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विश्व बैंक ने कहा: पाकिस्तान की गरीबी में 5.4 फीसदी का उछाल, लाखों गरीब बढ़े

Wed, 23 Jun 2021 01:18 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, इस्लामाबाद

सार

  • पाक में उच्च मध्यम आय के बीच गरीबी की दर वर्ष 2020-21 में 78.4 फीसद थी
  • वर्ष 2021-22 में इसके 78.3 फीसद होने का अनुमान 
  • पाकिस्तान में 40 फीसदी परिवार मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा से पीड़ित
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विस्तार
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आतंकियों की पनाहगाह पाकिस्तान में पिछले साल गरीबी 4.4 फीसदी से बढ़कर 5.4 फीसदी हो गई है। यह अनुमान है विश्व बैंक का जिसने बताया कि पाक में 20 लाख लोग गरीबी के रेखा के नीचे पहुंच गए हैं। निम्न मध्यम आय गरीबी दर के हिसाब से विश्व बैंक के मुताबिक, पाकिस्तान में गरीबी अनुपात 2020-21 में 39.3 फीसदी था जबकि 2021-22 में यह 39.2 फीसदी पर रहने का अनुमान है।

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40 फीसदी लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से पीड़ित
पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक वित्तीय संस्था के अनुमान के मुताबिक पाक में उच्च मध्यम आय के बीच गरीबी की दर जहां वर्ष 2020-21 में 78.4 फीसद थी वहीं वर्ष 2021-22 में इसके 78.3 फीसद होने का अनुमान है।

इसी तरह से वर्ष 2022-23 के लिए इसके 77.5 फीसद होने का अनुमान लगाया गया है। विश्व बैंक का अनुमान है कि पाकिस्तान में 40 फीसदी परिवार मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं। यानी देश के 40 फीसदी लोगों के पास खाने के लाले पड़े हैं।
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हालांकि इस दौरान देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है और इसकी वजह से 2020 की पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह देश में ठप हो गईं और करीब आधी आबादी को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इसका सबसे अधिक असर अकुशल श्रमिकों पर पड़ा है।

दो दशक में धीमी रही अर्थव्यवस्था

पाक अर्थव्यवस्था बीते दो दशक से काफी धीमी पड़ी है। यहां औसत प्रति व्यक्ति आय में 2 फीसदी की दर से तेजी आई है। विश्व बैंक के मुताबिक इसकी कई वजहें हैं। इस दौरान कृषि क्षेत्र में काम करने वालों पर इसकी मार देखी गई। यहां गरीबी की दर काफी अधिक रही है। देश का चालू खाता घाटा इस बात की तस्दीक कर रहा है जिसमें मौजूदा वर्ष में इसमें एक फीसद से भी कम की दर से तेजी का अनुमान लगाया गया है।

आलोचना का शिकार हुईं वैश्विक सम्मान पाने वाली गुलालई इस्माइल
पख्तून तहफुज आंदोलन की नेता और महिला अधिकार कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल मानवाधिकारों के लिए पुरस्कार मिलने के बाद से पाकिस्तान में कड़ी आलोचनाओं के घेरे में आ गई हैं। यह सम्मान जिनेवा में मानवाधिकार और लोकतंत्र संस्था ने पाकिस्तान में महिलाओं को सशक्त करने और उन्हें कारावास व यातना से बचाने के लिए दिया गया था।

इसकी प्रतिक्रिया पाकिस्तान में बहुत अच्छी नहीं देखी गई। सोशल मीडिया पर इस पुरस्कार को लेकर कई कार्यकर्ताओं और संगठनों ने गुलालई की खिंचाई की है। बता दें कि उन्होंने सेना के खिलाफ अपनी बात रखी और कहा कि पाक आर्मी ने आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान युवक-युवतियों से दुष्कर्म किया था। 

पीओके में डॉ. अब्बास की हत्या की निंदा

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने पाक अधिकृत कोटली जिले में एक प्रमुख राष्ट्रवादी राजनीतिक व अंतरधार्मिक कार्यकर्ता डॉ. गुलाम अब्बास की हत्या की कड़ी निंदा की है। यूके पीएनपी ने पाक सरकार पर उन लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया जो जम्मू-कश्मीर राज्य की एकता की बहाली के लिए लड़ रहे हैं।

पार्टी ने अब्बास के हत्यारों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। संस्था ने पाकिस्तान और पीओके तथा गिलगित-बाल्टिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गहरी जिंता जताई व संयुक्त राष्ट्र से इस मामले की जांच के लिए मिशन भेजने की मांग की।

गिलगित-बाल्टिस्तान में पाक विरोधी प्रदर्शन
पाकिस्तानी वायुसेना के खिलाफ गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्कार्दू में स्थानीय लोगों और संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। लोग पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा स्कार्दू हवाईअड्डे के विस्तार के लिए जबरन जमीन अधिगृहीत करने और मुआवजा नहीं देने से गुस्से में हैं। स्थानीय नागरिक अधिगृहीत जमीन के बदले प्रति कनाल (भूमि का पैमाना) 2.5 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं, जबकि वायुसेना ने इससे इनकार कर दिया है। 
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पाक में खतरनाक है अहमदी होना

पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के तहत अल्पसंख्यकों की हालत काफी खराब है। एशिया में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पूर्व अमेरिकी सलाहकार नॉक्स टेम्स ने कहा कि पाक में अहमदी होना बेहद खतरनाक हो गया है।

यूएन इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के विशेषज्ञ टेम्स ने पीस फॉर एशिया के साथ एक पॉडकास्ट में कहा, 1947 बंटवारे में भारत से पाक गए अहमदी खुद को मुस्लिम मानते हैं जबकि पाक में उन्हें मुसलमान ही नहीं समझा जाता है। यही कारण है कि अहमदी समुदाय पर ईशनिंदा को लेकर कई हमले बढ़ गए हैं और उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जाता है।
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