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Explained: क्या कतर पर हमले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएगा इस्राइल, भारत-US के रुख से मिले संकेत?

Fri, 12 Sep 2025 03:06 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत और अमेरिका ने इस्राइल की ओर से कतर किए गए हमलों पर की निंदा की है। ऐसे में यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या कतर पर हमला करने के बाद इस्राइल वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएगा? आइए समझते हैं कि आगे क्या होने वाला है?
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इस्राइल, भारत और अमेरिका। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस्राइल ने कतर पर हमास नेताओं को निशाना बनाकर हमले करके पश्चिम एशिया में शांति के प्रयासों को झटका दे दिया। वहीं भारत और अमेरिका ने इस्राइल की ओर से कतर किए गए हमलों पर दुख जताया। साथ ही इस्राइली के कदम की निंदा की है। पीएम मोदी ने कतर के अमीर शेख से बात की और हमलों पर चिंता जाहिर की। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हमले को बुरा कदम बताया। भारत और अमेरिका से रुख ने संकेत दिए हैं कि इस्राइल की कार्रवाई सही नहीं थी। ऐसे में यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या कतर पर हमला करने के बाद इस्राइल वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएगा? आइए समझते हैं कि आगे क्या होने वाला है?
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
पहले जानिए इस्राइल ने क्या किया?
इस्राइली वायुसेना ने मंगलवार को हमास के नेताओं को निशाना बनाने के लिए कतर की राजधानी दोहा में बड़ा हमला किया था। इसमें हमास के नेताओं की मौत हो गई थी। हमास ने कहा कि उसके शीर्ष नेता हमले में बच गए, लेकिन पांच निचले स्तर के सदस्य मारे गए। इसमें गाजा में हमास के नेता और उसके शीर्ष वार्ताकार खलील अल-हय्या का बेटा, तीन अंगरक्षक और अल-हय्या के कार्यालय का प्रमुख शामिल है। कतर पर हुए हमले की मध्य पूर्व और उसके बाहर कई देशों ने व्यापक निंदा की। 

पीएम मोदी - फोटो : ANI
हमले के बाद पीएम मोदी ने क्या कहा?
इस्राइल के हमलों के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कतर से अमीर शेख तमिम बिन हमाद अल थानी से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने हमलों पर गहरी चिंता जाहिर की। पीएम मोदी ने थानी से कहा कि भारत कतर की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करता है। इसका मतलब साफ है कि अन्याय दोस्त भी करते तो भी बर्दाश्त नहीं। भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से मुद्दों के समाधान का समर्थन करता है और किसी भी प्रकार की हिंसा और तनाव बढ़ाने से बचने की अपील करता है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए दृढ़ता से खड़ा है और आतंकवाद के सभी रूपों और प्रयासों के खिलाफ संघर्ष करता रहेगा। भारत इस संकट में कतर के साथ है।

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका - फोटो : वीडियो ग्रैब/एएनआई
ट्रंप ने क्या कहा?
इस्राइल के हमलों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुख जताया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें कतर की राजधानी दोहा में इस्राइली हवाई हमले के बारे में जानकर 'बहुत बुरा लगा। वे हमास का सफाया करने के लक्ष्य का समर्थन करते हैं। कतर एक संप्रभु देश है और अमेरिका का करीबी सहयोगी भी है, जो हमारे साथ मिलकर शांति स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत और जोखिम उठा रहा है। ऐसे में कतर की जमीन पर बमबारी अमेरिका या इस्राइल के लक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाती। हालांकि, हमास का सफाया करना, जिसने गाजा के लोगों की तकलीफों से लाभ उठाया है, एक सार्थक लक्ष्य है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि गाजा में सभी बंधकों और मृतकों के शवों को तुरंत छोड़ा जाए और यह युद्ध अभी खत्म हो। ट्रंप ने कतर को आश्वासन दिया कि उनकी धरती पर ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।

इस्राइल का हमला (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
इस्राइली हमलों पर भारत और अमेरिका के रुख को लेकर वैश्विक मामलों के विशेषज्ञों ने अपनी राय साझा की। रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट और सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के वरिष्ठ फेलो एचए हेलियर ने कहा कि कोई यह मान सकता है कि इन हमलों का मतलब यह होगा कि इस्राइल के सहयोगी जो अपनी आलोचना में काफी सतर्क रहे हैं अपनी दिशा बदल देंगे, लेकिन इसकी विशेष संभावना नहीं है। बेरूत के सेंट जोसेफ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर करीम एमिल बितार ने कहा कि वैश्विक जनमत काफी तेजी से बदल रहा है। कतर पर हमले से अन्यत्र की बजाय खाड़ी में इस्राइल के प्रति रुख सख्त होने की संभावना है।

किंग्स कॉलेज लंदन में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लेक्चरर रॉब गीस्ट पिनफोल्ड ने कहा कि इस्राइल ने एक के बाद एक लाल रेखाएं पार की हैं और कुछ नहीं हुआ है। एकमात्र व्यक्ति जो इस्राइल को रोक सकता है, वह हैं डोनाल्ड ट्रंप। अमेरिका इस्राइल को अरबों डॉलर की सहायता प्रदान करता है, साथ ही उसे हथियार भी प्रदान करता है। साथ ही वह कतर का भी सहयोगी है। 
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डोनाल्ड ट्रंप, बेंजामिन नेतन्याहू और पीएम मोदी - फोटो : Amar Ujala
इस्राइल के प्रति भारत-अमेरिका के रुख के मायने
इस्राइली हमलों के प्रति भारत के रुख से साफ है कि भारत ऐसे हमलों को स्वीकार नहीं करता है। भारत इस्राइल का प्रमुख सहयोगी है। ऐसे में उस पर दबाव बढ़ेगा। उधर, गाजा में युद्ध विराम को लेकर अमेरिका लगातार पहल कर रहा है। इस्राइली हमलों को लेकर ट्रंप के रुख से साफ है कि इस्राइल पर दबाव बढ़ेगा।

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