नागरिक बुनियादी ढांचे पर कथित अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि वह अब खाड़ी देशों के प्रमुख पुलों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाएगी और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उसके शत्रु पीछे नहीं हटते। क्षेत्रीय और सुरक्षा विश्लेषणों के अनुसार ईरान ने पश्चिम एशिया के लगभग सभी प्रमुख रणनीतिक पुलों को अपनी संभावित हिट लिस्ट में शामिल किया है, जिससे कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन और सीरिया की कनेक्टिविटी तथा आर्थिक ढांचा गंभीर जोखिम में आ गया है।
प्रेस टीवी और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के निशाने पर जो प्रमुख पुल हैं उनमें पश्चिम एशिया में सबसे प्रमुख और संवेदनशील पुलों में सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे शामिल है, जिसकी लंबाई लगभग 25 किलोमीटर है और यह 1986 में करीब 1.2 अरब डॉलर की लागत से बनाया गया था।
अब आंकड़ों का गणित भी समझिए
खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और मिडिल ईस्ट इकोनॉमिक डाइजेस्ट (एमईईडी) के आंकड़ों के अनुसार यह कॉजवे रोजाना भारी यातायात और व्यापारिक गतिविधियों का मुख्य मार्ग है। इसके अलावा, कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद कॉजवे खाड़ी क्षेत्र का एक और विशाल प्रोजेक्ट है, जिसकी लंबाई लगभग 36 किलोमीटर है और लागत करीब 3.6 अरब डॉलर रही। कुवैत सरकार और विश्व बैंक के अनुसार यह पुल राजधानी को उत्तरी क्षेत्रों और तेल उत्पादन केंद्रों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
व्यापारिक मार्गों पर होगा गंभीर संकट
इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (आईएसडब्ल्यू) के अनुसार ये पुल संघर्ष के दौरान कई बार क्षतिग्रस्त हुए हैं, लेकिन इन पर स्थानीय स्तर पर आवागमन और सैन्य गतिविधियां अभी भी निर्भर करती हैं। किंग फहद कॉजवे पर प्रतिदिन 60,000 से अधिक वाहनों का आवागमन होता है, जिससे बहरीन और सऊदी अरब के बीच व्यापार, पर्यटन और श्रम गतिशीलता बनी रहती है। शेख जाबेर कॉजवे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह भारी औद्योगिक और सैन्य यातायात को संभाल सके।
सप्लाई चेन होगी बाधित
विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन पुलों पर मिसाइल या ड्रोन हमले होते हैं, तो सबसे पहले सप्लाई चेन बाधित होगी। सऊदी अरब और बहरीन के बीच खाद्य, ईंधन और उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के आकलन के मुताबिक, इस तरह की बाधाओं से ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ेगा, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल संभव है।
सैन्य संतुलन पर असर
ये पुल खाड़ी देशों के लिए केवल आर्थिक नहीं बल्कि सैन्य दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज और इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) के विश्लेषण के अनुसार इन मार्गों के जरिए सैनिकों और उपकरणों की तेज आवाजाही संभव होती है। किसी भी क्षति से सैन्य प्रतिक्रिया की गति प्रभावित हो सकती है।