आर्थिक बदहाली से गुजर रहे पाकिस्तान को लेकर विश्व बैंक ने बड़े स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा किया है। विश्व बैंक ने वितरण कंपनियों (डिस्कॉस) व नेशनल ट्रांसमिशन एंड डिस्पेच कंपनी (एनटीडीसी) द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं के अनुबंध हासिल करने के लिए भ्रष्ट, धोखाधड़ी और मिलीभगत करने वाली 23 पाकिस्तानी कंपनियों के रैकेट का खुलासा किया है।
विश्व बैंक समूह (डब्ल्यूबीजी) की इंटीग्रिटी वाइस प्रेसीडेंसी (आईएनटी) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों ने आपसी फायदे के लिए खुद को कार्टेल में संगठित किया था।
विश्व बैंक पुनर्निर्माण एवं विकास संबंधी अंतरराष्ट्रीय बैंक (आईबीआरडी) ने बिजली वितरण और ट्रांसमिशन सुधार परियोजना के हिस्से के रूप में जुलाई 2008 में पाकिस्तान सरकार के साथ एक ऋण समझौता किया।
इसका मकसद कुछ वितरण कंपनियों की संस्थागत क्षमता को मजबूत करते हुए और बिजली क्षेत्र में सुधार के अन्य प्राथमिक सेक्टरों को समर्थन करना था। ताकि चयनित सेक्टरों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वितरण व ट्रांसमिशन नेटवर्क क्षमता मजबूत की जा सके। परियोजना के वित्त पोषण को दो अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) क्रेडिट द्वारा पूरा किया गया और फरवरी 2014 में इसे बंद कर दिया गया।
सिर्फ कुछ पसंदीदा कंपनियों से किया अनुबंध
इन कंपनियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए बाजार में हेरफेर किया और सिर्फ कुछ पसंदीदा कंपनियों के साथ ही अनुबंध कर लिया। इनमें विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित कंपनी भी शामिल हैं। पाकिस्तान में वित्तीय घोटाले आम बात हैं। एक कमजोर ढांचा, विकृत न्याय प्रणाली और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की मिलीभगत से यहां कई संस्थाओं को सरकारी खजाना लूटने के लिए बढ़ावा दिया जाता है।