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ब्रिटेनः आखिर क्या रहा लिज ट्रस की कामयाबी का राज? किस खूबी की वजह से जनता ने उन्हें अपना नेता चुना

Wed, 07 Sep 2022 02:55 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

निवर्तमान बोरिस जॉनसन सरकार में विदेश मंत्री रहीं ट्रस शुरुआती दिनों में अपने भाषणों में लड़खड़ाती नजर आईं। एक भाषण में उन्होंने कहा रूस में पुतिन के युद्ध फिर उन्होंने सुधार कर रूस की जगह यूक्रेन कहा, लेकिन तब तक उनका मजाक उड़ चुका था।
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Britain- liz truss - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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लिज ट्रस अब ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बन गई हैं, लेकिन सात हफ्ते पहले जब सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी का नया नेता बनने की होड़ शुरू हुई, तब उनके दावे को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ‘लिज फॉर लीडर’ अभियान की शुरुआत बहुत अफरातफरी भरी रही। उसमें गंभीरता का अभाव दिखा था। तब लिज के कैंपेन का नारा- रेडी टू सर्व (सेवा के लिए तैयार) रखा गया था। लेकिन उनके अभियान को संचालित कर रहे क्वासी क्वार्तेंग शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि आखिर लिज ट्रस ये सेवा किसी तरह करेंगी। 

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निवर्तमान बोरिस जॉनसन सरकार में विदेश मंत्री रहीं ट्रस शुरुआती दिनों में अपने भाषणों में लड़खड़ाती नजर आईं। एक भाषण में उन्होंने कहा रूस में पुतिन के युद्ध फिर उन्होंने सुधार कर रूस की जगह यूक्रेन कहा, लेकिन तब तक उनका मजाक उड़ चुका था। उनका मुकाबला ऋषि सुनक से था, जिन्हें कंजरवेटिव सांसदों के बीच हुए चुनाव में सबसे ज्यादा वोट मिले। जॉनसन सरकार में वित्त मंत्रालय संभालने वाले सुनक को योग्य मंत्री और नेता के रूप में देखा जाता था।

फॉकलैंड युद्ध की याद दिलाकर भावनाओं को उभारने में सफल रहीं
बाद में ट्रस ने पीएम फॉर पीएम नाम से अपना कैंपेन शुरू किया। शुरुआत के मौके पर उन्होंने अपने बदन पर यूनियन जैक (ब्रिटेन का राष्ट्रीय झंडा) ओढ़ रखा था। उस मौके पर उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की याद दिलाई। कहा कि जब वे एक छोटी बच्ची थीं, तब से उन्होंने थैचर को अपना आदर्श माना। फॉकलैंड युद्ध की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि जब उस युद्ध के लिए जहाज रवाना हो रहे थे, तब पोर्ट्समाउथ तट पर उन्होंने वो नजारा देखा था। इन बातों से वे कंजरवेटिव कार्यकर्ताओं की भावनाओं को उभारने में सफल रहीं। 
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यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलगाव की कट्टर समर्थक
ट्रस ने यह दावा भी किया वे हमेशा ब्रेग्जिट (यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलगाव) की कट्टर समर्थक रही हैं। हालांकि बाद में सामने आया कि 2016 में उन्होंने ब्रिटेन के ईयू में बने रहने की वकालत की थी। लेकिन इससे ट्रस के अभियान पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। विश्लेषकों के मुताबिक कंजरवेटिव पार्टी हाल के वर्षों में अधिक रूढ़िवादी होती गई है। इसका लाभ ट्रस को मिला। कहा गया है कि बोरिस जॉनसन जिस दिशा में पार्टी को ले गए, उसका फायदा अब ट्रस ने उठाया है। जबकि 2005 में पार्टी ने डेविड कैमरन को अपना नेता चुना था, जिन्होंने खुद को पार्टी के आधुनिकीकरण के समर्थक के रूप में पेश किया था। 

कंजरवेटिव पार्टी के पूर्व विशेष सलाहकार ल्युक ट्राइल ने अखबार द गार्जियन से कहा कि ट्रस की दो टूक बयानी की आदत लोगों को पसंद आई। वे खुद को एक एक साधारण व्यक्ति के रूप में पेश करने में सफल रहीं। उन्होंने कहा- ‘टीकाकारों ने जिन बातों को ट्रस की कमजोरी बताया था, उन्हें ट्रस ने अपनी शक्ति बना लिया। कंजरवेटिव कार्यकर्ता अक्सर कहते सुने गए कि उन्हें ट्रस की साफगोई पसंद है।’ दूसरी तरफ सुनक की नाप-तौल कर बोलने वाले नेता की छवि बनी। कंजरवेटिव कार्यकर्ताओं ने इसे बनावटी माना। बहसों के दौरान उन्होंने ट्रस से तीखे सवाल पूछे, तो कंजरवेटिव समर्थकों ने इसे उनकी तुच्छता के रूप में देखा।

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