विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया को एक हकीकत से वाकिफ रहने के लिए कहा है। संगठन का कहना है कि विश्व अभी कहीं भी कोरोना वायरस के खिलाफ सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्यूनिटी) उत्पन्न होने जैसी स्थिति में नहीं है। उसका यह भी कहना है कि हमें इस महामारी से लड़ने के लिए अभी भी एक प्रभावी टीके की जरूरत है।
संगठन का कहना है कि सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्यूनिटी) विशेष तौर पर टीका लगाए जाने से हासिल की जाती है। इस संबंध में अधिकतर वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए क्षेत्र विशेष में रहने वाली कम से कम 70 प्रतिशत आबादी में घातक विषाणु को हराने के लिए एंटीबॉडीज होनी चाहिए।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि आधी आबादी में भी कोरोना वायरस से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता या हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाए तो इससे कम से कम एक रक्षात्मक प्रभाव तो उत्पन्न हो ही सकता है।
डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन मामलों के प्रमुख डॉक्टर माइकल रेयान ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इस सिद्धांत को खारिज करते हुए कहा कि हमें सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता हासिल करने की उम्मीद में बैठे नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैश्विक आबादी के रूप में देखें तो अभी हम उस स्थिति के आसपास भी नहीं पहुंचे हैं जो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह कोई समाधान नहीं है और न ही यह ऐसा कोई समाधान है जिसकी तरफ हमें देखना चाहिए। आज तक हुए अधिकतर अध्ययनों में यही बात सामने आई है कि केवल 10 से 20 प्रतिशत आबादी में ही संबंधित एंटीबॉडीज हैं।
डब्ल्यूएचओ महानिदेशक के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ब्रूस एलवार्ड ने भी कहा कि किसी कोविड-19 टीके के साथ व्यापक टीकाकरण का उद्देश्य विश्व की 50 प्रतिशत से काफी अधिक आबादी को इसके दायरे में लाने का होगा।