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कौन हैं मोजतबा खामेनेई?: पिता की मौत के बाद बने ईरान के सर्वोच्च नेता, अरबों के मालिक; दुनियाभर में संपत्तियां

Wed, 04 Mar 2026 06:59 AM IST
Kirtivardhan Mishra स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

Who is Mojtaba Khamenei: मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। मोजतबा पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं। अली खामेनेई की इस्राइल-अमेरिका के संयुक्त हमले में मौत हो गई थी। जिसके बाद ईरान ने मोजतबा को नया सर्वोच्च नेता चुना है। पश्चिम एशिया में संकट के बीत मोजतबा खामेनेई के सामने देश के नेतृत्व का संकट है। आइए मोजतबा खामेनेई के बारे में जानतें हैं...
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका और इस्राइल की तरफ से किए गए हमले के बाद से ही पूरे ईरान में उथल-पुथल का माहौल जारी है। 27 फरवरी को शुरू हुए हमलों में इस्राइल ने सटीक निशाना बना कर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके करीबी सैन्य कमांडरों और नेताओं को मार दिया था। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद कई दावेदारों के नाम भी सामने आए थे और गार्डियन काउंसिल ने अलीरेजा अराफी को अंतरिम तौर पर ईरान का नेतृत्व सौंपा थी। हर दिन के साथ ईरान-इस्राइल और अमेरिका के युद्ध की तीव्रता बढ़ती जा रही है। इसी बीच बुधवार को गार्डियन काउंसिल ने अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई अपना सुप्रीम लीडर चुन लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई के उत्तराधिकारी के लिए उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम दावेदारी में सबसे ऊपर थे। 

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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर मोजतबा खामेनेई कौन हैं? उनके शुरुआती जीवन से लेकर उनका पारिवारिक इतिहास क्या है?

कैसा रहा शुरुआती जीवन और कहां हुई शिक्षा?

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद, उनका परिवार मशहद से तेहरान चला गया था। उन्होंने तेहरान के संभ्रांत अलवी हाई स्कूल से पढ़ाई की और 1987 में वहां से स्नातक किया। बाद में उन्होंने तेहरान और कोम सेमिनरी में प्रमुख रूढ़िवादी मौलवियों के तहत धार्मिक अध्ययन किया।
 
सैन्य अनुभव: मोजतबा ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान ईरान के सशस्त्र बलों में भी काम किया था। उन्होंने विशेष रूप से हबीब बटालियन और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) में सेवा दी थी, जहां से उन्होंने ईरान के सुरक्षा और खुफिया तंत्र के बड़े अधिकारियों के साथ गहरे संबंध बनाए। 

हालांकि, मोजतबा खामेनेई के पास सरकार में कोई आधिकारिक पद नहीं रहा है, लेकिन वे अपने पिता के कार्यालय में एक बेहद शक्तिशाली और प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में जाने जाते रहे हैं।

ये भी पढ़ें: Ali Reza Arafi: खामेनेई की मौत के बाद बदल गया ईरान का सत्ता समीकरण, अस्थायी सुप्रीम लीडर बने अली रेजा अराफी

मोजतबा खामेनेई का ईरान के सैन्य और खुफिया तंत्र में बहुत गहरा और प्रभावशाली दखल रहा है। भले ही उनके पास सरकार में कोई निर्वाचित या आधिकारिक पद नहीं रहा है, लेकिन वे पर्दे के पीछे से ईरान के सुरक्षा तंत्र को नियंत्रित करने वाले सबसे ताकतवर लोगों में गिने जाते हैं। 

ईरान के सैन्य और खुफिया ढांचे में कैसे बने प्रभावशाली?

  • मोजतबा ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की हबीब बटालियन में सेवा दी थी। इसी बटालियन में काम करने के दौरान उन्होंने उन लोगों के साथ गहरे संबंध बनाए, जो बाद में ईरान की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष पदों पर बैठे।
  • मोजतबा के सबसे करीबी सहयोगियों में हुसैन तायब का नाम भी रहा, जो आगे चलकर आईआरजीसी के खुफिया संगठन के प्रमुख बने। इसके अलावा हुसैन नेजात, जो तेहरान की सुरक्षा संभालने वाले आईआरजीसी के सरल्लाह मुख्यालय के कमांडर बने, वे भी मोजतबा के करीबियों में गिने जाते हैं। 
  • अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के दौरान मोजतबा ने कोई बड़ा पद अपने पास न रखते हुए भी आईआरजीसी, विदेशी ऑपरेशनों को अंजाम देने वाली कुद्स फोर्स और खुफिया संगठनों में अपने वफादार सहयोगियों को स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई है।


 

ईरान के शासन में कैसे बने अपने पिता के बाद सबसे ताकतवर चेहरा?

मोजतबा खामेनेई ने बिना किसी आधिकारिक या निर्वाचित सरकारी पद के ईरान के शासन में अपना जबरदस्त प्रभाव कई रणनीतिक कदमों और मजबूत नेटवर्क्स के माध्यम से बनाया है।

1. सर्वोच्च नेता के कार्यालय में 'गेटकीपर' की भूमिका निभाई
मोजतबा ने अपने पिता (अयातुल्ला अली खामेनेई) के कार्यालय में एक प्रमुख सलाहकार और 'गेटकीपर' के रूप में काम किया। उनकी इस भूमिका की तुलना अक्सर अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी के बेटे अहमद खोमैनी से की जाती है। 2019 में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भी खुलासा किया था कि सर्वोच्च नेता ने अपने नेतृत्व की कई जिम्मेदारियां मोजतबा को सौंप दी थीं, जिससे वे आधिकारिक पद के बिना ही शासन के अहम फैसले लेने लगे।

2. राजनीतिक चुनावों में दखल और विरोध प्रदर्शनों के दमन में रहे शामिल
मोजतबा ने राष्ट्रपति चुनावों में पर्दे के पीछे से बड़ी भूमिका निभाई। 2005 और 2009 के चुनावों में महमूद अहमदीनेजाद का समर्थन करने और उनकी जीत सुनिश्चित करने में उन्हें एक प्रमुख सूत्रधार माना जाता है। 2009 के विवादित चुनावों के बाद हुए ग्रीन मूवमेंट के विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने के लिए उन्होंने ही अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बासिज मिलिशिया को निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि मोजतबा साल 1990 से ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं और ईरान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद अहमदिनेजाद को राष्ट्रपति बनाने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है।

 

3. ईरान की सरकारी मीडिया पर हासिल किया पूर्ण नियंत्रण
ईरान के सरकारी प्रसारण संगठन (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग) पर भी उनका भारी प्रभाव रहा है। 2014 में आईआरजीसी और अपने सहयोगी हुसैन तायब के साथ मिलकर उन्होंने आईआरआईबी के तत्कालीन निदेशक को पद से हटवाने में अहम भूमिका निभाई थी।

4. धार्मिक रुतबे को को भी तेजी से बढ़ाया 
मोजतबा बुनियादी रूप से एक मध्य-स्तरीय मौलवी रहे हैं और उनके पास सर्वोच्च नेता बनने के लिए आवश्यक अयातुल्ला का पारंपरिक दर्जा नहीं रहा। इसके बावजूद उत्तराधिकार के लिए उनकी दावेदारी मजबूत करने के मकसद से, ईरान के राज्य-संबद्ध मीडिया और समर्थकों ने धीरे-धीरे उन्हें अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई कहना शुरू कर दिया, ताकि उनकी धार्मिक साख को व्यवस्था के अनुकूल बड़ा दिखाया जा सके। 

कैसे दुनियाभर में अरबों की संपत्ति के मालिक बने मोजतबा?

मोजतबा खामेनेई के पास अरबों डॉलर की बेतहाशा संपत्ति है, जिसे उन्होंने एक बेहद गुप्त और जटिल नेटवर्क के जरिए जुटाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी संपत्ति सीधे तौर पर उनके नाम पर नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे से वे एक वैश्विक स्तर पर संपत्तियों का साम्राज्य नियंत्रित करते हैं।

1. मोजतबा के पास कितनी दौलत?

अरबों डॉलर का निवेश: पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और जांच रिपोर्ट्स के अनुसार, मोजतबा ने 'शेल कंपनियों' के माध्यम से पश्चिमी बाजारों में अरबों डॉलर का फंड निवेश किया है।

1.6 बिलियन डॉलर का बैंक खाता: 2009 में, ब्रिटेन सरकार ने एक बैंक खाते को फ्रीज किया था, जिसमें कथित तौर पर 1.6 अरब डॉलर) की संपत्ति थी। माना जाता है कि यह खाता मोजतबा खामेनेई के नियंत्रण में ही था। इसके अलावा उनकी अधिकतम दौलत दूसरे नामों से छिपाई गई है।

लंदन में लग्जरी संपत्तियां: उनके पास अकेले ब्रिटेन में 10 करोड़ पाउंड्स (लगभग 14 करोड़ डॉलर) से अधिक मूल्य की लग्जरी संपत्तियां हैं। इनमें लंदन के सबसे महंगे बिलियनेयर्स रो (द बिशप एवेन्यू) इलाके की संपत्तियां शामिल हैं, जहां 2014 में 3.37 करोड़ यूरो में एक घर खरीदा गया था।

वैश्विक स्तर पर रियल एस्टेट के मालिक: लंदन के अलावा उनके विदेशी निवेशों में दुबई के 'बेवर्ली हिल्स' कहे जाने वाले इलाके में एक विला, जर्मनी के फ्रैंकफर्ट और स्पेन के मलोर्का में फाइव-स्टार होटल, कनाडा के टोरंटो में 77 लाख डॉलर का पेंटहाउस और फ्रांस के पेरिस में संपत्तियां शामिल हैं।

2. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद कैसे जुटाई इतनी संपत्ति?

मोजतबा ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से पैसा बाहर निकालने और अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए रणनीतियां अपनाईं। इसमें ईरानी तेल की बिक्री से लेकर बिचौलियों के नेटवर्क बनाने जैसे जरिए शामिल हैं।

ईरानी तेल की बिक्री: इस अकूत संपत्ति का प्राथमिक स्रोत ईरानी तेल की बिक्री रहा। कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान का तेल व्यापार बिचौलियों और फ्रंट कंपनियों के गैर-पारदर्शी नेटवर्क के जरिए होता है। मोजतबा जैसे शक्तिशाली एलीट वर्ग ने इन नेटवर्क्स पर अपना नियंत्रण स्थापित करके तेल की बिक्री से भारी मुनाफा कमाया। 

अली अंसारी और बिचौलियों का नेटवर्क: मोजतबा का यह वित्तीय साम्राज्य मुख्य रूप से अली अंसारी नाम के एक ईरानी अरबपति व्यवसायी के नाम पर चलता है। अंसारी ने आयंदेह बैंक और ईरान मॉल जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से देश के अंदर पैसा बनाया और मोजतबा के विदेशी वित्तीय लेनदेन के लिए प्रमुख सूत्रधार के रूप में काम किया।

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शेल कंपनियों का जाल: तेल निर्यात से होने वाले मुनाफे को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की कई कंपनियों के जरिए यूरोप भेजा गया। इसके लिए सेंट किट्स एंड नेविस, आइल ऑफ मैन और यूएई में पंजीकृत दर्जनों गैर-ईरानी शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।

विदेशी बैंकों का इस्तेमाल: पैसे को इन कंपनियों के जरिए यूनाइटेड किंगडम, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और संयुक्त अरब अमीरात के विभिन्न बैंक खातों में भेजा गया। बाद में 2016 में, अली अंसारी ने साइप्रस का पासपोर्ट भी हासिल कर लिया, जिससे उन्हें अपनी ईरानी राजनीतिक पहचान छिपाने और यूरोप में नए बैंक खाते खोलने में मदद मिली।

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मोजतबा के लंबे समय से अयातुल्ला खामेनेई का उत्तराधिकारी बनने की थी चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते साल जब इस्राइ-अमेरिका ने ईरान पर हमला बोला था, तब खुद अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक्सपर्ट असेंबली के सदस्यों को बुलाकर उत्तराधिकारी पर फैसला लेने को कहा था। इसी असेंबली ने सर्वसम्मति से मोजतबा खामेनेई के नाम पर सहमति जताई। हालांकि यह पूरी प्रक्रिया बेहद ही गोपनीयता के साथ पूरी की गई। 

ईरान में कितना ताकतवर है सर्वोच्च नेता का पद

ईरान में सर्वोच्च नेता की पदवी एक धर्मगुरू को ही मिल सकती है, लेकिन मौजूदा सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को सर्वोच्च नेता बनाने के लिए इस नियम में थोड़ा संशोधन किया गया था क्योंकि वे धार्मिक नेता नहीं हैं। ईरान में सुप्रीम लीडर का पद राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था में सबसे बड़ा है और इनके पास राष्ट्रपति से भी ज्यादा अधिकार हैं। उन्हें देश के सैन्य, न्यायिक, धार्मिक और राजनीतिक मामलों में फैसले लेने का अधिकार है और सर्वोच्च नेता के फैसले को कोई भी चुनौती नहीं दे सकता। 

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