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क्या है सेक्शन 301?: जिसके आड़ में दोबारा टैरिफ लगाने की फिराक में है US, जानें कैसे बन रही 60 देशों की लिस्ट

Wed, 03 Jun 2026 11:39 AM IST
रिया दुबे वाशिंगटन, आईएएनएस

सार

अमेरिका 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत भारत समेत 60 देशों की व्यापार नीतियों की जांच कर रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) का कहना है कि कई देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार में बाधा पैदा करती हैं और 54 देश जबरन श्रम से बने उत्पादों के निर्यात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं।
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सेक्शन 301 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमेरिका भारत समेत 60 देशों के खिलाफ नए व्यापारिक कदम उठा सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने संकेत दिया है कि 1974 के अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 (Section 301) के तहत चल रही जांच के नतीजे आने वाले हफ्तों में जारी किए जाएंगे। जांच में दक्षिण कोरिया, चीन, जापान और भारत सहित 70 से अधिक देशों की व्यापार नीतियों की समीक्षा की जा रही है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने क्या बताया?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीयर ने कहा कि अगर जांच में अनुचित व्यापारिक प्रथाएं, अत्यधिक उत्पादन क्षमता या जबरन श्रम से जुड़े मामलों की पुष्टि होती है, तो अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव ला सकता है।

धारा 301 के तहत कैसे तलाशी जा रही है संभावनाएं?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, धारा 301 के तहत यह पाया गया है कि 60 देशों की नीतियां और कार्यशैली अमेरिकी व्यापार पर गैरजरूरी दबाव डालती हैं और अमेरिकी कारोबार में बाधा उत्पन्न करती हैं। USTR अमेरिका की वह संघीय एजेंसी है जो देश की विदेश व्यापार नीति तैयार करने और व्यापारिक जांच करने के लिए जिम्मेदार है।

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बयान में कहा गया है कि भारत समेत 54 देश ऐसे उत्पादों के निर्यात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने में विफल रहे हैं, जिनके निर्माण में जबरन श्रम का इस्तेमाल होने की आशंका रहती है। इस सूची में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, चीन, जापान, सऊदी अरब, सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं।

क्या है सेक्शन 301?

सेक्शन 301 अमेरिका के 1974 के ट्रेड एक्ट का एक प्रावधान है, जो अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को किसी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच करने और उन्हें अमेरिकी हितों के खिलाफ या अनुचित पाए जाने पर जवाबी कार्रवाई की अनुमति देता है। इसके तहत अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ), व्यापारिक प्रतिबंध या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

ग्रीयर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना और उत्पादन गतिविधियों को वापस अमेरिका लाना है। उनका दावा है कि लंबे समय से जारी अनुचित व्यापारिक प्रथाओं और बढ़ते व्यापार घाटे के कारण अमेरिका को सख्त टैरिफ नीति अपनानी पड़ रही है।

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गौरतलब है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश-विशेष पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद ट्रंप प्रशासन अब सेक्शन 301 के तहत देशवार जांच कर नए टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने के बाद भारत समेत कई देशों के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

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