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New German Chancellor: कौन हैं फ्रेडरिक मर्ज? कंजर्वेटिव नेता जर्मनी के नए चांसलर बनकर रचेंगे इतिहास

Mon, 24 Feb 2025 08:35 AM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन

सार

New German Chancellor: जर्मनी के चुनाव के बाद नए चांसलर ने नाम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। बता दें कि, देश में हुए चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी सीडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ्रेडरिक मर्ज जर्मनी के नए चांसलर बनने की संभावनाएं तेज हो गई है।
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फ्रेडरिक मर्ज, जर्मनी के नए चांसलर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जर्मनी में हुए आम चुनावों में क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के नेता फ्रेडरिक मर्ज ने बड़ी जीत दर्ज की है। उनकी पार्टी के गठबंधन सीडीयू/सीएसयू ने 28.5% वोट हासिल किए, जिससे उन्होंने मौजूदा चांसलर ओलाफ शोल्ज की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) को पीछे छोड़ दिया।  
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कौन हैं फ्रेडरिक मर्ज?
फ्रेडरिक मर्ज का जन्म 11 नवंबर 1955 को जर्मनी के ब्रिलोन शहर में हुआ था। उनका परिवार कानून के क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उन्होंने 1976 में कानून की पढ़ाई शुरू की और 1972 में ही सीडीयू पार्टी से जुड़ गए थे। 1981 में उन्होंने शार्लोट मर्ज से शादी की, जो एक जज हैं। फ्रेडरिक मर्ज के कुल तीन बच्चे हैं।

फ्रेडरिक मर्ज का राजनीतिक सफर  
  • 1989: यूरोपीय संसद के लिए चुने गए।
  • 1994: जर्मन संसद बुंडेस्टाग के लिए जीत दर्ज की।
  • 2000: सीडीयू पार्टी के संसदीय नेता बने, लेकिन 2002 में यह पद एंजेला मर्केल को सौंपना पड़ा।
  • 2005: सीडीयू और एसपीडी के गठबंधन सरकार बनने के बाद वह राजनीति में हाशिए पर चले गए।  
  • 2009: सक्रिय राजनीति छोड़कर कानून और वित्त क्षेत्र में करियर बनाया।  
राजनीति में फ्रेडरिक मर्ज की वापसी
  • 2018: एंजेला मर्केल के संन्यास की घोषणा के बाद राजनीति में लौटे, लेकिन सीडीयू अध्यक्ष का चुनाव हार गए।
  • 2020: दोबारा कोशिश की लेकिन पार्टी ने अरमिन लाशेट को चुना।  
  • 2021: तीसरी बार चुनाव लड़े और संसद में वापसी की, लेकिन पार्टी चुनाव हार गई।  
  • 2022: फ्रेडरिक मर्ज सीडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।  
क्या हैं फ्रेडरिक मर्ज की प्राथमिकताएं?
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फ्रेडरिक मर्ज का रुख अवैध प्रवासियों पर सख्त माना जाता है। इसके अलावा, वह जर्मनी की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। अब उनकी सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन सरकार बनाना होगी ताकि वह जर्मनी की सत्ता संभाल सकें। उनकी वापसी के साथ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार एक अतिवादी दक्षिणपंथी दल देश में सत्ता में काबिज हो रही है।
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