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'साउथ पार्स पर अब और हमले नहीं': नेतन्याहू ने मान ली ट्रंप की बात, अब तेल-गैस के ठिकाने नहीं बनेंगे निशाना?

Fri, 20 Mar 2026 06:50 AM IST
Shubham Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव

सार

पश्चिम एशिया में ईरान-इस्राइल संघर्ष ने ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था हिला दी है। ईरान के मिसाइल हमलों से कतर, सऊदी अरब और कुवैत के तेल-गैस प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा। बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच, इस्राइली पीएम नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका के अनुरोध पर साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर और हमले नहीं होंगे। आइए जानते हैं उन्होंने ऐसा क्यों कहा?

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बेंजमिन नेतन्याहू, इस्राइली प्रधानमंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव ने ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। गुरुवार को ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस के प्रतिष्ठानों पर मिसाइल हमले तेज कर दिए। यह हमले इस्राइल के दक्षिणी गैस क्षेत्र साउथ पार्स पर हमला करने के जवाब में किए गए। इन हमलों के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं और क्षेत्र के अरब देशों को सीधे संघर्ष में शामिल होने का खतरा पैदा हो गया है। ईरान की कार्रवाई के कारण कतर, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचा है।

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इतना ही नहीं कतर के रास लफ्फान एलएनजी संयंत्र को भारी क्षति हुई है, जिससे यूरोप और एशिया के लिए गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी तरह, सऊदी अरब के यानबू पोर्ट में SAMREF रिफाइनरी और कुवैत के तेल रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया गया। ऐसे में अब इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा बयान सामने आया है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा?

क्या कहा इस्राइली पीएम ने?
हमलों के बाद बढ़ते ऊर्जा संकट और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद इस्राइली पीएम ने साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमले को लेकर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सलाह पर साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर और हमले नहीं होंगे। इतना ही नहीं नेतन्याहू ने अपने बयान में ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल के 20 दिन के हवाई हमलों के बाद ईरान के पास अब यूरेनियम समृद्ध करने या बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता नहीं बची है।
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अब ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता। उन्होंने दावा किया कि ईरान का मिसाइल और ड्रोन भंडार भारी नुकसान झेल रहा है और जल्द ही पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। इसके साथ ही नेतन्याहू ने कहा कि हम जीत रहे हैं और ईरान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। हम अब उन फैक्ट्रियों को नष्ट कर रहे हैं जो इन मिसाइलों और परमाणु हथियारों के घटक तैयार करती हैं। हालांकि, नेतन्याहू ने अपने इन बयानों और दावों को लेकर किसी भी प्रकार के कोई सबूत सबूत नहीं पेश किया।

डोनाल्ड ट्रंप ने दी थी सलाह
बता दें कि नेतन्याहू का बयान उस समय आया जब इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप से प्रेस वार्ता में पूछा गया कि क्या उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से तेल और गैस क्षेत्रों पर हमले को लेकर बात की, तो ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसा न करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तालमेल है। लेकिन इस्राइल कभी-कभी अपने फैसले खुद लेता है और अगर उन्हें कुछ पसंद नहीं आता तो वह उसे रोकते हैं।

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ब्रेंट क्रूड का भाव 119 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा

इस युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड का भाव 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमत भी लगभग दोगुनी हो गई है। इसके अलावा, ईरान ने खाड़ी में नौसेना और ड्रोन हमलों को भी तेज किया है। ईरान के हमले से इस्राइल में लाखों लोग सुरक्षा आश्रयों में चले गए। अमेरिकी सेना ने ईरानी इलाके में गहरी हवाई कार्रवाई की, ड्रोन और नावों पर हमले किए और भूमिगत हथियार भंडार पर 5,000 पाउंड के बम गिराए।

गौरतलब है कि इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को संकट में डाल दिया है, क्योंकि खाड़ी की महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए विश्व के तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। युद्ध की बढ़ती लागत के कारण अमेरिकी पेंटागन ने व्हाइट हाउस से 200 अरब डॉलर अतिरिक्त फंड की मांग की है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि उसने यह हमला इस्राइल के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमले के जवाब में किया, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र है और कतर के साथ साझा है। इस क्षेत्र पर हमला ईरान की बिजली आपूर्ति के लिए भी खतरा पैदा करता है, क्योंकि देश की लगभग 80% बिजली प्राकृतिक गैस से उत्पन्न होती है।

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