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Gaza Strip: क्या है गाजा पट्टी, जहां हमास पर हमला कर रहा इस्राइल; कैसे बनी यह दुनिया की सबसे बड़ी खुली जेल?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Thu, 12 Oct 2023 07:53 PM IST

सार

The Gaza Strip: गाजा पट्टी करीब 365 वर्ग किलोमीटर का एक छोटा सा क्षेत्र है। इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष का केंद्र गाजा पट्टी ही रहा है। यह दो फलस्तीनी क्षेत्रों में से एक है। गाजा पट्टी के अलावा वेस्ट बैंक दूसरा फलस्तीनी क्षेत्र है, जिसके अधिकांश हिस्से पर इस्राइल का कब्जा है।
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गाजा पट्टी - फोटो : अमर उजाला
गाजा पट्टी का कुल क्षेत्रफल महज 365 वर्ग किमी है। दुनिया के सबसे छोटे क्षेत्रों में शामिल यह इलाका इस वक्त एक खूनी युद्ध का मैदान बन चुका है। रेड क्रॉस ने आशंका जताई है कि गाजा पट्टी श्मशान में बदल सकता है। इस्राइली सैनिक हमास के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में गाजा पट्टी पर लगातार हमले कर रहे हैं।  

हिंसा के केंद्र में दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले और गरीब क्षेत्रों में से एक गाजा पट्टी है। इस्राइल ने सोमवार से ही गाजा पट्टी की घेराबंदी कर रखी है। रक्षा मंत्री योव गैलेंट के आदेश के बाद यहां बिजली, भोजन, पानी सब ठप कर दिया गया है। बिना भोजन और पानी के यहां रहने वाले 20 लाख से अधिक फलस्तीनियों के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है। जो इस्राइल के हमलों से बच रहे हैं उन पर भूख-प्यास से मरने का खतरा मंडरा रहा है।  


आखिर ये गाजा पट्टी है क्या? इसका इतिहास क्या है? हमास और इस्राइल के बीच जारी जंग में गाजा पट्टी निशाने पर क्यों है? इस्राइल-फिलिस्तीन की दुश्मनी के केंद्र में गाजा पट्टी क्यों रहा है? गाजा पट्टी पर शासन कौन करता है? हमास की यहां क्या भूमिका है? इसे क्यों खुली जेल तक की संज्ञा दी जा चुकी है? आइये जानते हैं…
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गाजा पट्टी - फोटो : अमर उजाला
गाजा पट्टी का कुल क्षेत्रफल महज 365 वर्ग किमी है। दुनिया के सबसे छोटे क्षेत्रों में शामिल यह इलाका इस वक्त एक खूनी युद्ध का मैदान बन चुका है। रेड क्रॉस ने आशंका जताई है कि गाजा पट्टी श्मशान में बदल सकता है। इस्राइली सैनिक हमास के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में गाजा पट्टी पर लगातार हमले कर रहे हैं।  

हिंसा के केंद्र में दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले और गरीब क्षेत्रों में से एक गाजा पट्टी है। इस्राइल ने सोमवार से ही गाजा पट्टी की घेराबंदी कर रखी है। रक्षा मंत्री योव गैलेंट के आदेश के बाद यहां बिजली, भोजन, पानी सब ठप कर दिया गया है। बिना भोजन और पानी के यहां रहने वाले 20 लाख से अधिक फलस्तीनियों के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है। जो इस्राइल के हमलों से बच रहे हैं उन पर भूख-प्यास से मरने का खतरा मंडरा रहा है।  

आखिर ये गाजा पट्टी है क्या? इसका इतिहास क्या है? हमास और इस्राइल के बीच जारी जंग में गाजा पट्टी निशाने पर क्यों है? इस्राइल-फिलिस्तीन की दुश्मनी के केंद्र में गाजा पट्टी क्यों रहा है? गाजा पट्टी पर शासन कौन करता है? हमास की यहां क्या भूमिका है? इसे क्यों खुली जेल तक की संज्ञा दी जा चुकी है? आइये जानते हैं…

गाजा पट्टी की सीमा पर दो तरफ से इस्राइल तो एक ओर मिस्र की निगरानी। - फोटो : Amar Ujala
गाजा पट्टी क्या है? 
यह करीब 365 वर्ग किलोमीटर का एक छोटा सा क्षेत्र है। इसके एक ओर भूमध्य सागर। बाकी तीन ओर से इसकी सीमाएं इस्राइल और मिस्र से लगी हुई हैं। इसकी उत्तरपूर्वी और दक्षिणपूर्वी सीमा की तरफ इजरायली क्षेत्र है। वहीं,  दक्षिण पश्चिम में गाजा पट्टी की सीमा मिस्र से लगती है। इसके पश्चिम में भूमध्य सागर है।

इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष का केंद्र गाजा पट्टी ही रहा है। यह दो फलस्तीनी क्षेत्रों में से एक है। गाजा पट्टी के अलावा वेस्ट बैंक दूसरा फलस्तीनी क्षेत्र है, जिसके अधिकांश हिस्से पर इस्राइल का कब्जा है। 

गाजा में इस्राइल का हवाई हमला - फोटो : पीटीआई
गाजा पट्टी पर नियंत्रण का इतिहास क्या रहा है?
ब्रिटेन का उपनिवेश बनने से पहले गाजा ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। 1918 से 1948 तक इस पर ब्रिटेन का नियंत्रण रहा। 1948 में हुए युद्ध के बाद गाजापट्टी पर मिस्र का कब्जा हो गया। 1967 तक गाजा पट्टी पर मिस्र का कब्जा बरकरार रहा। 1967 में हुए छह दिन के युद्ध के बाद एक बार फिर गाजा पट्टी पर नियंत्रण बदला। 1948 में इस्राइल के गठन के करीब बीस साल बाद गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक पर भी इस्राइल का कब्जा हो गया। युद्ध से पहले वेस्ट बैंक पर जॉर्डन का नियंत्रण था। 1947 के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में ये दोनों इलाके फलस्तीन का हिस्सा थे। दोनों ही इलाकों को फलस्तीनी आज भी इन पर अपना दावा करते हैं। 

1967 के बाद करीब 38 साल तक गाजा इस्राइल के नियंत्रण में रहा। इस दौरान गाजा में 21 यहूदी बस्तियां बसाई गईं। गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक पर इस्राइल के कब्जे के विरोध में तनाव और हिंसा वर्षों तक जारी रही। इसमें पहला इंतिफादा भी शामिल है, जिसमें करीब चार साल तक विरोध प्रदर्शन, दंगे और बमबारी हुई थी। इन इलाकों में जारी रक्तपात के चलते 1992 में इस्राइली प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन ने कहा, 'मैं चाहूंगा कि गाजा समुद्र में डूब जाए, लेकिन ऐसा नहीं होगा, इसलिए हमें इसका समाधान ढूंढना होगा।'

इसके बाद 1993 में राबिन और फलस्तीनी नेता यासिर अराफात के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ। इसे ओस्लो अकॉर्ड के नाम से जाना जाता है। इस समझौते का उद्देश्य फलस्तीनियों को आत्मनिर्णय का अधिकार देना था। इसके बाद 1994 में फलस्तीनियों का गाजा पर सरकारी तौर पर नियंत्रण हो गया। 2003 में इस्राइली प्रधानमंत्री एरियल शेरोन ने गाजा पट्टी से इस्राइली बस्तियों को नष्ट करने का प्रस्ताव रखा। उनके इस कदम को शांति के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा गया।  

घरेलू और अंतराष्ट्रीय दबाव के चलते 2005 में इस्राइल ने गाजा पट्टी से अपना नियंत्रण पूरी तरह खत्म कर लिया। इसके तरह उसने गाजा से करीब नौ हजार इस्राइलियों और सैनिकों को वापस बुला लिया।  

गाजा पट्टी
अब गाजा पर किसका नियंत्रण है? हमास की इसमें क्या भूमिका है?
90 के दशक में फलस्तीन की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों में शामिल हमास ओस्लो समझौते के खिलाफ था। 2006 में गाजा में हुए चुनाव के बाद हमास गाजा की सत्ता में आया। 1987 में गाजा और वेस्ट बैंक पर इस्राइल के कब्जे के विरोध में बना यह संगठन आज फलस्तीन का सबसे बड़ा आतंकी समूह कहा जाता है। 2006 में हमास की जीत के बाद यहां कभी चुनाव नहीं हुए।

तब से यहां हमास का नियंत्रण है। हालांकि, इसे पूरी तरह हमास नियंत्रित नहीं कह सकते हैं। क्योंकि, इस्राइल ने अपना नियंत्रण यहां वापस लेने के बाद भी 2007 से गाजा पर जमीन, वायु और समुद्री नाकाबंदी कर रखी है। इसका आम फलस्तीनियों को बहुत नुकसान हुआ है। 2009 में संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा था कि इस्राइल और मिस्र की नाकाबंदी की वजह से गाजा में विकास खत्म हो रहा है। वहीं, इस्राइल कहता है कि इस नाकाबंदी की वजह से ही वह हमास को ताकतवर होने से रोक सका है। इसके जरिए वह हमास के रॉकेट हमलों से इस्राइलियों की रक्षा कर पाता है। 
 
वहीं, दूसरी ओर इस नाकाबंदी को दुनियाभर के मानवाधिकार संगठन और संयुक्त राष्ट्र आज भी मानते हैं कि गाजा पर इस्राइली नियंत्रण है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने 2010 में गाजा की तुलना खुली जेल से की थी। प्रसिद्ध भाषाविद् और सार्वजनिक बुद्धिजीवी नोम चॉम्स्की ने 2012 में इसे दुनिया की सबसे बड़ी खुली हवा वाली जेल बताया था। गाजा की घेराबंदी की वजह से ही बीते कई वर्षों से पत्रकार, एक्टिविस्ट और शिक्षाविद इसे खुली जेल के तौर पर संबोधित करते रहे हैं।  

गाजा पट्टी की नाकाबंदी का वहां के लोगों पर क्या असर हुआ है? 
फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी के मुताबिक गाजा से लोगों और सामानों की आवाजाही पर लंबे समय से लगे प्रतिबंधों ने वहां जीवन बेहद कठिन बना दिया है। बीते करीब डेढ़ दशक से गाजा में सामाजिक आर्थिक स्थिति में लगातार गिरावट हो रही है। 

इस्राइल समुद्र और हवाई मार्ग से गाजा पट्टी तक आने-जाने पर रोक लगाता है। लोगों और सामानों की आवाजाही तीन क्रॉसिंगों तक सीमित है: पहला राफा क्रॉसिंग जिसका नियंत्रण मिस्र के पास है। दूसरा इरेज और तीसरा केरेम शालोम क्रॉसिंग जिनका नियंत्रण इस्राइल करता है।  

गाजा में रह रही 63 फीसदी आबादी खाद्य असुरक्षा का समाना कर रही है। यहां के 81 फीसदी लोग गरीबी में जी रहे हैं। बिजली और साफ पानी मिलना भी बहुत मुश्किल है। यहां के लोग बिजली, पानी और भोजन के लिए इस्राइल पर अत्यधिक निर्भर हैं। ऐसे में इस्राइली रक्षा मंत्री का इनकी आपूर्ति बंद करने का एलान गाजा के आम लोगों के लिए कोढ़ में खाज के समान है। 

दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले शहरों में से एक है गाजा पट्टी। - फोटो : Amar Ujala
गाजा पट्टी में कितने लोग रहते हैं? 
गाजा पट्टी जिसकी लंबाई महज 41 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई 12 किलोमीटर है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 365 वर्ग किलोमीटर के इस छोटे से इलाके में कम से कम 23 लाख लोग रहते हैं। यह दुनिया का 63वां सबसे घनी आबादी वाला शहरी क्षेत्र है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक यहां कम से कम आठ फलस्तीनी शरणार्थी शिविर हैं और ये दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले हैं। हालांकि, इस इलाके का जनसंख्या घनत्व अलग-अलग जगह अलग-अलग है। यहां की कुल आबादी का 49.3 फीसदी महिलाएं और 50.7 फीसदी पुरुष हैं।  

यूनीसेफ के मुताबिक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि गाजा पट्टी में लगभग 10 लाख बच्चे रहते हैं, जिसका अर्थ है कि गाजा में लगभग आधे लोग बच्चे हैं। सीआईए के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत आबादी 15 वर्ष से कम आयु की है। संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी के मुताबिक यहां की कुल आबादी में 14 लाख से ज्यादा फलस्तीनी शरणार्थी हैं। 
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक गाजा पट्टी की बेरोजगारी दर दुनिया में सबसे अधिक है। यहां की 80 फीसदी आबादी बुनियादी जरूरत के लिए भी अंतर्राष्ट्रीय सहायता पर निर्भर है।
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