सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक ने हमारी जिंदगी को आसान और तेज बनाया है। लेकिन इस तकनीक की दुनिया के बड़े नाम अपने बच्चों के मामले में इसके इस्तेमाल को सीमित रखने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों ने डिजिटल दुनिया को इतना बड़ा बनाया, वे अपने बच्चों को इससे क्यों दूर रखना चाहते हैं? क्या सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित कर रहा है? विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े क्या कहते हैं? दुनिया के कई देश बच्चों के लिए सोशल मीडिया की उम्र सीमा तय करने की ओर क्यों बढ़ रहे हैं? इन प्लेटफॉर्मस पर कब-कब ऐसे मामले देखने को मिले हैं? भारत इस दिशा में क्या कर रहा है?
मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि वह नहीं चाहते कि उनके बच्चे लंबे समय तक टीवी या कंप्यूटर के सामने बैठे रहें। उनके अनुसार लोगों के साथ बातचीत करना अच्छी बात है, लेकिन लगातार एक वीडियो से दूसरे वीडियो पर जाना उतना सकारात्मक नहीं है।
फेसबुक के शुरुआती निवेशक पीटर थील ने 2024 में बताया था कि उनके साढ़े तीन और पांच साल के बच्चों का स्क्रीन समय सप्ताह में केवल डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट था।