भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा की 22वीं कांग्रेसनल सीट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया है। 'डिसीजन डेस्क एचक्यू' और 'सीबीएस न्यूज' ने इसकी तस्दीक की है। डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में रिपब्लिकन केसी असकर को हराया। 'डिसीजन डेस्क एचक्यू' ने एक्स पोस्ट में बताया, 'पिया डांडिया ने फ्लोरिडा यूएस हाउस 22 का आम चुनाव जीत लिया है।'
उन्होंने रात 8:05 बजे (स्थानीय समयानुसार) यह जानकारी दी। सीबीएस न्यूज ने बताया कि डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में यूएस हाउस सीट जीत ली है और रिपब्लिकन केसी असकर को हरा दिया है।"
कितने प्रतिशत मिले वोट?
एनबीसी न्यूज ने भी इसे एक संभावित जीत बताया, जिसमें डांडिया 51.9 प्रतिशत वोटों के साथ आगे थीं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 48.1 प्रतिशत वोट मिले। अब तक लगभग 97.6 प्रतिशत वोटों की गिनती हो चुकी है, जिसमें कुल 292,000 से अधिक वोट गिने गए हैं।
मुकाबला चर्चा में क्यों रहा?
एक पूर्व स्कूल प्रिंसिपल, डांडिया ने दक्षिण फ्लोरिडा के नए बने कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से कांग्रेस में जाने की कोशिश की थी। यह मुकाबला काफी चर्चा में रहा, क्योंकि इसे हाउस की उन कड़े मुकाबलों वाली सीटों में से एक माना जारहा था, जो सदन पर नियंत्रण को प्रभावित कर सकती हैं।
'डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमिटी' ने एक्स पर कहा, 'पिया ने उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जो दक्षिण फ्लोरिडा के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं - जैसे कि महंगाई से निपटना और यह सुनिश्चित करना कि हर किसी को 'अमेरिकन ड्रीम' हासिल करने का मौका मिले।' भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने एक्स पर डांडिया को बधाई दी और कहा कि वह तीसरी दक्षिण एशियाई अमेरिकी महिला का सदन में स्वागत करने को उत्सुक हैं।
कौन हैं पिया डांडिया?
कैंपेन की वेबसाइट के अनुसार, डांडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी हैं। उन्होंने अपना करियर समुदायों को मजबूत बनाने में समर्पित किया है। एक हाई स्कूल प्रिंसिपल, पॉलिसी लीडर और टेक्नोलॉजी इनोवेटर के रूप में। फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मी और पली-बढ़ीं डांडिया ने अपने करियर की शुरुआत एक टीचर के रूप में की थी और वह हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल भी रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक डांडिया ने अपने करियर के शुरुआती दौर में दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में बच्चों को पढ़ाया, इस अनुभव ने उन्हें आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से अवगत कराया।
उन्होंने एक हाई स्कूल की स्थापना की, जिसका लक्ष्य कम आय वाले छात्रों के जीवन की दिशा बदलना था, ताकि उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता के रास्ते पर लाया जा सके। उनके हाई स्कूल से पास होने वाले सभी छात्रों को कॉलेज में दाखिला मिला, जबकि उनमें से 86 प्रतिशत छात्र कम आय वाले परिवारों से आते थे। कैंपेन वेबसाइट के अनुसार, 28 साल की उम्र में वह अपने स्कूल की फाउंडिंग प्रिंसिपल बनीं, जिससे वह देश की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में से एक बन गईं।