30 सेकंड में 14,000 फीट नीचे गिरता विमान, खून से लथपथ भारतीय पायलट... लेकिन जख्मी हालत में भी कैप्टन स्मित मच्छार ने जो किया, उसे दुनिया याद रखेगी। ट्रंप ने उन्हें हीरो बताया। नेतन्याहू ने उन्हें सलाम किया। दुनियाभर से मिली तारीफ। जानिए 174 लोगों की जान बचाने वाले उस एक फैसले की पूरी कहानी...
बीते दिन एक विमान में 9/11 जैसे हमले की आशंका से हड़कंप मच गया। दुबई से इस्राइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया। विमान हजारों फीट नीचे आ गया। घायल हाथों और सिर से बहते खून के बावजूद उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसने 174 जिंदगियां बचा दीं।
वो बड़ी बातें जो आपको जाननी चाहिए:
कैप्टन स्मित मच्छार भारतीय नागरिक हैं, जो एयरलाइन फ्लाईदुबई में काम करते हैं। उनके प्रोफाइल के अनुसार उनके पास 13 साल का कमर्शियल एविएशन अनुभव है। करियर की शुरुआत उन्होंने भारत की स्पाइसजेट से मुंबई में की, जहां वे सीनियर कमांडर और लाइन ट्रेनिंग कैप्टन रहे। 2022 में वे फ्लाईदुबई से जुड़े।
उनका विमानन से नाता एकदम अप्रत्याशित तरीके से बना। परिवार का टेक्सटाइल बिजनेस था। स्मित ने पहले टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, फिर मैनेजमेंट कोर्स किया। उसी दौरान एक एविएशन सेमिनार में गए। वहीं से उड़ान भरने का जुनून जागा। तब वे 19 साल के थे। उनकी मां शुरू में इस करियर से सहमत नहीं थीं, लेकिन भारत के तेजी से बढ़ते विमानन उद्योग ने उनका मन बदल दिया।
दुबई से इस्राइल जा रही फ्लाइट में 174 यात्री और क्रू सवार थे। इनमें 27 बच्चे भी थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था। उड़ान को लगभग दो घंटे हो चुके थे। तभी ओमानी को-पायलट ने अचानक कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया और विमान के सिस्टम को तबाह करने की कोशिश की। हमले के साथ ही विमान 30 सेकंड से भी कम समय में करीब 14,000 से 17,000 फीट नीचे आ गया। यात्री हवा में उछलने लगे। शुरुआती जांच के अनुसार, ओमानी पायलट का इरादा प्लेन को हाइजैक कर कहीं क्रैश कराने का था।
इस्राइली यात्री त्ज्विका मेनेस की पत्नी उस वक्त अपनी छोटी बेटी को वॉशरूम ले जा रही थीं। तभी उन्हें कॉकपिट से चीखें और संघर्ष की आवाजें सुनाई दीं। उन्होंने तुरंत एक फ्लाइट अटेंडेंट को सतर्क किया। उसी वक्त कॉकपिट का दरवाजा खुला और खून से लथपथ कैप्टन स्मित बाहर गिर पड़े। को-पायलट उन्हें चाकू मार रहा था।
विमान में मौजूद एकमात्र डॉक्टर मूसायेव ने कॉकपिट में जो नजारा देखा वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। उन्होंने द टाइम्स ऑफ इस्राइल को बताया, ‘जब मैं कॉकपिट में पहुंचा तो भारतीय पायलट बहुत बुरी हालत में था। खासतौर पर सिर से भारी खून बह रहा था। उसके हाथ तो जैसे कट ही गए थे। लगभग दो हिस्सों में। सिर पर भी एक कट लगा था। खून बह जाने की वजह से वह गंभीर अवस्था में था। मैं विमान में अकेला डॉक्टर था। आखिरकार मैंने खून बहना रोका और उनका ब्लड प्रेशर स्थिर किया।’
इसी बीच, खून के बीच लेटे हुए कैप्टन स्मित होश में थे और बात कर रहे थे। डेंटिस्ट मूसायेव ने बताया, ‘पायलट हमसे बात कर रहा था और बोला कि मेरी उम्र 39 साल है और मेरे दो बच्चे हैं। हमलावर ने उसे चाकू मारे थे और गालियां दी थीं।’
यह वह पल था जो विमानन इतिहास में दर्ज हो गया। खून से लथपथ, जमीन पर गिरे हुए गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित ने अपनी आखिरी ताकत बटोरी और कॉकपिट के दरवाजे की रिलीज का बटन दबाया। इससे दरवाजा खुल गया। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने बताया कि यही वह कदम था जिसने सब कुछ बदल दिया। आखिरी वक्त पर उन्होंने जो ताकत दिखाई, उससे यात्री और क्रू अंदर घुस सके और को-पायलट को काबू किया जा सका।
सोशल मीडिया यूजर साना इब्राहिमी लेदेने, जिनके पति खुद पायलट हैं। उन्होंने लिखा, 'पायलट के पास एक स्विच होता है जो कॉकपिट का दरवाजा अंदर से खोल देता है। कैप्टन स्मित ने सिर्फ चिल्लाकर मदद नहीं मांगी। उन्होंने गिरने से पहले वह स्विच दबाया ताकि क्रू और यात्री अंदर आ सकें। अगर दरवाजा बंद रहता तो कोई उस विमान को नहीं बचा सकता था।'
जब यात्रियों और क्रू ने को-पायलट को काबू किया, तब विमान में सवार दो ऑफ-ड्यूटी पायलट यात्री के रूप में सफर कर रहे थे। वे कॉकपिट में आए और उन्होंने विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा। इस्राइली अधिकारियों के अनुसार 174 यात्री और क्रू के सभी सदस्य सुरक्षित रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से बातचीत याद करते हुए कहा, 'पायलट बहुत बुरी हालत में था और अभी भी है, लेकिन उसमें इतनी समझ थी। वह हीरो था।' इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा, 'भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को मेरा सलाम। चाकू से घायल और गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद उन्होंने लड़ाई लड़ी, सामना किया, कॉकपिट का दरवाजा खोला और यात्रियों व क्रू की हमलावर को काबू करने में मदद की।'