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दुनिया में हर नौ में से एक व्यक्ति भूखा, कैसे पूरा होगा भुखमरी मुक्त दुनिया का सपना

Mon, 13 Jul 2020 09:46 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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पूरी दुनिया में इस समय नौ लोगों में से करीब एक व्यक्ति को भूखा रहना पड़ रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से इस साल यह स्थिति और बदतर हुई है। यह दावा सोमवार को सामने आई संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के चलते पूरी दुनिया में आई आर्थिक मंदी और पर्यावरण संबंधी घटनाओं ने और अधिक लोगों को भुखमरी की ओर ढकेला है। 

लोगों की पहुंच से बाहर पोषक आहार

पोषक आहार अभी भी महंगाई के चलते कई लोगों की पहुंच से बाहर है। इससे न केवल कुपोषण बढ़ रहा है बल्कि वयस्कों और बच्चों में मोटापे की समस्या भी बढ़ रही है। इस रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों ने तैयार किया है। इनमें दि फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ), इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट (आईएफएडी), यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेन्स फंड (यूनिसेफ), वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) शामिल हैं।  

बढ़ रही भुखमरी पीड़ितों की संख्या

रिपोर्ट में कहा गया है, 'दशकों की लंबी गिरावट के बाद, साल 2014 से भूख से पीड़ित लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।' इसमें यह भी कहा गया है कि केवल भोजन की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं है, भोजन का पोषक होना भी जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र ने इस अध्ययन में पाया कि करीब 69 करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हैं। यह संख्या पूरी दुनिया की आबादी की 8.9 फीसदी है। 

2030 तक 89 करोड़ लोग होंगे शिकार

एक साल के भीतर 2019 में इस संख्या में एक करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, पिछले पांच सालों की बात करें तो इस अवधि के दौरान यह संख्या छह करोड़ बढ़ी है। अध्ययन में कहा गया है कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो साल 2030 तक भुखमरी खत्म करने का लक्ष्य असंभव हो जाएगा। संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया है कि साल 2030 तक दुनियाभर में 89 करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हो सकते हैं। यह दुनियाभर की आबादी का 9.8 फीसदी होगा। 

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