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अलास्का में पिघलेगी बर्फ? अमेरिका और चीन के बीच उच्च स्तरीय वार्ता गुरुवार से, नतीजे पर रहेगी नजर

Tue, 16 Mar 2021 08:58 PM IST
सुरेंद्र जोशी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बीजिंग
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यूएस और चीन का झंडा - फोटो : पीटीआई
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अमेरिकी राज्य अलास्का में गुरुवार और शुक्रवार को अमेरिका और चीन के बीच होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता को लेकर दोनों देशों में सावधानी भरा रुख है। इस बात को सकारात्मक माना जा रहा है कि पिछले साल से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और आपसी संपर्क पूरी तरह भंग होने के बाद अब कम से कम बातचीत शुरू तो हो रही है। हालांकि अमेरिका में मौजूद चीन विरोधी भावनाओं के कारण इससे ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। दोनों देशों के मीडिया पर गौर करें, तो वहां सबसे अहम सवाल इस वक्त यही है कि अलास्का में बर्फ कितनी पिघलेगी?  

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जापान व दक्षिण कोरिया की राय ले रहे अमेरिकी विदेश मंत्री
इस बैठक से ठीक से पहले अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा पर हैं। विदेश मंत्री के तौर पर यह उनकी पहली यात्रा है। समझा गया है कि इस दौरान उनका मकसद चीन से बातचीत शुरू करने से पहले अमेरिका के दोनों परंपरागत सहयोगी देशों को भरोसे में लेना है।

चीन पर शिकंजे के लिए सीनेट में आ रहा बिल
इसी बीच खबर आई है कि अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शुमर एक बिल पेश करने जा रहे हैं, जिसका मकसद चीन पर शिकंजा और कसना है। अमेरिकी मीडिया में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बिल पर दोनों पार्टियों में सहमति बनने की संभावना है, जिससे इसका पारित हो जाना आसान हो जाएगा। अब तक सामने आई जानकारियों के मुताबिक बिल में मैनुफैक्चरिंग, 5-जी टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर्स और सप्लाई चेन से संबंधित प्रावधान होंगे। फिलहाल इस बिल पर सीनेट की संबंधित समिति में चर्चा चल रही है। इससे पहले इससे मिलता- जुलता एक बिल विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर मार्कौ रुबियो ने पेश किया था। खबर है कि सीनेट की समिति में इन दोनों बिलों को मिला कर एक साझा मसविदा तैयार करने की कोशिश चल रही है।
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चीन को लेकर एकराय हो सकते हैं दोनों दल

द वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक शुमर की कोशिश इस बिल को अप्रैल तक पारित करवा लेने की है। विश्लेषकों का कहना है कि दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच तीखे मतभेद के बावजूद चीन से संबंधित बिल एक ऐसा मसला हो सकता है, जहां दोनों दल सहयोग करें। वेबसाइट एक्सियोस.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि चीन के मामले में दोनों पार्टियों के बीच इस समय अधिक से अधिक सख्त रुख अपनाने की होड़ है।
इसी वजह से चीन में अलास्का बैठक को लेकर कुछ कहने में बेहद सावधानी बरती जा रही है। ब्लिंकेन की जापान और कोरिया का जिक्र करते हुए चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक ताजा टिप्पणी में लिखा है कि ब्लिंकेन ने इस दौरान विरोध भाव से भरपूर संकेत भेजे। इस यात्रा के दौरान ब्लिंकेन ने इस बात की जरूरत बताई है कि अमेरिका चीन के प्रभाव रोकने का विश्वसनीय उपाय करे। 

...तो नरम रुख अपना सकता है अमेरिका
ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि अमेरिका फिलहाल यह देखना चाहता है कि उसके सहयोगी देश चीन के प्रभाव को नियंत्रित रखने में कितनी भूमिका निभा सकते हैं। चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि अगर ‘अमेरिका के सहयोगी देश इस बात के लिए तैयार नहीं हुए कि अमेरिका उनका इस्तेमाल करे या उन्होंने चीन को ज्यादा नाराज करने में अनिच्छा जताई, तो अलास्का बैठक में अमेरिका नरम रुख के साथ बात करेगा।’ ब्लिंकेन के साथ-साथ अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन भी अभी एशिया की यात्रा पर हैं।
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अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बताया चीन से खतरा

अलास्का में ब्लिंकेन के अलावा ह्वाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान भी बातचीत में शामिल होंगे। एशिया यात्रा शुरू होने से पहले ऑस्टिन ने कहा था- चीन हमारे लिए एक बढ़ रहा खतरा है। हमारा मकसद इसे सुनिश्चित करना है कि चीन या कोई भी दूसरा जो हमारा मुकाबला करना चाहे, उसे विश्वसनीय ढंग से रोकने के लिए हमारे पास क्षमता, कार्रवाई योजना और समझ हो। 

चीन ने कहा-कोई खतरा नहीं, दुनिया के लिए अवसर
इस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि चीन के विकास से दुनिया में शांति की शक्तियां बढ़ेंगी। यह दुनिया के लिए एक अवसर है, कोई खतरा नहीं। उन्होंने कहा कि चीन ने हमेशा ही संयुक्त राष्ट्र के साथ मिल कर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा की है। वह ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से सहमत नहीं है, जिसका मकसद किसी देश की दादागीरी को बचाना हो।

ऐसे ही सख्त तेवरों के कारण अलास्का बैठक से पहले ज्यादा उम्मीदें नहीं जोड़ी जा रही हैं। बल्कि आशंकाओं और सतर्कता के साथ उसके नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।
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