Pope Francis: कैथोलिक चर्च की तरफ से अपने सर्वोच्च पादरी (पोप) को चुने जाने की प्रक्रिया बीते करीब 800 वर्षों से नहीं बदली है। इस सिस्टम को 'पैपल कॉन्क्लेव' भी कहा जाता है। अगला पोप चुनने के लिए इस सिस्टम का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
पोप फ्रांसिस का सोमवार सुबह 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह इतिहास के पहले लैटिन अमेरिकी पोप थे, जिन्होंने अपने करिश्माई व्यक्तित्व, विनम्र स्वभाव तथा गरीबों के प्रति चिंता के साथ पूरी दुनिया में लोगों पर अमिट छाप छोड़ी। फ्रांसिस फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। युवावस्था में उनके एक फेफड़े का हिस्सा निकाल दिया गया था। उनके निधन के बाद कैथोलिक धर्म के शीर्ष धार्मिक नेता का पद खाली हो गया है। इस पर अब उनके उत्तराधिकारी की खोज शुरू हो गई है।
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कैथोलिक चर्च की तरफ से अपने सर्वोच्च पादरी (पोप) को चुने जाने की प्रक्रिया बीते करीब 800 वर्षों से नहीं बदली है। इस सिस्टम को 'पैपल कॉन्क्लेव' भी कहा जाता है। अगला पोप चुनने के लिए इस सिस्टम का ही इस्तेमाल किया जाएगा। कैथोलिक ईसाइयों का सर्वोच्च नेता चुनने की प्रक्रिया को वोटिंग के जरिए अंजाम दिया जाता है। किसी पोप का चुनाव तभी होता है, जब उन्हें दो-तिहाई कार्डिनल्स के वोट हासिल हो जाएं। फ्रांसिस के निधन के बाद अगले पोप के चुनाव के लिए कई नाम सामने आए हैं।
जीन-मार्क एवलिन, मार्सिले के आर्चबिशप (66 वर्ष)
जीन-मार्क एवलिन को स्थानीय चर्च में जॉन XXIV के नाम से जाना जाता है। उनके पास धर्मशास्त्र में डॉक्टरेट और दर्शनशास्त्र में डिग्री है। उनका जन्म अल्जीरिया में स्पेनिश प्रवासियों के परिवार में हुआ था। एवलिन अपने मिलनसार, सहज स्वभाव और फ्रांसिस के साथ अपनी वैचारिक निकटता विशेष रूप से आप्रवासन और मुस्लिम दुनिया के साथ संबंधों के लिए जाने जाते हैं।
कार्डिनल पीटर एर्दो-हंगरी (72 वर्ष)
कार्डिनल पीटर एर्दो पोप फ्रांसिस के एकदम विपरीत हैं। जहां फ्रांसिस आप्रवासन, समलैंगिकता और मुस्लिम दुनिया के साथ संबंधों को लेकर उदारवादी रुख रखते हैं। वहीं इसके विपरीत एर्दो रूढ़िवादी खेमे से आते हैं। 2015 के प्रवासी संकट के दौरान वेटिकन में उन्होंने चर्चों से शरणार्थियों को लेने के पोप फ्रांसिस के आह्वान का विरोध किया था और कहा था कि यह मानव तस्करी के बराबर है।
कार्डिनल मारियो ग्रेक -माल्टा (68 वर्ष)
कार्डिनल मारियो ग्रेक गोजो से आते हैं, जो माल्टा का एक छोटा सा द्वीप है और यूरोपीय संघ का सबसे छोटा देश भी है। पोप फ्रांसिस ने उन्हें सिनोड ऑफ बिशप्स का सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया था। जो वेटिकन में एक अत्यंत प्रभावशाली पद है। शुरुआत में उन्हें एक रूढ़िवादी के रूप में देखा जाता था, लेकिन बाद में वह पोप फ्रांसिस के सुधारों के समर्थक बन गए।
कार्डिनल जुआन जोसे ओमेला - स्पेन (79 वर्ष)
कार्डिनल जुआन जोसे ओमेला बार्सिलोना के आर्चबिशप हैं और स्पेनिश हैं। ओमेला को पोप फ्रांसिस के खेमे का माना जाता है। अपने सहज, सौम्य स्वभाव और विनम्र जीवन जीने के लिए जाने जानेवाले ओमेला का जन्म 1946 में स्पेन के उत्तर-पूर्वी गांव क्रेटास में हुआ था। 1970 में वे पादरी बने। 1999 से 2015 तक उन्होंने स्पेन की एक संस्था के साथ काम किया, जो विकासशील देशों में भुखमरी, बीमारी और गरीबी से लड़ने का कार्य करती है। वे 1996 में बिशप बने और 2015 में उन्हें बार्सिलोना का आर्चबिशप बनाया गया। ठीक एक वर्ष बाद पोप फ्रांसिस ने उन्हें कार्डिनल की लाल टोपी पहनाई । 2023 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें अपने नौ सदस्यीय सलाहकार मंडल (किचन कैबिनेट) में शामिल किया, जो शासन से जुड़े मुद्दों पर उन्हें परामर्श देता है।
कार्डिनल पिएत्रो पैरोलीन-इटली (70 वर्ष)
कार्डिनल पिएत्रो पैरोलीन वेटिकन के वरिष्ठ राजनयिक माने जाते हैं। वे वर्तमान में पोप फ्रांसिस के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट हैं। यह पद वेटिकन में प्रधानमंत्री के समकक्ष होता है और कभी-कभी इन्हें डिप्टी पोप भी कहा जाता है क्योंकि ये पोप के बाद वेटिकन में दूसरा सबसे अहम स्थान होता है। वह इस पद पर 2013 से हैं, यानी जिस साल पोप फ्रांसिस चुने गए थे।पैरोलीन को एक ऐसे संतुलित उम्मीदवार के रूप में देखा जाता है जो प्रगतिशीलों और रूढ़िवादियों दोनों को स्वीकार्य हो सकते हैं। इसलिए कई लोग उन्हें कॉन्क्लेव में सर्वमान्य विकल्प मानते हैं।
अपने करियर के अधिकांश समय वे कलीसिया के राजनयिक रहे हैं। पोप बेनेडिक्ट के कार्यकाल में उन्होंने वेटिकन के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर के रूप में काम किया और 2009 में उन्हें वेनेजुएला में वेटिकन का राजदूत नियुक्त किया गया। वे वेटिकन के चीन और वियतनाम के साथ संबंध सुधारने के प्रयासों के प्रमुख सूत्रधार भी रहे हैं। पैरोलीन अगर पोप चुने जाते हैं, तो तीन गैर-इतालवी पोपों (पोलैंड के जॉन पॉल द्वितीय, जर्मनी के बेनेडिक्ट और अर्जेंटीना के फ्रांसिस) के बाद पोप का पद पुनः इटली लौट जाएगा।हालाकि उनका पादरी सेवा का अनुभव सीमित है।
कार्डिनल लुइस एंटोनियो टैगले-फिलीपीनो (67 वर्ष)
टैगले को आमतौर पर "एशियाई फ्रांसिस" कहा जाता है, क्योंकि वे पोप फ्रांसिस की तरह सामाजिक न्याय के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं। यदि वे पोप चुने जाते हैं, तो वे एशिया से चुने जाने वाले पहले पोप होंगे। पोप बनने के लिए सभी अपेक्षित योग्यताओं पर खरे उतरते हैं। 1982 में पादरी बनने के बाद उन्होंने कई दशकों तक सेवाएं दीं। बाद में उन्हें इमस का बिशप और फिर मनीला का आर्चबिशप बनाया गया। जहां उन्होंने प्रशासनिक अनुभव भी अर्जित किया। पोप बेनेडिक्ट ने 2012 में उन्हें कार्डिनल बनाया। 2019 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें मनीला से वेटिकन बुलाकर चर्च के मिशनरी विभाग डिकास्ट्री फॉर इवैंजेलाइज़ेशन का प्रमुख नियुक्त किया। उनकी माता चीनी मूल की फिलीपीनो थीं। टैगले धाराप्रवाह इतालवी और अंग्रेजी बोलते हैं।
कार्डिनल जोसेफ टोबिन-अमेरिका ( 72 वर्ष)
जोसेफ टोबिन- न्यूआर्क के आर्चबिशप हैं। यह संभावना कम ही है कि दुनिया भर के कार्डिनल पहली बार किसी अमेरिकी को पोप चुनें, लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो जोसेफ टोबिन एक मजबूत दावेदार माने जा सकते हैं। डेट्रॉएट में जन्मे टोबिन रेडेम्प्टोरिस्ट्स नामक एक प्रमुख कैथोलिक धार्मिक संगठन के वैश्विक नेता रह चुके हैं। उन्होंने दुनिया के कई देशों में समय बिताया है और वे इतालवी, स्पेनिश, फ्रेंच और पुर्तगाली भाषाएं धाराप्रवाह बोलते हैं। उन्हें वेटिकन सेवा और अमेरिका की कलीसिया में शीर्ष पदों का भी व्यापक अनुभव है। 2009 से 2012 के बीच वे वेटिकन के एक विभाग में दूसरे सबसे बड़े पद पर रहे। इसके बाद पोप बेनेडिक्ट ने उन्हें इंडियाना के इंडियानापोलिस का आर्चबिशप नियुक्त किया। 2016 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें कार्डिनल बनाया और बाद में न्यूआर्क का आर्चबिशप नियुक्त किया।
एम मारिया जुप्पी-इटली (69 वर्ष)
मैटेओ मारिया जुप्पी बोलोग्ना के आर्चबिशप हैं। यदि जुप्पी पोप चुने जाते हैं, तो वे 1978 के बाद पहले इतालवी पोप होंगे। वे तामझाम और औपचारिकताओं में विश्वास नहीं करते। वे अक्सर खुद को "फादर मैटेओ" कहकर बुलाते हैं और बोलोग्ना में कभी-कभी आधिकारिक गाड़ी की जगह साइकिल से यात्रा करते दिखते हैं। जुप्पी एक रोमन हैं। उनके पिता एनरिको वेटिकन के समाचार पत्र L'Osservatore Romano के संडे सप्लीमेंट के संपादक थे।
ये नाम भी रेस में
इसके अलावा घाना के कार्डिनल पीटर टर्कसन का भी नाम पोप का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। वह न्याय और शांति के लिए बने परिषद के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। कार्डिनल रेमंड लियो बर्क भी पोप फ्रांसिस के उत्तराधिकारी की रेस में आगे हैं। उन्हें पोप बेनेडिक्ट XVI ने साल 2010 में कार्डियल बनाया था। इसके अलावा गेरहार्ड मुलर, एंजेलो स्कोला, एंजेलो बैग्नास्को और रॉबर्ट सारा भी पोप फ्रांसिस के उत्तराधिकारी हो सकते हैं। संबंधित वीडियो