाया।
भगवान स्वामी नारायण के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी थे
प्रमुख स्वामी महाराज भगवान स्वामीनारायण के पांचवें आध्यात्मिक उत्तराधिकारी थे। वे 1950 में बीएपीएस के अध्यक्ष बने। 2016 में 94 वर्ष की आयु में उनका अवसान हो गया था।
जी-20 में भारत का ध्येय 'वसुधैव कुटुंबकम'
भारतीय राजदूत कंबोज ने कहा कि 'दुनिया को एक परिवार' मानने का यह स्थायी दर्शन बाहरी दुनिया के साथ भारत के निरंतर संपर्क और विचारों के आदान-प्रदान का मार्गदर्शन करता है। भारत 'जी 20' का अध्यक्ष बना है और उसका केंद्रीय विषय या थीम 'वसुधैव कुटुम्बकम' या 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य है।' उन्होंने कहा कि भारत वह देश है, जहां विविधता में एकता है।
कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव मिगुएल मोराटिनोस का संदेश पढ़ा गया। इसमें उन्होंने कहा कि प्रमुख स्वामी महाराज ने पृथ्वी की सभी जरूरतों और कठिनाइयों को समझने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।