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Strait of Hormuz: होर्मुज सुरक्षा के लिए अमेरिका बनाएगा नया गठबंधन, वैश्विक व्यापार-ऊर्जा संकट से बढ़ी चिंता

Thu, 30 Apr 2026 10:30 AM IST
Shivam Garg आईएएनएस, वॉशिंगटन

सार

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की यह पहल वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। जहां एक ओर यह समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर ईरान-अमेरिका तनाव इसे और जटिल बना रहा है।

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होर्मुज का रास्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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वॉशिंगटन में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ी रणनीतिक पहल शुरू की है। व्हाइट हाउस अब एक नए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को तैयार करने की कोशिश में है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है।

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क्या है नया मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट?
अमेरिकी मीडिया द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्तावित योजना का नाम मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट (एमएफसी) रखा गया है। इसका मकसद विभिन्न देशों को एक साथ लाकर समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को मजबूत करना है। इस योजना में यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट और यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड मिलकर काम करेंगे। विदेश विभाग कूटनीतिक नेतृत्व करेगा, जबकि सेंट्रल कमांड समुद्री निगरानी और सूचना साझा करने का जिम्मा संभालेगा।

वैश्विक देशों से समर्थन की अपील
अमेरिका अपने साझेदार देशों से इस गठबंधन में शामिल होने की अपील कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह भी पूछा जा रहा है कि क्या देश इस पहल में राजनयिक या सैन्य साझेदार बनना चाहते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक कार्रवाई से वैश्विक व्यापार मार्गों को सुरक्षित किया जा सकेगा और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम होगा।
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ईरान के साथ तनाव और समुद्री टकराव
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि जब तक ईरान परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता, तब तक समुद्री नाकाबंदी जारी रहेगी। वहीं ईरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि इस नाकाबंदी का जवाब अभूतपूर्व कार्रवाई से दिया जाएगा।

आगे क्या हो सकता है?
अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि यह संघर्ष आगे बढ़कर या तो किसी नए परमाणु समझौते में बदल सकता है या फिर लंबा सैन्य तनाव बन सकता है। फिलहाल, दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह नया गठबंधन समुद्री व्यापार को स्थिर कर पाएगा या नहीं।

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