पाकिस्तान सरकार के सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यह राय और मजबूत हुई है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी गुटों को पनाह दे रही है। उसके संरक्षण की वजह से ही ये गुट पाकिस्तान के अंदर घातक हमले करने में कामयाब हुए हैं। यहां ऐसे जिन गुटों की पहचान की गई है, उनमें सबसे प्रमुख तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान है, जिसे पाकिस्तानी तालिबान के नाम से भी जाना जाता है। इसी गुट के ठिकानों पर हमला करने के लिए पाकिस्तानी वायु सेना ने सीमा पार कर अफगानिस्तान के इलाके में हमले किए थे। उससे दोनों देशों के बीच संबंध और बिगड़ गए।
अब खबर है कि पाकिस्तान की नई शाहबाज शरीफ सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अफगान तालिबान की वकालत रोक देने का मन बना लिया है। ऐसी भी चर्चा है कि पाकिस्तान सरकार अफगानिस्तान में तालिबान विरोधी गुटों को मदद देने की नीति अपना सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हाल में ऐसी कई खबरें छपी हैं, जिनके मुताबिक टीटीपी सहित पाकिस्तान विरोधी अन्य गुटों को अफगान तालिबान ने अपने यहां गतिविधियां चलाने की पूरी छूट दे रखी है। टीटीपी के संबंध अल-कायदा भी बताए जाते हैं। टीटीपी और अल-कायदा दोनों का लक्ष्य पाकिस्तान की मौजूदा शासन प्रणाली को उखाड़ फेंकना है, ताकि वहां इस्लामी अमीरात (राज) की स्थापना की जा सके। अफगानिस्तान में तालिबान इस्लामी शासन कायम कर चुका है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक खबर के मुताबिक अफगानिस्तान में टीटीपी और ऐसे दूसरे गुटों की सक्रियता के बारे में लगातार मिल रही खबरों के कारण ही पाकिस्तान सरकार ने इन गुटों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया है। साथ ही उसने इन गुटों से जुड़े लोगों को पाकिस्तान से खदेड़ने का निर्णय भी लिया है। अफगान तालिबान और पाकिस्तान के बीच दोनों देशों की आपसी सीमा तय को लेकर विवाद पहले से जारी है। सीमा पर बाड़ खड़ी करने के मुद्दे पर कुछ महीने पहले सीमा पर झड़प तक हो चुकी है।
मास्को स्थित विश्लेषक एंड्र्यू कोरिब्को ने एशिया टाइम्स से कहा कि अफगान तालिबान के प्रति गर्मजोशी भरे पाकिस्तान के नजरिए में अब साफ बदलाव दिख रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका के खिलाफ लड़ाई में परोक्ष रूप से तालिबान की मदद की थी। काबुल पर तालिबान के कब्जे को पाकिस्तान की रणनीतिक जीत के रूप में देखा गया था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
कोरिब्को ने कहा- ‘पाकिस्तान के लिए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए अब तालिबान के प्रति उसके रुख में बारीक बदलाव दिख रहा है। यह भी संभव है कि वह कुछ तालिबान विरोधी गुटों की मदद कर रहा हो।’
अमेरिकी थिंक टैंक यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में एशिया सेंटर से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञ अफयंदर मीर ने हाल में अमेरिकी नीति निर्माताओं के लिए एक टिप्पणी लिखी है। उसमें उन्होंने सलाह दी है कि अब अमेरिका को तालिबान पर दबाव बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए। मीर ऩे लिखा है कि टीटीपी ने अब उन इलाकों में अपना मजबूत आधार बना लिया है, जहां अमेरिका से लड़ाई के दौरान तालिबान के खास अड्डे थे। टीटीपी वहां से ही पाकिस्तान में हमलों को संचालित कर रहा है।