यहां पिछले हफ्ते ईरान, पाकिस्तान और चीन के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक के संभावित परिणामों को लेकर कूटनीतिक हलकों में कई तरह कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि तीनों देशों ने जिन योजनाओं पर विचार-विमर्श किया है, अगर वे आगे बढ़ीं, तो इन देशों का भारत के साथ नया टकराव खड़ा हो सकता है। बताया जाता है कि चीन, पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान के बीच एक शांति समझौता करवाने की कोशिश में है, ताकि वह अपनी बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) परियोजना का काम इस क्षेत्र में आगे बढ़ा सके।
पिछले महीने अफगानिस्तान और ईरान की सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच गोलीबारी हुई थी। इस बीच अफगानिस्तान में शासन कर रहे तालिबान के पाकिस्तान के साथ भी संबंधों में तनाव बढ़ा है। इससे चीन चिंतित है। इस्लामाबाद में हुई बैठक को त्रिपक्षीय सुरक्षा संवाद कहा गया। पाकिस्तान के अधिकारियों ने दावा किया है कि इस संवाद का मकसद सुरक्षा संबंधी स्थानीय मुद्दों को हल करना है। इसका मकसद अफगानिस्तान के मामले में कोई निगरानी दल बनाना नहीं है। पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि अब शुरू हुई वार्ता का परिणाम चीन, ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार का सिस्टम बनने के रूप में सामने आएगा।
लेकिन मास्को स्थित भू-राजनीति विशेषज्ञ आंद्रेव कोर्यबको ने आगाह किया है कि इन चारों देशों की सहमति भारत से उनके रिश्तों में नया पेंच डाल सकती है। उन्होंने कहा है कि चीन और ईरान आपस में एक व्यापार मार्ग बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। यह मार्ग पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से गुजरेगा। उस इलाके पर भारत का दावा है, जो इस मार्ग को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानेगा। चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहा चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कोरिडोर (सीपीईसी) पहले ही पीओके से गुजर रहा है। यह मुद्दा भारत और चीन के संबंधों में तनाव की एक वजह रहा है।
इस बीच पाकिस्तान सरकार के एक सूत्र ने बताया कि त्रिपक्षीय वार्ता में शामिल तीनों देशों ने अफगानिस्तान सरकार से अपने कूटनीतिक संबंध बढ़ाने का फैसला किया है। उनका मकसद अफगानिस्तान से उठ रही सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करना है। समझा जाता है कि चीन अफगानिस्तान को भी बीआरआई में शामिल करना चाहता है। इसके लिए तालिबान की सहमति पाने की दिशा में उसे कुछ कामयाबी भी मिली है।
कोर्यबको ने वेबसाइट द क्रैडल.को से कहा- ‘पिछले महीने ईरान और पाकिस्तान के रिश्तों में नाटकीय सुधार आया, जब दोनों देशों के नेताओं ने साझा तौर पर मांद-पिशिन बॉर्डर मार्केट का उद्घाटन किया और कुछ परियोजनाओं पर साझा अमल का इरादा जताया। इसके पहले चीन की मध्यस्थता में ईरान और सऊदी अरब के बीच मेलमिलाप हो चुका था। सऊदी अरब के ईरान से रिश्ता सुधार लेने के बाद ईरान के मामले में पाकिस्तान की दुविधा दूर हो गई। पाकिस्तान सऊदी अरब को नाराज कर ईरान से दोस्ती करने की दिशा में शायद कदम नहीं बढ़ाता।’
हाल के वर्षों में ईरान से चीन के संबंध प्रगाढ़ हुए हैं। 2021 में चीन ने उसके साथ 25 वर्ष का एक करार किया, जिसके तहत वह ईरान में 400 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा। पाकिस्तान के साथ चीन के पहले से गहरे संबंध हैं।