पश्चिम एशिया में वैश्विक ताकतों का संघर्ष
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ईरान से बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में बदलते हालात के बीच इस्राइल का कहना है कि भारत के साथ साझेदारी न सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती देगी, बल्कि व्यापक क्षेत्र में सुरक्षा माहौल भी बेहतर करेगी। एक वरिष्ठ इस्राइली विदेश मंत्रालय अधिकारी ने भारतीय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत और इस्राइल के बीच नागरिक और रक्षा, दोनों क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इस बात पर भी काम कर सकते हैं कि हर राष्ट्र अपनी सीमाओं के भीतर गतिविधियों पर पूर्ण नियंत्रण रखे और गैर-राज्य तत्व प्रभावशाली भूमिका न निभाएं।
अधिकारी ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को बेहद अच्छा और परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र में स्थिरता ला सकता है। हालांकि 7 अक्तूबर को हमास के हमले के बाद परियोजना की गति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक गाजा मुद्दे पर कुछ ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक सऊदी अरब और अन्य देशों की भागीदारी पर अनिश्चितता बनी रहेगी। इस्राइल के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (रि.) आमिर बाराम ने भी हाल ही में कहा था कि देश ईरान से संभावित भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अगली पीढ़ी की तकनीकों के विकास में जुटा है।
हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने की अपील
इस्राइल ने भारत से हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने की अपील भी दोहराई। अधिकारी ने कहा कि भारत के इस कदम का वैश्विक प्रभाव होगा और इससे दुनिया को स्पष्ट संदेश जाएगा कि आतंकवाद के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। ईरान को लेकर इस्राइली अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में हुए हालिया घटनाक्रमों के बावजूद तेहरान अपनी प्रॉक्सी रणनीति को और मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ‘अधिकतम दबाव नीति’ को और कठोर बनाने की जरूरत है क्योंकि ईरान अब भी बड़ा खतरा है।