फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Netanyahu warns Iran: क्या ईरान पर फिर हमला करेगा इस्राइल? नेतन्याहू बोले- जरूरत पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे

Wed, 01 Jul 2026 10:36 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिका और ईरान जहां शांति समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, वहीं नेतन्याहू ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे एक बार फिर से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है। एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया है कि अगर ईरान ने अपने परमाण प्रोग्राम को बंद नहीं किया तो इस्राइल फिर से तेहरान पर हमला करेगा।  
विज्ञापन
बेंजामिन नेतन्याहू, इस्राइली प्रधानमंत्री - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि यदि देश की सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो इस्राइल ईरान पर एक और सैन्य हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के शुरुआती फ्रेमवर्क को व्यापक शांति समझौते में बदलने की कोशिशें जारी हैं। नेतन्याहू की चेतावनी ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपने रुख में कोई नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है।

विज्ञापन


'ईरान में हमने खुद को एटमी खतरे से बचाया'
तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, इस्राइल के चैनल 14 को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ पहले किए गए सैन्य अभियानों ने इस्राइल को संभावित परमाणु खतरे से बचाया। उन्होंने कहा, 'ईरान से हमने खुद को एटमी बमों से बचाया और अगर जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भी ऐसा करेंगे।' उन्होंने दोहराया कि इस्राइल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करेगा।

नेतन्याहू के बयान से बढ़ेगी अमेरिका-ईरान की चिंता?
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत चल रही है। कतर की मध्यस्थता में हो रही इस वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच दुश्मनी कम करना, प्रतिबंधों में राहत देना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भरोसेमंद व्यवस्था बनाना और मध्य पूर्व में स्थिरता लाना है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित ड्राफ्ट समझौते में सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य रूप से खोलने, प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए एक तंत्र विकसित करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। ईरान ने एक बार फिर कहा है कि उसका उद्देश्य परमाणु हथियार विकसित करना नहीं है, हालांकि इस मुद्दे पर तकनीकी स्तर की बातचीत अभी जारी है।
विज्ञापन


'इस्राइल समझौते से बंधा नहीं'
इंटरव्यू में इस्राइल ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई समझौता उसकी सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं करता और ईरान की सैन्य या परमाणु क्षमताएं बरकरार रहती हैं, तो वह खुद को उस समझौते से बंधा हुआ नहीं मानेगा। इससे संकेत मिलता है कि इस्राइल भविष्य में भी एकतरफा सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखना चाहता है।

ट्रंप ने किस चीज की दी सलाह?
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से क्षेत्र में तनाव बढ़ाने से बचने की अपील की है।  एक्सियोस से बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने नेतन्याहू से कहा, 'बिबी, तुम्हें सावधान रहना होगा, वरना बहुत जल्द तुम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेले पड़ सकते हो।' ट्रंप का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्ष रोकने के लिए कूटनीति सबसे बेहतर रास्ता है और इस्राइल को ऐसे कदमों से बचना चाहिए, जिनसे तेहरान के साथ अंतिम समझौता प्रभावित हो।

ये भी पढ़ें: ट्रंप की नई सियासी चाल: चुनाव से चार माह पहले डलास में बड़े जलसे का एलान, क्या है रिपब्लिकन खेमे की रणनीति?
विज्ञापन


अब इस्राइल पर किस ने दागी मिसाइलें?
इस बीच क्षेत्र में सैन्य तनाव भी जारी है। बेरूत में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर इस्राइली हमलों के बाद ईरान ने इस्राइल पर मिसाइलें दागीं, जिसके जवाब में इस्राइल ने ईरान के भीतर कई ठिकानों पर कार्रवाई की। अमेरिका ने सीधे तौर पर इन हमलों में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन इस्राइल की हवाई रक्षा प्रणाली को सहयोग दिया। मंगलवार को नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान के इस्राइली नियंत्रण वाले इलाकों का दौरा भी किया। उन्होंने कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह हथियारबंद है और इस्राइल के लिए खतरा बना हुआ है, तब तक इस्राइल सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी।
 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें