क्या है हयात तहरीर अल-शाम
सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार के खिलाफ लड़ रहा विद्रोही गुट हयात तहरीर अल शाम आंतकी संगठन अल कायदा की शाखा रहा है। अबू मोहम्मद अल-गोलानी के नेतृत्व वाला एचटीएस लंबे समय से इदलिब में प्रमुख ताकत रहा है। तहरीर अल-शाम को पहले जबात नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था। दरअसल, एचटीएस को अल-कायदा ने बनाया था ताकि यह सीरिया के गृहयुद्ध खत्म होने के बाद यहां की स्थिति का फायदा उठा सके। यह जल्द ही अपने मकसद में कामयाब भी हो गया और इसने विद्रोही हमलों के साथ-साथ सेना और अन्य दुश्मनों के खिलाफ आत्मघाती बम विस्फोट किए। हालांकि, यह समूह धीरे-धीरे सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट का कट्टर दुश्मन बन गया और अंततः 2016 में अल-कायदा से भी अलग हो गया। अमेरिका, रूस, तुर्किये और अन्य देशों ने तहरीर अल-शाम को आतंकवादी समूह घोषित किया है।
सीरिया में कैसे घटा पूरा घटनाक्रम
कट्टरपंथी समूह हयात तहरीर अल-शाम ने पिछले हफ्ते सीरिया में अचानक और सफल आक्रमण करके चौंका दिया। हयात तहरीर अल-शाम या एचटीएस लंबे समय से देश का सबसे मजबूत विद्रोही गुट माना जाता रहा है। इन विद्रोहियों ने 26 नवंबर को अचानक अलप्पो के उत्तर और उत्तर-पश्चिम के इलाकों से हमला किया। वहीं 29-30 नवंबर को वे शहर में घुस आए और सेना को वहां से खदेड़ दिया। एचटीएस के हजारों लड़ाकों ने अलप्पो के बाद कई अन्य प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया। साल 2011 में असद सरकार के खिलाफ अरब स्प्रिंग विद्रोह से शुरू हुए इस गृह युद्ध में करीब पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है। गृह युद्ध से 2.3 करोड़ की आबादी वाले देश से करीब 68 लाख लोगों को अपने घरों से मजबूर बेघर होना पड़ा है और लाखों लोग विदेशों में शरणार्थी बन गए हैं।
सीरिया सरकार को रूस के साथ ही ईरान और हिजबुल्ला का भी समर्थन था, जिसकी वजह से बशर सरकार का सीरिया पर मजबूत कब्जा था, लेकिन अब इस्राइल के साथ लड़ाई में हिजबुल्ला को बड़ा झटका लगा है। वहीं साल 2016 में बशर सरकार की मदद के लिए अपने लड़ाकू विमानों को सीरिया में तैनात करने वाला रूस भी यूक्रेन युद्ध में फंसा हुआ है। ईरान भी इस्राइल के साथ तनाव में उलझा हुआ है, जिससे बशर सरकार कमजोर हुई और इस मौके का फायदा उठाकर विद्रोहियों ने सीरिया में हमले तेज कर दिए। बशर अल असद ने भी बीते दिनों अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों पर विद्रोहियों को समर्थन देने का आरोप लगाया था।
सीरिया गृह युद्ध में जा चुकी है पांच लाख से ज्यादा लोगों की जान
बशर अल असद सरकार और विद्रोही गुटों के बीच जारी संघर्ष में अब तक पांच लाख से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा है। साथ ही बीते 13 वर्षों में सीरिया से करीब 68 लाख लोग देश छोड़कर जा चुके हैं। इनमें से अधिकतर लोग तुर्किये और यूरोपीय देशों में रह रहे हैं। सीरिया के 30 फीसदी हिस्से पर पहले भी विद्रोहियों का कब्जा था, लेकिन अब अधिकतर हिस्से पर उनका कब्जा हो गया है। सीरिया के मौजूदा हालात में आतंकी संगठन आईएसआईएस के अगले कदम पर भी सभी की निगाहें हैं।