स्पैनिश फ्लू के शिकार हुए लोग
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सौ साल पहले, स्पेनिश फ्लू ने साबित किया कि वैश्विक महामारी नाम का दुश्मन एक बार में खत्म नहीं होता, बल्कि पलटकर आता है। 1918 के बसंत काल में शुरू हुई इस महामारी को देखकर लग रहा था कि सितंबर तक प्रकोप खत्म हो जाएगा, लेकिन तभी दूसरा और सबसे खतरनाक दौर शुरू हुआ। पहले दौर के बाद तीन महीने तक बहुत कम मामले सामने आए, लेकिन फिर अचानक इनमें तेजी आ गई और कई जानें गईं।
स्पैनिश फ्लू: यूके में संक्रमण के 10 माह (1918-19)
| पहला दौर |
1000 संक्रमितों में से 05 की मौत |
| दूसरा दौर |
1000 संक्रमितों में से 25 की मौत |
| तीसरा दौर |
1000 संक्रमितों में से 12 की मौत |
- आर्म्ड फोर्सेज इंस्टीट्यूट ऑफ पैथॉलॉजी, यूएस
स्पैनिश फ्लू में मुंबई भारत का सर्वाधिक प्रभावित शहर था
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भारत में स्पैनिश फ्लू से मरने वालों की तादाद आबादी की 5.2 फीसदी यानी करीब 1.7 करोड़ लोग थे। 1918 के मई-जून में समुद्री रास्ते से बंबई (आज के मुंबई) में दस्तक दी थी। अगले कुछ माह में यह महामारी रेलवे के जरिए देश के दूसरे शहरों में भी फैल गई। सितंबर में आए इसके दूसरे दौर ने तांडव मचाया था। दुनियाभर के जिन शहरों ने लोगों के इकट्ठे होने, थिएटर खोलने, स्कूलों और धार्मिक जगहों के खुलने पर रोक लगा दी थी वहां मौतों का आंकड़ा काफी कम था। उस वक्त प्रथम विश्व युद्ध जारी था। तब भीड़भाड़ वाले सैनिकों के ट्रांसपोर्ट और जंगी सामान बनाने वाली फैक्ट्रियों और बसों और ट्रेनों के जरिए यह बीमारी जंगल की आग की तरह फैल गई। ब्रिटिश सम्राज्य के रॉयल सोसाइटी ऑफ मेडिसिन को सलाह दी गई कि अगर कोई बीमार हैं तो घर पर ही रहें और ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, लेकिन ब्रिटिश हुकुमत ने युद्ध को जारी रखना उचित समझा।
लॉकडाउन 4.0 के दौरान दिल्ली की सड़कों पर लगा जाम
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भारत में कोरोना के संक्रमण को कम करने के लिए लॉकडाउन का चौथा चरण जारी है। 21, 19 और 14 दिन के लॉकडाउन के बाद अब फिर 31 मई तक लॉकडाउन है, लेकिन इस बार कई रियायतें दी गईं हैं। दुकानें, सरकारी, प्राइवेट दफ्तर खुल चुके हैं यानी लोगों को बाहर निकलने की अनुमति मिल चुकी है। ऑटो, टैक्सी, बस सेवा शुरू कर दी गई है। इन हालातों में हमें पहले से ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी क्योंकि जैसा हमने बताया दूसरे चरण में यह महामारी ज्यादा घातक हो जाती हैं।
दरअसल, 1918 में न तो कोई एंटीबायोटिक्स थी और न वायरस को देखने के लिए उन्नत माइक्रोस्कोप। ऐसे में हॉस्पिटलों में मरीजों की भीड़ लग गई। उस वक्त स्पैनिश फ्लू को रोकने के लिए कोरोना वायरस की तरह दुनियाभर में लॉकडाउन नहीं किया गया। हालांकि, कुछ शहरों में थिएटर, डांस हॉल्स, सिनेमा, शराबखानों (पब) पर युद्ध के चलते समय को लेकर पाबंदियां लगी थीं, लेकिन ये ज्यादातर खुले थे।
फुटबॉल लीग और एफए कप को युद्ध के चलते रद्द कर दिया गया, लेकिन अन्य मैचों को रद्द करने या भीड़ को कम करने की कोई कोशिश नहीं हुई। पुरुषों की टीमों के क्षेत्रीय टूर्नामेंट्स, महिलाओं के फुटबॉल मैचों में बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हुए। यह सब महामारी के दौरान चलता रहा। कुछ शहरों और कस्बों में सड़कों पर डिसइनफेक्टेंट छिड़के गए और कुछ लोगों ने एंटी-जर्म मास्क भी पहनना शुरू कर दिया। लोगों को स्वास्थ्य संबंधी निर्देश साफ नहीं थे। कुछ फैक्ट्रियों में, नो-स्मोकिंग नियमों में ढील दे दी गई। यूनाइटेड स्टेटस में कुछ राज्यों ने अपने नागरिकों पर क्वारंटीन लागू कर दिया। इसके मिलेजुले नतीजे रहे। कुछ राज्यों ने फेस मास्क पहनना अनिवार्य बनाने की कोशिश की। सिनेमा, थिएटर्स और अन्य मनोरंजन की जगहें पूरे देश में बंद कर दी गईं।