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Bangladesh: सुवेंदु ने भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारे गए दीपू के पिता से की बात, आर्थिक मदद देने का किया था एलान

Thu, 25 Dec 2025 07:58 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

बांग्लादेश के मयमनसिंह में हिंदू मजदूर दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या के बाद मामला अंतरराष्ट्रीय ध्यान में आ गया है। पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने पीड़ित पिता से बात की। बता दें, बीते दो दिन पहले ही उन्होंने हर महीने परिवार को आर्थिक मदद देने का एलान किया था।
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दीपू के परिवार से बात करते हुए सुवेंदु अधिकारी - फोटो : ANI (वीडियो ग्रैब)
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विस्तार
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बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में एक हिंदू मजदूर की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना ने भारत और बांग्लादेश दोनों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इस मामले में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने पीड़ित के पिता से फोन पर बात कर संवेदना जताई और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।
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पीड़ित के पिता राबिलाल चंद्र दास ने बताया कि उन्हें बेटे की मौत की जानकारी सबसे पहले सोशल मीडिया के जरिए मिली। बाद में रिश्तेदारों से पता चला कि दीपु को पेड़ से बांधकर पीटा गया और फिर केरोसिन डालकर आग लगा दी गई। हत्या के बाद उसका शव ढाका-मयमनसिंह हाईवे के किनारे छोड़ दिया गया, जिससे सड़क पर यातायात भी ठप हो गया। परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

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आर्थिक मदद देने का वादा
सुवेंदु ने 23 तारीख को आर्थिक मदद का एलान किया था। उन्होंने इसे मानवता का मामला बताते हुए कहा कि वह परिवार के संपर्क में हैं और उनसे बातचीत कर मासिक आर्थिक सहायता की व्यवस्था करेंगे। सुवेंदु ने स्पष्ट किया कि यह सहायता पूरी तरह मानवीय आधार पर होगी, ताकि परिवार को जीवनयापन में तत्काल सहारा मिल सके।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां
घटना के बाद बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की पहचान कर ली गई है और आगे की जांच जारी है। अंतरिम सरकार ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि ऐसी हिंसा का नए बांग्लादेश में कोई स्थान नहीं है और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी।
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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
प्रसिद्ध लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने इस घटना को झूठे आरोपों का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा कि दीपु एक गरीब मजदूर था और परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य था। उनके अनुसार, मामूली विवाद को धार्मिक रंग देकर भीड़ को उकसाया गया और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

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